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सम्मान बनाम अपमान!

राजस्थान की वसुन्धरा राजे सरकार ने राजीव गांधी ग्रामीण सेवा केंद्रों का नाम बदल कर अटल सेवा केंद्र करने के आदेश प्रसारित किये है। अपनी नाकामियों को छिपाने के लिये वसुन्धरा राजे प्रशासन ने योजनाओं के नाम बदलने जैसी हरकतों का सहारा लिया है।
राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री रहे हैं और वर्ष 1991 में भारतरत्न से सम्मानित किये गये। वहीं अटल बिहारी वाजपेयी 1999 से 2004 तक प्रधानमंत्री रहे। इसमें कोई शक नहीं होना चाहिये की अटल बिहारी वाजपेयी का राजनैतिक कद राजीव गांधी से ज्यादा ऊंचा है! लेकिन राजस्थान की वसुन्धरा राजे सरकार ने राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी में तुलना का जो रास्ता ढूंढा है वह अत्यन्त निन्दनीय है।
राजीव गांधी सेवा केंद्रों का नाम बदल कर अटल सेवा केंद्र करने से आम अवाम को क्या फायदा पहुंचेगा? वहीं राजीव गांधी सेवा केंद्रों का नाम बदल कर अटल सेवा केंद्र करने से अटल बिहारी वाजपेयी को क्या सम्मान मिलेगा? यह तो वसुन्धरा राजे सरकार और प्रशासन ही सही तरीके से बता सकता है! अगर अटल बिहारी वाजपेयी को सम्मानित करने का रंचमात्र भी सोच वसुन्धरा राजे सरकार और प्रशासन के दिमाग में होता तो सरकार और प्रशासन उनके नाम से जनहित की कोई नई योजना शुरू करती न कि किसी वर्तमान योजना का नाम बदल कर अटल बिहारी वाजपेयी को अपमानित करने की हरकत करती। अटल बिहारी वाजपेयी और राजीव गांधी दोनों ही देश के भूतपूर्व प्रधानमंत्री रहे हैं और भारतरत्न से सम्मानित है। वावजूद इसके अटल बिहारी वाजपेयी का राजनैतिक कद राजीव गांधी से ऊंचा है। राजीव गांधी ग्रामीण सेवा केंद्रों का नाम बदलकर अटल सेवा केंद्र कर अटल बिहारी वाजपेयी को अपमानित करने का सोच किस दिमाग की उपज है, यह भी वसुन्धरा राजे सरकार और प्रशासन ही बता सकते हैं।
योजनाओं का नाम बदल कर हेराफरी कर किसी को भी सम्मानित नहीं किया जा सकता है। बल्कि जाने अनजाने में उसे अपमानित करने की श्रेणी में आता है। अभी भी वक्त है कि वसुन्धरा राजे सरकार कोई नई योजना अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से कर उन्हें सम्मानित करने का प्रयास करेगी।

 
AGRAGAMI SANDESH

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