देश की राजधानी दिल्ली में दिल्ली राज्य सरकार एवं लेफ्टीनेंट गर्वरन में जो नूराकुश्ती हो रही है वह उचित नहीं है। आज दिल्ली राज्य सरकार की बागड़ोर संभालने के मुद्दे पर जनता द्वारा चुनिंदा प्रतिनिधियों और केंद्र द्वारा नियुक्त एक नौकरशाह के बीच जंग छिडी है! अगर नौकरशाह के जरिये ही केंद्र सरकार को दिल्ली का राज्य का शासन चलाना है तो फिर दिल्ली में विधानसभा और विधानसभा द्वारा चुनिंदा सरकार की कोई जरूरत नहीं है। क्योंकि जनता द्वारा चुनिंदा सरकार को एक नौकरशाह के उपदेशों का मोहताज रहने के लिये देश के संविधान में कोई व्यवस्था नहीं है।
चूंकि केंद्र में भारतीय जनता पार्टीनीत नरेन्द्र मोदी की सरकार है और दिल्ली राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार है ऐसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी द्वारा पहले तो आम आदमी पार्टी को तोडऩे के प्रयास किये गये और उसमें असफल रहने के बाद अब दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग के माध्यम से दिल्ली सरकार को अपदस्थ करने के प्रयास किये जा रहे हैं, जोकि अनुचित है। हम आपको याद दिला दें कि बिहार में जनता दल युनाइटेड की सरकार को गिराने के लिये जीतनराय मांझी को मोहरा बनाकर भारतीय जनता पार्टी ने जो चाल चली थी वह असफल रही थी। उसी तरह की चाल भारतीय जनता पार्टी के आका दिल्ली में कर रहे हैं। इसका नतीजा क्या निकलेगा यह तो वक्त ही बतायेगा लेकिन एक बात तो तय है कि भाजपाई नेताओं की करतूतों से आम अवाम तंग आ गया है और इन्हें दोबारा सत्ता में देखने का मानस अवाम में नहीं है।
कालाधन विदेशों से देश में लाकर प्रत्येक मतदाता को 15 लाख रूपये मतदाता के खाते में जमा करने के नरेन्द्र मोदी के वादे को भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने पहले ही जुमला करार दे दिया! वहीं खाने-पीने की वस्तुओं के दाम एक साल में बाजारों में डेढ़े हो गये हैं। लेकिन मोदी सरकार आंकड़ों में बाजीगरी के जरिये कागजों में मंहगाई कम होने का लेखा-जोखा बना रही है। मोदी सरकार के आंकड़ों की हेराफेरी को दरकिनार कर आम अवाम नरेन्द्र मोदी और उनके पिछलग्गुओं ने एक ही सवाल कर रहा है कि नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी बाजारों में आम आदमी की तरह जायें और देखें कि वास्तविकता क्या है?
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों और भारतीय जनता पार्टी की नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को अच्छी तरह समझ लेना चाहिये कि अगर उन्होंने अपनी नात्सीवादी, सामन्तवादी और हिन्दुत्ववादी कट्टरता को त्याग कर भारत के संविधान में वर्णित तरीके से निरपेक्ष भाव से समाजवादी भारत के निर्माण में कार्य नहीं किया तो जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।
चूंकि केंद्र में भारतीय जनता पार्टीनीत नरेन्द्र मोदी की सरकार है और दिल्ली राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार है ऐसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी द्वारा पहले तो आम आदमी पार्टी को तोडऩे के प्रयास किये गये और उसमें असफल रहने के बाद अब दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग के माध्यम से दिल्ली सरकार को अपदस्थ करने के प्रयास किये जा रहे हैं, जोकि अनुचित है। हम आपको याद दिला दें कि बिहार में जनता दल युनाइटेड की सरकार को गिराने के लिये जीतनराय मांझी को मोहरा बनाकर भारतीय जनता पार्टी ने जो चाल चली थी वह असफल रही थी। उसी तरह की चाल भारतीय जनता पार्टी के आका दिल्ली में कर रहे हैं। इसका नतीजा क्या निकलेगा यह तो वक्त ही बतायेगा लेकिन एक बात तो तय है कि भाजपाई नेताओं की करतूतों से आम अवाम तंग आ गया है और इन्हें दोबारा सत्ता में देखने का मानस अवाम में नहीं है।
कालाधन विदेशों से देश में लाकर प्रत्येक मतदाता को 15 लाख रूपये मतदाता के खाते में जमा करने के नरेन्द्र मोदी के वादे को भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने पहले ही जुमला करार दे दिया! वहीं खाने-पीने की वस्तुओं के दाम एक साल में बाजारों में डेढ़े हो गये हैं। लेकिन मोदी सरकार आंकड़ों में बाजीगरी के जरिये कागजों में मंहगाई कम होने का लेखा-जोखा बना रही है। मोदी सरकार के आंकड़ों की हेराफेरी को दरकिनार कर आम अवाम नरेन्द्र मोदी और उनके पिछलग्गुओं ने एक ही सवाल कर रहा है कि नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी बाजारों में आम आदमी की तरह जायें और देखें कि वास्तविकता क्या है?
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों और भारतीय जनता पार्टी की नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को अच्छी तरह समझ लेना चाहिये कि अगर उन्होंने अपनी नात्सीवादी, सामन्तवादी और हिन्दुत्ववादी कट्टरता को त्याग कर भारत के संविधान में वर्णित तरीके से निरपेक्ष भाव से समाजवादी भारत के निर्माण में कार्य नहीं किया तो जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।


