तीसरे दादा गुरूदेव की प्रत्यक्ष दर्शनस्थली मालपुरा दादाबाडी में वरिष्ठ उपाध्यक्ष विजय संचेती, व्यवस्थापक राजकुमार बैंगानी और राजेन्द्र कुमार संचेती तथा कुछ पूंजीपतियों और इनके चमचों के कारण दिनांक 31 दिसम्बर, 2014 को रात्रि में हुये अनुराधा पोडवाल के जागरण कार्यक्रम के दौरान गहरी अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई। एक स्तर पर तो श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारियों और आयोजकों द्वारा पुलिस व प्राइवेट गार्डों और हथियारबंद गार्डों के द्वारा समाजबंधुओं को प्रताडि़त करने की कोशिश की गई। आक्रोशित समाजबंधुओं ने गार्डों को भगा दिया और पुलिसकर्मियों द्वारा यह कहते हुये कि सारी गलती पदाधिकारियों की है और चूंकि धार्मिक स्थल है तथा समाजबंधु अपनी जगह पर सही हैं किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने से इन्कार करते हुये पुलिसकर्मी वापिस लौट गये।
हम यहां बता दें कि गत 31 दिसम्बर, 2014 को रात्रि जागरण और 1 जनवरी, 2015 को प्रात: पूजा एवं माणक मूर्ति स्थापना हेतु हुये कार्यक्रम में भाग लेने हेतु प्रदेश के अधिकांश जिलों एव अन्य राज्यों से श्रावक-श्राविकाऐं और बच्चे शामिल हुये थे। सभी में कार्यक्रमों में भाग लेने हेतु उत्साह देखा गया। लेकिन सेठों और उने चमचों द्वारा अनुराधा पोडवाल भजन संध्या को अपने को धनपति होने का ऐहसास कराने साधन बना दिया गया। अनुराधा पोडवाल के कार्यक्रम को सुनने के लिये आयोजकों और खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारियों द्वारा पास से प्रवेश करने की व्यवस्था की गई बताई जाती है। पास से प्रवेश की व्यवस्था देखने में तो उचित प्रतीत हो रही थी लेकिन वास्तव में पास बांटने की जो व्यवस्था थी वह अंधा बांटे रेवड़ी फिर-फिर अपने वो ही देत कहावत को चरितार्थ कर रही थी। आयोजनकों
शेष पेज एक का
और दादाबाडी प्रबंधकों द्वारा पास वितरण अपने नजदीकियों को ही ज्यादातर किया गया। पास की नौटंकी का आलम यह था कि जो श्रद्धालु मालपुरा दादाबाडी देर शाम पहुंचे थे। उन्हें दादा गुरूदेव और मंदिर जी के दर्शन करने के लिये भी मना कर दिया गया और दरवाजे बंद कर दिये गये। नतीजन देर शाम तक मालपुरा दादाबाडी पहुंचे श्रद्धालुओं को दादा गुरूदेव के दर्शनों से वंचित होना पड़ा।
जैन श्वेताम्बर समाज के तीसरे प्रगट प्रभावी दादा गुरूदेव जिन कुशलसूरि की प्रगट स्थली मालपुरा दादाबाडी में 31 दिसम्बर की रात्रि को रात्रि जागरण का आयोजन किया गया था, इस रात्रि जागरण को कुछ पूंजीपतियों और उनके दुमछल्लों द्वारा इसे अनुराधा पोडवाल नाईट के रूप में प्रचारित कर दिया गया।
ज्ञातव्य रहे कि श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना एवं अन्य पदाधिकारियों एवं उनके चमचों की करतूतों से हर साल मालपुरा दादाबाडी में समारोह व उत्सवों के दौरान अव्यवस्थायें होती है, खमियाजा दादा गुरूदेव के श्रद्धालुओं को उठाना पड़ता है और मलाई संघ पदाधिकारी चाटते हैं। इस साल भी वही स्थिति पदाधिकारियों व आयोजकों के साथ बनानी चाही। हमारे पास उपलब्ध जानकारियों के आधार पर यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि संघ अध्यक्ष कुशलचंद सुराना की सरपरस्ती में संघ पदाधिकारी जानबूझ कर अव्यवस्थायें फैलाते हैं और मालपुरा दादाबाडी को व्यक्तिगत जागीर बनाने का प्रयास करते रहते हैं। खरतरगच्छ जन चेतना मंच के सदस्यों द्वारा उस जमीन का निरीक्षण भी किया और आवश्यक दस्तावेजोंं तथा जानकारियों का संग्रहण करने का कार्य भी किया गया जिसकी खरीद के बारे में संघ की साधारण सभा के विशेष अधिवेशन में खरीद का प्रस्ताव आया था।
हम यहां बता दें कि गत 31 दिसम्बर, 2014 को रात्रि जागरण और 1 जनवरी, 2015 को प्रात: पूजा एवं माणक मूर्ति स्थापना हेतु हुये कार्यक्रम में भाग लेने हेतु प्रदेश के अधिकांश जिलों एव अन्य राज्यों से श्रावक-श्राविकाऐं और बच्चे शामिल हुये थे। सभी में कार्यक्रमों में भाग लेने हेतु उत्साह देखा गया। लेकिन सेठों और उने चमचों द्वारा अनुराधा पोडवाल भजन संध्या को अपने को धनपति होने का ऐहसास कराने साधन बना दिया गया। अनुराधा पोडवाल के कार्यक्रम को सुनने के लिये आयोजकों और खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारियों द्वारा पास से प्रवेश करने की व्यवस्था की गई बताई जाती है। पास से प्रवेश की व्यवस्था देखने में तो उचित प्रतीत हो रही थी लेकिन वास्तव में पास बांटने की जो व्यवस्था थी वह अंधा बांटे रेवड़ी फिर-फिर अपने वो ही देत कहावत को चरितार्थ कर रही थी। आयोजनकों
शेष पेज एक का
और दादाबाडी प्रबंधकों द्वारा पास वितरण अपने नजदीकियों को ही ज्यादातर किया गया। पास की नौटंकी का आलम यह था कि जो श्रद्धालु मालपुरा दादाबाडी देर शाम पहुंचे थे। उन्हें दादा गुरूदेव और मंदिर जी के दर्शन करने के लिये भी मना कर दिया गया और दरवाजे बंद कर दिये गये। नतीजन देर शाम तक मालपुरा दादाबाडी पहुंचे श्रद्धालुओं को दादा गुरूदेव के दर्शनों से वंचित होना पड़ा।
जैन श्वेताम्बर समाज के तीसरे प्रगट प्रभावी दादा गुरूदेव जिन कुशलसूरि की प्रगट स्थली मालपुरा दादाबाडी में 31 दिसम्बर की रात्रि को रात्रि जागरण का आयोजन किया गया था, इस रात्रि जागरण को कुछ पूंजीपतियों और उनके दुमछल्लों द्वारा इसे अनुराधा पोडवाल नाईट के रूप में प्रचारित कर दिया गया।
ज्ञातव्य रहे कि श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना एवं अन्य पदाधिकारियों एवं उनके चमचों की करतूतों से हर साल मालपुरा दादाबाडी में समारोह व उत्सवों के दौरान अव्यवस्थायें होती है, खमियाजा दादा गुरूदेव के श्रद्धालुओं को उठाना पड़ता है और मलाई संघ पदाधिकारी चाटते हैं। इस साल भी वही स्थिति पदाधिकारियों व आयोजकों के साथ बनानी चाही। हमारे पास उपलब्ध जानकारियों के आधार पर यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि संघ अध्यक्ष कुशलचंद सुराना की सरपरस्ती में संघ पदाधिकारी जानबूझ कर अव्यवस्थायें फैलाते हैं और मालपुरा दादाबाडी को व्यक्तिगत जागीर बनाने का प्रयास करते रहते हैं। खरतरगच्छ जन चेतना मंच के सदस्यों द्वारा उस जमीन का निरीक्षण भी किया और आवश्यक दस्तावेजोंं तथा जानकारियों का संग्रहण करने का कार्य भी किया गया जिसकी खरीद के बारे में संघ की साधारण सभा के विशेष अधिवेशन में खरीद का प्रस्ताव आया था।


