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आखीर एक अमेरिकी कुत्ता भी क्यों नहीं मरता?

नई दिल्ली (अग्रगामी) पाकिस्तान के पेशावर के एक आर्मी स्कूल में 132 बच्चों सहित 141 लोगों की हत्या से पूरा पाकिस्तान गमजदा है। एक मृत छात्र के परिजन ने अपना दुख व्यक्त करते हुये यह कहा बताते हैं कि हमारे सामने सैंकड़ों बच्चे या तो ताबूतों में लेटे जमींदोज होने की स्थिति में हैं या फिर बिस्तरों में लेटे अपने घावों को सहला रहे हैं। इन पर तालेबानियों ने गोलियों के माध्यम से जो कहर बरपाया, लेकिन इन तालेबानियों ने अपने आका एक भी अमेरिकी को मौत के घाट नहीं उतार, यहां तक की वे एक अमेरिकी कुत्ते को भी नहीं मार पाये।
तालेबानियों का जन्मदाता अमेरिका है। यह किसी से छुपा हुआ नहीं है। तालेबानियों और अलकायदा के लड़ाकों के सहयोग से ही अमेरिकी फौजों ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया था और वहां के शासकों को अपने आधीन करने की पुरजोर कोशिश की थी। अफगानी शासकों को मदद करने वाली अमेरिकी सेना अभी भी अफगानिस्तान में है, लेकिन अफगानी और पाकिस्तानी के गिरेबां पर हाथ डालने की हिमाकत नहीं कर रही है। आखीर क्यों?
शादत देने वाले बच्चों के पाकिस्तानी अभिभावकों का ये कथन कि एक भी अमेरिकी कुत्ता क्यों नहीं मरता अपने आप में स्पष्ट है और अमेरिकीयों के खिलाफ उनके गुस्से को उजागर करता है।
मोदी सरकार को भी पाकिस्तान के वर्तमान राजनैतिक हालातों ने शायद कोई सबक नहीं सिखाया है। हमने पहले भी लिखा है कि अमेरिका से ज्यादा पींगे बढ़ाना भारत के लिये खतरनाक हो सकता है। ऐसी हालत में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के अग्रिम संगठन भारतीय जनता पार्टीनीत नरेन्द्र मोदी सरकार को गहराई से समझ लेना चाहिये कि अमेरिका से ज्यादा दोस्ती बढ़ाना भारत देश के लिये खतरा है। वैसे भी हमारे देश का समग्र सोच समाजवादी है न कि पूंजीवाद! अत: मोदी सरकार को चाहिये कि वह अमेरिका की जगह रूस को प्राथमिकता दें। वही देशहित में उचित होगा।

 
AGRAGAMI SANDESH

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