पड़ौसी देश नेपाल को ही लें तो वहां आये भूकम्प की त्रासदी में 34 देशों की बचाव एवं राहत टीमों ने काम किया। लेकिन भारत के अधिकांश इलेक्ट्रोनिक मीडिया ने नार्वे, इजराइल, कनाडा, चीन सहित 33 देशों द्वारा नेपाल में भूकम्प के दौरान जो राहत एवं बचाव कार्य किये गये उन पर जबान खोलने की कोशिश भी नहीं की गई। केवल भारत के ही गुणगान करते रहे। यहां तक कि भारत के इलेक्ट्रोनिक मीडिया ने नेपाली सेना और राहतकर्मियों के कार्यों की भी अनदेखी की। भारत के कुछ इलेक्ट्रानिक मीडियाकर्मियों की करतूतों के कारण नेपाल के पत्रकार और नेपाल की जनता खास कर गुरखा जिले के पीडि़त परिवारों में भारतीय इलेक्ट्रोनिक मीडिया के खिलाफ नाराजगी पनप गई। ज्ञातव्य रहे कि 35 हजार से ज्यादा गुरखा सैनिक भारतीय सेना में सेवारत हैं। वहीं हजारों भूतपूर्व सैनिक जिन्हें भारत सरकार 5 करोड़ रूपये से भी अधिक पेंशन देती है, वे भी भारतीय इलेक्ट्रोनिक मीडिया के एक हिस्से की करतूतों से नाराज हैं।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इलेक्ट्रोनिक मीडिया के एक हिस्से द्वारा आप पार्टी के नेताओं व परिजनों के खिलाफ बिना किसी सबूत के चलाई जा रही मुहिम से नाराज होकर साफ-साफ कह दिया है कि इलेक्ट्रानिक मीडिया और बड़े मीडिया वाले जो दुष्प्रचार कर रहे हैं उसका वे कोई जवाब नहीं देंगे। केवल दिल्ली सरकार और उनके मंत्रियों के कामकाज के बारे में ही पूछने पर जवाब देंगे।
इससे भी साफ जाहिर हो जाता है कि इलेक्ट्रोनिक मीडिया और बड़े मीडिया घरानों के पास पैसा बटोरो अभियान के अलावा और कोई काम नहीं रह गया लगत है। मीडिया के इस हिस्से को पत्रकारिता से कोई लेनादेना नहीं प्रतीत होता है, ऐसा लगने लगा है। लेकिन छोटे अखबारों में आज भी देश और देश की जनता के प्रति कार्य करने का उत्साह बरकरार है। जबकि केंद्र की भारतीय जनता पार्टीनीत नरेन्द्र मोदी सरकार सहित राज्यों में भाजपा की सरकारें सबसे ज्यादा धनराशि इलेक्ट्रोनिक मीडिया को विज्ञापन पेटे देती हैं। यह बात इससे भी साबित हो जाती है कि खुद केंद्र सरकार ने एक प्रश्न के उत्तर में माना है कि इलेक्ट्रोनिक मीडिया को विज्ञापन पेटे सबसे ज्यादा धनराशि दी जाती है।
उपरोक्तानुसार अब यह साफ हो गया है कि भारतीय जनता पार्टीनीत केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार सहित राज्य सरकारें छोटे अखबारों की अनदेखी कर इलेक्ट्रोनिक मीडिया और बड़े अखबारों को अनावश्यक रूप से विज्ञापनों के जरिये मोटी धनराशि दे रही है।
नेपाल भूकम्प त्रासदी मुद्दे को लेकर तो भारतीय इलेक्ट्रोनिक मीडिया के एक हिस्से की कारगुजारियों की वजह से नेपाल सहित पूरे विश्व में जो किरकिरी हुई है। उसे पटरी पर लाने में काफी वक्त लगेगा, इसलिये छोटे अखबारों को प्रोत्साहित कर इलेक्ट्रोनिक मीडिया के एक तकबे द्वारा कायम किये जंगलराज को अंकुशित किया जा सकता है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इलेक्ट्रोनिक मीडिया के एक हिस्से द्वारा आप पार्टी के नेताओं व परिजनों के खिलाफ बिना किसी सबूत के चलाई जा रही मुहिम से नाराज होकर साफ-साफ कह दिया है कि इलेक्ट्रानिक मीडिया और बड़े मीडिया वाले जो दुष्प्रचार कर रहे हैं उसका वे कोई जवाब नहीं देंगे। केवल दिल्ली सरकार और उनके मंत्रियों के कामकाज के बारे में ही पूछने पर जवाब देंगे।
इससे भी साफ जाहिर हो जाता है कि इलेक्ट्रोनिक मीडिया और बड़े मीडिया घरानों के पास पैसा बटोरो अभियान के अलावा और कोई काम नहीं रह गया लगत है। मीडिया के इस हिस्से को पत्रकारिता से कोई लेनादेना नहीं प्रतीत होता है, ऐसा लगने लगा है। लेकिन छोटे अखबारों में आज भी देश और देश की जनता के प्रति कार्य करने का उत्साह बरकरार है। जबकि केंद्र की भारतीय जनता पार्टीनीत नरेन्द्र मोदी सरकार सहित राज्यों में भाजपा की सरकारें सबसे ज्यादा धनराशि इलेक्ट्रोनिक मीडिया को विज्ञापन पेटे देती हैं। यह बात इससे भी साबित हो जाती है कि खुद केंद्र सरकार ने एक प्रश्न के उत्तर में माना है कि इलेक्ट्रोनिक मीडिया को विज्ञापन पेटे सबसे ज्यादा धनराशि दी जाती है।
उपरोक्तानुसार अब यह साफ हो गया है कि भारतीय जनता पार्टीनीत केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार सहित राज्य सरकारें छोटे अखबारों की अनदेखी कर इलेक्ट्रोनिक मीडिया और बड़े अखबारों को अनावश्यक रूप से विज्ञापनों के जरिये मोटी धनराशि दे रही है।
नेपाल भूकम्प त्रासदी मुद्दे को लेकर तो भारतीय इलेक्ट्रोनिक मीडिया के एक हिस्से की कारगुजारियों की वजह से नेपाल सहित पूरे विश्व में जो किरकिरी हुई है। उसे पटरी पर लाने में काफी वक्त लगेगा, इसलिये छोटे अखबारों को प्रोत्साहित कर इलेक्ट्रोनिक मीडिया के एक तकबे द्वारा कायम किये जंगलराज को अंकुशित किया जा सकता है।


