जयपुर (अग्रगामी) शहरी सरकार के चुनने के बाद यह उम्मीद जगी थी कि स्थानीय निकायों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, लेकिन इन स्थानीय निकायों में भ्रष्टाचार थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। हम जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पश्चिम से स्थानीय निकायों में व्याप्त भ्रष्टाचार का खुलासा कर रहे हैं।
जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पश्चिम में भवन निर्माण शाखा में लम्बे समय से जमे कारिंदों और अधिकारियों की मिलीभगत के चलते इस जोन क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माणों की बाढ आई हुई है। जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व क्षेत्र के अन्तर्गत चौकडी विश्वेश्वरजी को ही लें तो गैर कानूनी बिना इजाजत तामिर के बने कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों की यहां भरमार है। ऐसा नहीं है कि हवामहल जोन पश्चिम के आयुक्त और उनके मातहत अफसरों और कारिंदों को इसकी खबर नहीं हो! दरअसल जयपुर नगर निगम के मुख्यकार्यकारी अधिकारी, विधि निदेशक, सतर्कता आयुक्त सहित जोन आयुक्त और उनके मातहत अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत से ही अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों का निर्माण भूमाफियाओं और बिल्डर माफियाओं द्वारा किया जा रहा है। भवन म्यूनिसिपल संख्या 2313, रत्नश्री में कॉमर्शियल काम्प्लेक्स को तोडऩे के आदेश रेकार्ड पर हैं, लेकिन इस पर कार्यवाही करने से बचने और इस भवन को बचाने वाले आयुक्त मदनकुमार शर्मा ने अब अपने जोन क्षेत्र में इस भूमाफिया का एक ओर अवैध निर्माण म्युनिसिपल भवन संख्या 1090-91 पर गैर कानूनी अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स की पूरी छूट दे रखी है। सूत्रों का कहना है कि सीईओ से लेकर जोन आयुक्त एवं उनके मातहत अफसरों और कर्मचारियों की शह पर कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों का निर्माण तेजी से हो रहा है। इन दोनों अवैध निर्माणों का निर्माणकर्ता बिल्डर माफिया का राज्य के उच्च शिक्षामंत्री कालीचरण सर्राफ से नजदीकियों का बखान करते हुये अपने इन अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के निर्माण में लिप्त है।
भवन म्युनिसिपल संख्या 2055 में भी गोवर्धन दास झंवर ने नगर निगम के अधिकारियों से सांठगांठ कर गैर कानूनी रूप से बिना इजाजत तामिर लिये अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स बना लिया। इसी से चंद दूरी पर म्युनिसिपल भवन संख्या 1990, कोठारी भवन, में भी बिना इजाजत तामिर किये चार मंजिला कॉमर्शियल काम्प्लेक्स बना लिया गया, लेकिन चांदी के जूते के नीचे दबकर जयपुर नगर निगम के अफसर कोई कार्यवाही नहीं कर रहे हैं।
इसी तरह चौकडी मोदीखाना में तत्कालीन पार्षद अनिल बम्ब ने बैंक वाली गली, चूरूकों का रास्ता, चौड़ा रास्ता में भवन म्युनिसिपल भवन संख्या 937 में अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स जयपुर नगर निगम के अफसरों एवं कारिंदों की मिलीभगत से बना लिया है। वहीं म्यूनिसिपल भवन संख्या 1854 एवं 1861 एवं इनके आसपास में भी कॉमर्शियल निर्माण की अवैध एवं गैर कानूनी गतिविधियां चल रहीं है। लेकिन नगर निगम के घूंसखोर अफसर और कारिंदे न तो इनको रोक रहे हैं और न ही अवैध रूप से बिना इजाजत तामिरात करवाये जा रहे कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों को तोड़ रहे हैं।
इस ही तरह फिल्म कॉलोनी स्थित दूनी हाऊस, भवन संख्या 14 के मामले में भी जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पश्चिम के जोन आयुक्त मदन कुमार शर्मा को लगातार शिकायतों के साथ अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स पर कार्यवाही के आग्रह को अपने दफ्तर की चार दिवारी में ही दबाये रखा गया। यहां तक की शिकायतों को फाइलों से हटा कर एक अन्य फाईल में लगा दिया बताया जाता है ताकि इस भवन में हो रही व्यवसायिक गतिविधियों पर पर्दा डाला जा सके और बिल्डर से उनकी मासिक किस्तें आती रहें। ज्ञातव्य रहे कि इस भवन को जयपुर नगर निगम ने पूर्व में भी ध्वस्त करने की कार्यवाही की थी और इसकी छतों को पंचर कर दिया था। जिसे अब भवन निर्माणकर्ता ने अवैध रूप से वापस पेचअप वर्क करवा कर ठीक कर दिया जोकि भारी खतरे की ओर इशारा करता है। लेकिन जोन आयुक्त मदन कुमार शर्मा और कारिंदे किसी बडे हादसे के इंतजार में है। ज्ञातव्य रहे कि रेकार्ड पर आज भी इस भवन को ध्वस्त करने के आदेश मौजूद हैं।
उपरोक्त बिना इजाजत अवैध रूप से निर्माण करवाये जा रहे कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के अलावा भी जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पश्चिम के आधीन क्षेत्र में गैर कानूनी अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों की बाढ आई हुई है। जिनमें भवन संख्या 1135, मिश्रराजा जी का रास्ता, भवन संख्या 978 एवं इसके पास ही हो रहे अवैध व्यवसायिक निर्माण, भवन संख्या 1170 और पटवों का रास्ता में स्थित भवन संख्या 2490 अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स मुख्य हैं।
जयपुर नगर निगम में बैठे भ्रष्टाचारियों ने चौड़ा रास्ता में सारे नियम कानूनों को धता बताते हुये स्कूल के पास बिना इजाजत तामीरात दिये ही अवैध रूप से दुकानें बनवा दी। एक दुकान को तो बनवाने हेतु हवामहल जोन पश्चिम के अफसरों ने जोन के एक कारिंदे को नियुक्त भी किया था।
इन सभी मामलों में भारतीय जनता पार्टी के कुछ पार्षदों की मिलीभगत भी रही है जिनको हम अगले अंकों में उजागर करेंगे।
जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पश्चिम में भवन निर्माण शाखा में लम्बे समय से जमे कारिंदों और अधिकारियों की मिलीभगत के चलते इस जोन क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माणों की बाढ आई हुई है। जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व क्षेत्र के अन्तर्गत चौकडी विश्वेश्वरजी को ही लें तो गैर कानूनी बिना इजाजत तामिर के बने कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों की यहां भरमार है। ऐसा नहीं है कि हवामहल जोन पश्चिम के आयुक्त और उनके मातहत अफसरों और कारिंदों को इसकी खबर नहीं हो! दरअसल जयपुर नगर निगम के मुख्यकार्यकारी अधिकारी, विधि निदेशक, सतर्कता आयुक्त सहित जोन आयुक्त और उनके मातहत अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत से ही अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों का निर्माण भूमाफियाओं और बिल्डर माफियाओं द्वारा किया जा रहा है। भवन म्यूनिसिपल संख्या 2313, रत्नश्री में कॉमर्शियल काम्प्लेक्स को तोडऩे के आदेश रेकार्ड पर हैं, लेकिन इस पर कार्यवाही करने से बचने और इस भवन को बचाने वाले आयुक्त मदनकुमार शर्मा ने अब अपने जोन क्षेत्र में इस भूमाफिया का एक ओर अवैध निर्माण म्युनिसिपल भवन संख्या 1090-91 पर गैर कानूनी अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स की पूरी छूट दे रखी है। सूत्रों का कहना है कि सीईओ से लेकर जोन आयुक्त एवं उनके मातहत अफसरों और कर्मचारियों की शह पर कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों का निर्माण तेजी से हो रहा है। इन दोनों अवैध निर्माणों का निर्माणकर्ता बिल्डर माफिया का राज्य के उच्च शिक्षामंत्री कालीचरण सर्राफ से नजदीकियों का बखान करते हुये अपने इन अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के निर्माण में लिप्त है।
भवन म्युनिसिपल संख्या 2055 में भी गोवर्धन दास झंवर ने नगर निगम के अधिकारियों से सांठगांठ कर गैर कानूनी रूप से बिना इजाजत तामिर लिये अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स बना लिया। इसी से चंद दूरी पर म्युनिसिपल भवन संख्या 1990, कोठारी भवन, में भी बिना इजाजत तामिर किये चार मंजिला कॉमर्शियल काम्प्लेक्स बना लिया गया, लेकिन चांदी के जूते के नीचे दबकर जयपुर नगर निगम के अफसर कोई कार्यवाही नहीं कर रहे हैं।
इसी तरह चौकडी मोदीखाना में तत्कालीन पार्षद अनिल बम्ब ने बैंक वाली गली, चूरूकों का रास्ता, चौड़ा रास्ता में भवन म्युनिसिपल भवन संख्या 937 में अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स जयपुर नगर निगम के अफसरों एवं कारिंदों की मिलीभगत से बना लिया है। वहीं म्यूनिसिपल भवन संख्या 1854 एवं 1861 एवं इनके आसपास में भी कॉमर्शियल निर्माण की अवैध एवं गैर कानूनी गतिविधियां चल रहीं है। लेकिन नगर निगम के घूंसखोर अफसर और कारिंदे न तो इनको रोक रहे हैं और न ही अवैध रूप से बिना इजाजत तामिरात करवाये जा रहे कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों को तोड़ रहे हैं।
इस ही तरह फिल्म कॉलोनी स्थित दूनी हाऊस, भवन संख्या 14 के मामले में भी जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पश्चिम के जोन आयुक्त मदन कुमार शर्मा को लगातार शिकायतों के साथ अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स पर कार्यवाही के आग्रह को अपने दफ्तर की चार दिवारी में ही दबाये रखा गया। यहां तक की शिकायतों को फाइलों से हटा कर एक अन्य फाईल में लगा दिया बताया जाता है ताकि इस भवन में हो रही व्यवसायिक गतिविधियों पर पर्दा डाला जा सके और बिल्डर से उनकी मासिक किस्तें आती रहें। ज्ञातव्य रहे कि इस भवन को जयपुर नगर निगम ने पूर्व में भी ध्वस्त करने की कार्यवाही की थी और इसकी छतों को पंचर कर दिया था। जिसे अब भवन निर्माणकर्ता ने अवैध रूप से वापस पेचअप वर्क करवा कर ठीक कर दिया जोकि भारी खतरे की ओर इशारा करता है। लेकिन जोन आयुक्त मदन कुमार शर्मा और कारिंदे किसी बडे हादसे के इंतजार में है। ज्ञातव्य रहे कि रेकार्ड पर आज भी इस भवन को ध्वस्त करने के आदेश मौजूद हैं।
उपरोक्त बिना इजाजत अवैध रूप से निर्माण करवाये जा रहे कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के अलावा भी जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पश्चिम के आधीन क्षेत्र में गैर कानूनी अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों की बाढ आई हुई है। जिनमें भवन संख्या 1135, मिश्रराजा जी का रास्ता, भवन संख्या 978 एवं इसके पास ही हो रहे अवैध व्यवसायिक निर्माण, भवन संख्या 1170 और पटवों का रास्ता में स्थित भवन संख्या 2490 अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स मुख्य हैं।
जयपुर नगर निगम में बैठे भ्रष्टाचारियों ने चौड़ा रास्ता में सारे नियम कानूनों को धता बताते हुये स्कूल के पास बिना इजाजत तामीरात दिये ही अवैध रूप से दुकानें बनवा दी। एक दुकान को तो बनवाने हेतु हवामहल जोन पश्चिम के अफसरों ने जोन के एक कारिंदे को नियुक्त भी किया था।
इन सभी मामलों में भारतीय जनता पार्टी के कुछ पार्षदों की मिलीभगत भी रही है जिनको हम अगले अंकों में उजागर करेंगे।


