मालपुरा (अग्रगामी) जैन समाज के जुझारू संगठन खरतगच्छ जन चेतना मंच के पदाधिकारियों और कार्यकारिणी के सदस्यों ने मालपुरा में अनुसूचित जाति के व्यक्ति की उस जमीन का निरीक्षण किया जिसे एक बिल्डर मालपुरा दादाबाडी के प्रबंधन को संभालने वाले श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ को बेचना चाहता है, हालांकि जमीन खरीद के मुद्दे पर संघ के अन्दर ही गहरी नाराजगी है।
श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ सदस्यों का कहना है कि मालपुरा दादाबाडी के आधीन पहले से ही काफी जमीन है और अभी फिलहाल ओर जमीन की आवश्यकता नहीं है। समाजबंधुओं में इस बात पर भी आक्रोश था कि मालपुरा दादाबाडी में स्थित बाडी को लुप्त कर दिया गया है, जिसके कारण गुरूदेव और मंदिर में फूलों की आपूर्ति समाप्त हो गई है। खरीदे जारहे पुष्प आदि वैसे ही एक दिन पुराने होते हैं जिन्हें जैन विधि से उपचारित कर दादा गुरूदेव के चरणों और उनकी मूर्ति पर अर्पित नहीं किया जा रहा है। संघ के कुछ पदाधिकारियों द्वारा अपनी राठौडी चलाने के मामलों/मुद्दों की खरतरगच्छ जन चेतना मंच के पदाधिकारियों और सदस्यों ने विस्तार से जानकारी ली, जिसे समाज की जानकारी में लाने की सहमती बनी।
मालपुरा के स्थानीय समाजबंधुओं से विस्तृत विचार विमर्श के दौरान यह सामने आया कि स्थानीय समाजबंधुओं से दादाबाडी में होने वाले क्रियाकलापों के लिये कोई सहयोग नहीं लिया जाता है। जबकि श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ जयपुर इस दादाबाडी का मात्र एक केयरटेकर है। ऐसी स्थिति में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ जयपुर के पदाधिकारियों को चाहिये कि वे मालपुरा दादाबाडी के रखरखाव में स्थानीय समाजबंधुओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करे।
मालपुरा दादाबाडी एक परिवार के कुछ सेठियों की घर की जागीर नहीं है और मालपुरा के समाजबंधुओं की सक्रिय भागीदारी को नकारना शस्त्र विरूद्ध है। साथ ही स्थानीय समाजबंधुओं ने स्पष्ट कर दिया कि मालपुरा दादाबाडी जैसे धार्मिक स्थल को पर्यटन स्थल में तब्दील करने की जो मनोवृति श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ जयपुर के पदाधिकारियों की है, उसका डट कर विरोध किया जायेगा।
श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ सदस्यों का कहना है कि मालपुरा दादाबाडी के आधीन पहले से ही काफी जमीन है और अभी फिलहाल ओर जमीन की आवश्यकता नहीं है। समाजबंधुओं में इस बात पर भी आक्रोश था कि मालपुरा दादाबाडी में स्थित बाडी को लुप्त कर दिया गया है, जिसके कारण गुरूदेव और मंदिर में फूलों की आपूर्ति समाप्त हो गई है। खरीदे जारहे पुष्प आदि वैसे ही एक दिन पुराने होते हैं जिन्हें जैन विधि से उपचारित कर दादा गुरूदेव के चरणों और उनकी मूर्ति पर अर्पित नहीं किया जा रहा है। संघ के कुछ पदाधिकारियों द्वारा अपनी राठौडी चलाने के मामलों/मुद्दों की खरतरगच्छ जन चेतना मंच के पदाधिकारियों और सदस्यों ने विस्तार से जानकारी ली, जिसे समाज की जानकारी में लाने की सहमती बनी।
मालपुरा के स्थानीय समाजबंधुओं से विस्तृत विचार विमर्श के दौरान यह सामने आया कि स्थानीय समाजबंधुओं से दादाबाडी में होने वाले क्रियाकलापों के लिये कोई सहयोग नहीं लिया जाता है। जबकि श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ जयपुर इस दादाबाडी का मात्र एक केयरटेकर है। ऐसी स्थिति में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ जयपुर के पदाधिकारियों को चाहिये कि वे मालपुरा दादाबाडी के रखरखाव में स्थानीय समाजबंधुओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करे।
मालपुरा दादाबाडी एक परिवार के कुछ सेठियों की घर की जागीर नहीं है और मालपुरा के समाजबंधुओं की सक्रिय भागीदारी को नकारना शस्त्र विरूद्ध है। साथ ही स्थानीय समाजबंधुओं ने स्पष्ट कर दिया कि मालपुरा दादाबाडी जैसे धार्मिक स्थल को पर्यटन स्थल में तब्दील करने की जो मनोवृति श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ जयपुर के पदाधिकारियों की है, उसका डट कर विरोध किया जायेगा।


