जयपुर (अग्रगामी) ऑल इण्डिया फारवर्ड ब्लाक की राजस्थान स्टेट कमेटी के महामंत्री कामरेड हीराचंद जैन ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक के सरसंघचालक मोहन भागवत के इस बयान का जोरदार प्रतिवाद किया है कि भारत को हिन्दू राष्ट्र में परिवर्तित किया जायेगा। भारत गणतंत्र के संविधान में वर्णित निर्देशों के अनुसार भारत को हिन्दू राष्ट्र में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है।
ज्ञातव्य रहे कि हिन्दू मेसोपोटामिया की हिब्रू संस्कृति के विघटन से बना एक धर्म है और भारत में वे विदेशी मूल के रूप में ही आये थे। ऐसी स्थिति में मोहन भागवत का यह कथन कि भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाया जायेगा, निन्दनीय है। भारत का नाम तीर्थंकर ऋषभदेव के प्रपौत्र भरत के नाम पर रखा गया है। जिन संस्कृति (जैन संस्कृति) हिन्दू धर्म की उत्पत्ति से हजारों साल पुरानी संस्कृति है और हिन्दुओं का अपने आपको भारत का स्वामी बनाने की सोच को भूल जाना चाहिये।
भारत के जैन और बौद्ध समुदाय को भी अब एकजुट हो जाना चाहिये और हिन्दू अतिवादियों से मुकाबले के लिये संघर्षशील हो जाना चाहिये। हिन्दुत्व के अतिवादी अनुयायियों को भी यह ध्यानपूर्वक मनन कर लेना चाहिये की भारत उनकी बपौती नहीं है। यह साफ है कि इस देश का नाम भारत है और भारत ही रहेगा, यह हिन्दुस्तान कभी नहीं हो सकता!
ज्ञातव्य रहे कि हिन्दू मेसोपोटामिया की हिब्रू संस्कृति के विघटन से बना एक धर्म है और भारत में वे विदेशी मूल के रूप में ही आये थे। ऐसी स्थिति में मोहन भागवत का यह कथन कि भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाया जायेगा, निन्दनीय है। भारत का नाम तीर्थंकर ऋषभदेव के प्रपौत्र भरत के नाम पर रखा गया है। जिन संस्कृति (जैन संस्कृति) हिन्दू धर्म की उत्पत्ति से हजारों साल पुरानी संस्कृति है और हिन्दुओं का अपने आपको भारत का स्वामी बनाने की सोच को भूल जाना चाहिये।
भारत के जैन और बौद्ध समुदाय को भी अब एकजुट हो जाना चाहिये और हिन्दू अतिवादियों से मुकाबले के लिये संघर्षशील हो जाना चाहिये। हिन्दुत्व के अतिवादी अनुयायियों को भी यह ध्यानपूर्वक मनन कर लेना चाहिये की भारत उनकी बपौती नहीं है। यह साफ है कि इस देश का नाम भारत है और भारत ही रहेगा, यह हिन्दुस्तान कभी नहीं हो सकता!


