हमें गर्व है कि हम भारत में जन्में हैं और हमारी कामना है कि हमारा अंतिम समय भारत में ही गुजरे और अंतिम संस्कार भी भारत में ही हो। जिन्हें भारत में जन्म लेने पर शर्म आ रही है वे तत्काल भारत को अलविदा कह कर अपने मनपसंद देश में चले जायें तथा जो प्रवासी भारतीय भारत में जन्म लेने की शर्मिंदगी के बीच विदेशों में रह रहे हैं, उन्हें चाहिये कि अपनी शर्मिंदगी मिलने के लिये भारतीय कहलाना छोड़ दें तथा भारत से सम्बन्ध विच्छेद कर लें! हम शर्मिंदगी के फोबिया से पीडि़त लोगों को यह संदेश भी देना चाहेंगे कि वे जिस देश में रह रहे हैं वहां की नागरिकता लेकर इस देश का ठप्पा अपने ऊपर लगा लें ओर अपनी शर्मिंदगी को छुपा लें। भारत भारतीयों का देश है यह कुछ कट्टरवादी हिन्दुओं या मुसलमानों की बपौती नहीं है। पिछले कुछ अरसे से भारत को हिन्दुस्तान बनाने की मुहिम चलाई जा रही है। इस देश का नाम भारत आदिनाथ ऋषभदेव के प्रपौत्र भरत के नाम पर भरत रखा गया था जिसे अंग्रेजी में भारत कहते हैं। लगभग साढ़े चार हजार साल पुराने इस नाम को बदलने की जो साजिश कर रहे हैं वे लोग भारतीय नहीं हो सकते और उन्हें अपनी सांस्कृतिक उत्पत्ति स्त्रोत को तलाश कर वहां चला जाना चाहिये।
भारत जिन संस्कृति (जैन संस्कृति) और वैदिक संस्कृति के आपसी मेलजोल की मिसाल है तथा किसी भी विदेशी को भारत या भारतीयता पर व्यंग कसने की हिमाकत नहीं करनी चाहिये। देश के वर्तमान सत्ताधीशों को अपनी बेतुकी सोच को उजागर करने से पहले भारत पांच हजार साल पुराने इतिहास का गहनता से अध्ययन कर लेना चाहिये।
हम भारतीय थे हैं और रहेंगे! हमारे देश का नाम भारत है और हम नहीं चाहेंगे कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई हमारे देश भारत के बारे में गैरजुम्मेदारान तरीके से अनुचित शब्दों का इस्तेमाल करे। भारत में सत्ता किसी की बपौती नहीं है! जो लोग चुनकर आये हैं उनके सत्ता में रहने के पांच साल पूरे होने के बाद कौनसी गुमनानी की जिंदगी जीनी पड़ेगी ये तो वो ही तय कर सकते हैं!
अब भी वक्त है कि सत्ता के मद में मद्होंश राजनेता आपसी लड़ाई में हमारे देश भारत की आनबान पर भविष्य में कोई अनुचित टिप्पणी नहीं करेंगे। यही हमारी सत्ताधीशों से अपेक्षा है। -हीराचंद जैन
भारत जिन संस्कृति (जैन संस्कृति) और वैदिक संस्कृति के आपसी मेलजोल की मिसाल है तथा किसी भी विदेशी को भारत या भारतीयता पर व्यंग कसने की हिमाकत नहीं करनी चाहिये। देश के वर्तमान सत्ताधीशों को अपनी बेतुकी सोच को उजागर करने से पहले भारत पांच हजार साल पुराने इतिहास का गहनता से अध्ययन कर लेना चाहिये।
हम भारतीय थे हैं और रहेंगे! हमारे देश का नाम भारत है और हम नहीं चाहेंगे कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई हमारे देश भारत के बारे में गैरजुम्मेदारान तरीके से अनुचित शब्दों का इस्तेमाल करे। भारत में सत्ता किसी की बपौती नहीं है! जो लोग चुनकर आये हैं उनके सत्ता में रहने के पांच साल पूरे होने के बाद कौनसी गुमनानी की जिंदगी जीनी पड़ेगी ये तो वो ही तय कर सकते हैं!
अब भी वक्त है कि सत्ता के मद में मद्होंश राजनेता आपसी लड़ाई में हमारे देश भारत की आनबान पर भविष्य में कोई अनुचित टिप्पणी नहीं करेंगे। यही हमारी सत्ताधीशों से अपेक्षा है। -हीराचंद जैन


