जयपुर (अग्रगामी) अल्पसंख्यक समुदाय के जैन वर्ग के छात्र-छात्राओं हेतु केंद्र सरकार की छात्रवृति योजना प्रारंभ हो गई है और इसके लिये ऑन लाईन फार्म की प्रक्रिया भी प्रारम्भ हो चुकी है। जिन अल्पसंख्यक वर्ग के जैन परिवारों की वार्षिक आय दो लाख रूपसे तक है उनके परिवारों के बच्चों के लिये ऑन लाईन फार्म भरे जाने हैं। ऑन लाईन फार्म करने की अंतिम तारीख 30 सितम्बर, 2015 है।
जैन अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों हेतु भरे जाने वाले ऑन लाईन फार्म भरे जाने हेतु अन्य दस्तावेजों के साथ अल्पसंख्यकता प्रमाण पत्र भी लगाना जरूरी होता है। लेकिन राजस्थान सरकार जैन अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र बनाने में भारी कोताही बरत रही है। राजस्थान की राजधानी जयपुर को ही लें तो बीस हजार से ज्यादा जैन परिवार जिनके अलग-अलग माध्यमों से अल्पसंख्यकता प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिये आवेदन किया है। उन्हें अल्पसंख्यकता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं हो रहे हैं। यही हाल जैन अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं के हैं जिन्हें अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं का दर्जा नहीं दिया जा रहा है। भारी तादाद में अल्पसंख्यक जैन शिक्षण संस्थायें निदेशक, अल्पसंख्यक मामलात विभाग राजस्थान में पंजीकृत नहीं हैं। नतीजन उनके द्वारा अग्रेषित आवेदन पत्र निरस्त हो जाते हैं।
अल्पसंख्यक जैन समुदाय के लिये जैन सांस्कृतिक एकेडमी, जैन साहित्य एकेडमी आदि प्रारम्भ करने के लिये राजस्थान सरकार अभी तक मानस नहीं बना पाई है। यही हाल जैन अल्पसंख्क वर्ग के परिवारों को रोजगार दिलाने के मामले में है। राज्य सरकार अल्पसंख्यक वर्ग के परिवारों को रोजगार दिलाने में भी लगभग असफल है।
सूत्र बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी की राजस्थान सरकार जानबूझ कर इन मुद्दों पर देरी कर, यह सिद्ध कर सके कि अल्पसंख्यक जैन समुदाय में गरीब परिवारों की संख्या नगण्य है। गत वर्ष भी भारी संख्या में अल्पसंख्यक जैन परिवार केंद्रीय छात्रवृति एवं रोजगार प्रारंभ करने के लिये धन प्राप्त करने से वंचित रह गये थे। आशा है कि इस बार राज्य सरकार जैन समुदाय को उनके वाजिब अधिकार जरूर दिलवायेगी।
जैन अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों हेतु भरे जाने वाले ऑन लाईन फार्म भरे जाने हेतु अन्य दस्तावेजों के साथ अल्पसंख्यकता प्रमाण पत्र भी लगाना जरूरी होता है। लेकिन राजस्थान सरकार जैन अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र बनाने में भारी कोताही बरत रही है। राजस्थान की राजधानी जयपुर को ही लें तो बीस हजार से ज्यादा जैन परिवार जिनके अलग-अलग माध्यमों से अल्पसंख्यकता प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिये आवेदन किया है। उन्हें अल्पसंख्यकता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं हो रहे हैं। यही हाल जैन अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं के हैं जिन्हें अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं का दर्जा नहीं दिया जा रहा है। भारी तादाद में अल्पसंख्यक जैन शिक्षण संस्थायें निदेशक, अल्पसंख्यक मामलात विभाग राजस्थान में पंजीकृत नहीं हैं। नतीजन उनके द्वारा अग्रेषित आवेदन पत्र निरस्त हो जाते हैं।
अल्पसंख्यक जैन समुदाय के लिये जैन सांस्कृतिक एकेडमी, जैन साहित्य एकेडमी आदि प्रारम्भ करने के लिये राजस्थान सरकार अभी तक मानस नहीं बना पाई है। यही हाल जैन अल्पसंख्क वर्ग के परिवारों को रोजगार दिलाने के मामले में है। राज्य सरकार अल्पसंख्यक वर्ग के परिवारों को रोजगार दिलाने में भी लगभग असफल है।
सूत्र बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी की राजस्थान सरकार जानबूझ कर इन मुद्दों पर देरी कर, यह सिद्ध कर सके कि अल्पसंख्यक जैन समुदाय में गरीब परिवारों की संख्या नगण्य है। गत वर्ष भी भारी संख्या में अल्पसंख्यक जैन परिवार केंद्रीय छात्रवृति एवं रोजगार प्रारंभ करने के लिये धन प्राप्त करने से वंचित रह गये थे। आशा है कि इस बार राज्य सरकार जैन समुदाय को उनके वाजिब अधिकार जरूर दिलवायेगी।


