देश में धर्मान्तरण बनाम घर वापसी का मुद्दा जोरदार तरीके से गर्माया हुआ है। उत्तर प्रदेश के आगरा जनपथ में कुछ बंगाली मुस्लिम परिवारों को मुसलमान से हिन्दू बनाने की जो प्रक्रिया अपनाई गई उस पर भी सवाल उठ रहे हैं। मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में लाइव बहस मुसाइबे का दौर चल रहा है। वहीं संसद में भी इस मुद्दे पर गतिरोध रहा। दरअसल देश की कोई भी राजनैतिक पार्टी असलियत से रूबरू नहीं होना चाहती!
ये परिवार, मुसलमान/हिन्दू वास्तव में मूलरूप से कहां के रहने वाले हैं? इस मुद्दे पर कोई भी राजनैतिक पार्टी कुछ भी बोलने के लिये तैयार नहीं है। हकीकत में ये सारे परिवार बंगलादेशी मुस्लिम परिवार हो सकते हैं। जोकि भारत में बसना चाहते हैं! हिन्दू संगठन चाहते हैं कि वे हिन्दू बनकर भारत में रहें। जबकि कुछ राजनैतिक पार्टियां चाहती है कि वे मुसलमानों के रूप में उनका वोट बैंक बने रहे।
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के अग्रिम संगठन विश्व हिन्दू परिषद्, बजरंग दल और धर्म जागरण परिषद् जैसे संगठन तथा भारतीय जनता पार्टी के भगवा वेशधारी सांसद और भी धर्मान्तरण के कार्यक्रम आयोजित करने की धमकियां दे रहे हैं। सुब्रह्मण्यम स्वामी काशी/विश्वनाथ, कृष्ण मंदिर जैसे मुद्दे उठा रहे हैं। वहीं सुषमा स्वराज्य गीता को लेकर विवाद खड़ा करने में लगी है। लेकिन किसी को भी देश की जनता की समस्याओं की तरफ नजर उठा कर देखने की फुरसत नहीं है। मंहगाई आवाम के सिर पर चढ़ कर बोल रही है। वहीं युवा में रोजगार के लिये दर-दर भटक रहा है! शासन-प्रशासन में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है और कोई माई का लाल इस भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जबान खोलने को तैयार नहीं है। भूमाफिया, जंगल माफिया, खान माफिया और बिल्डर माफिया जैसे माफियाओं ने अवाम पर शिकंजा कस रखा है, लेकिन शासन-प्रशासन को फुरसत ही नहीं है अवाम को इन से छुटकारा दिलाने के लिये।
अब तो आगरा में हुई धर्मान्तरण बनाम घर वापसी की नौटंकी की पोल खुल चुकी है! दरअसल हिन्दू, मुसलमान, ईसाई और यहूदी मेसोपोटामिया में पल्लवित हुई हिब्रू संस्कृति के अंग हैं और चारों ही धर्म से जुड़े धार्मिक नेताओं में यह होड़ लगी रहती है कि किसी भी तरह वे सबसे आगे रहे। यही कारण है कि इन चारों धर्मों में धर्मान्तरण का शगुफा जोरों पर प्रचलित है।
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ जैन समुदाय को भी हिन्दू बनाने में जुटा है और श्वेताम्बर व दिगम्बर साधुओं को पूंजीपतियों के जरिये दबाव डालकर अपने पक्ष में करने की जुगत बैठा रहा है। कुछ साधुओं के द्वारा यह भी कहलाया जा रहा है कि जैन समुदाय हिन्दुओं का अंग है। हालांकि इन साधुओं ने अपनी अब तक की उम्र में जैन संस्कृति के इतिहास को पढऩे की जहमत भी नहीं उठाई है!
कोई भी व्यक्ति जब अपना सोच बदलता है तो उसके पीछे निश्चित रूप से कोई ठोस कारण होता है, लेकिन आज तो धर्मान्तरण या घर वापसी हो रही है उसके पीछे दोनों पक्षों के आर्थिक कारक निहित हैं। ऐसी स्थिति में धर्मान्तरण या घर वापसी का कोई वैचारिक उद्देश्य नहीं है।
धर्मान्तरण/घर वापसी के कार्यक्रम आयोजित करने का कोई वैचारिक सोच नहीं होने के कारण इनके आयोजन को अनुचित ही कहा जा सकता है और यह राष्ट्रहित में नहीं है।
ये परिवार, मुसलमान/हिन्दू वास्तव में मूलरूप से कहां के रहने वाले हैं? इस मुद्दे पर कोई भी राजनैतिक पार्टी कुछ भी बोलने के लिये तैयार नहीं है। हकीकत में ये सारे परिवार बंगलादेशी मुस्लिम परिवार हो सकते हैं। जोकि भारत में बसना चाहते हैं! हिन्दू संगठन चाहते हैं कि वे हिन्दू बनकर भारत में रहें। जबकि कुछ राजनैतिक पार्टियां चाहती है कि वे मुसलमानों के रूप में उनका वोट बैंक बने रहे।
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के अग्रिम संगठन विश्व हिन्दू परिषद्, बजरंग दल और धर्म जागरण परिषद् जैसे संगठन तथा भारतीय जनता पार्टी के भगवा वेशधारी सांसद और भी धर्मान्तरण के कार्यक्रम आयोजित करने की धमकियां दे रहे हैं। सुब्रह्मण्यम स्वामी काशी/विश्वनाथ, कृष्ण मंदिर जैसे मुद्दे उठा रहे हैं। वहीं सुषमा स्वराज्य गीता को लेकर विवाद खड़ा करने में लगी है। लेकिन किसी को भी देश की जनता की समस्याओं की तरफ नजर उठा कर देखने की फुरसत नहीं है। मंहगाई आवाम के सिर पर चढ़ कर बोल रही है। वहीं युवा में रोजगार के लिये दर-दर भटक रहा है! शासन-प्रशासन में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है और कोई माई का लाल इस भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जबान खोलने को तैयार नहीं है। भूमाफिया, जंगल माफिया, खान माफिया और बिल्डर माफिया जैसे माफियाओं ने अवाम पर शिकंजा कस रखा है, लेकिन शासन-प्रशासन को फुरसत ही नहीं है अवाम को इन से छुटकारा दिलाने के लिये।
अब तो आगरा में हुई धर्मान्तरण बनाम घर वापसी की नौटंकी की पोल खुल चुकी है! दरअसल हिन्दू, मुसलमान, ईसाई और यहूदी मेसोपोटामिया में पल्लवित हुई हिब्रू संस्कृति के अंग हैं और चारों ही धर्म से जुड़े धार्मिक नेताओं में यह होड़ लगी रहती है कि किसी भी तरह वे सबसे आगे रहे। यही कारण है कि इन चारों धर्मों में धर्मान्तरण का शगुफा जोरों पर प्रचलित है।
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ जैन समुदाय को भी हिन्दू बनाने में जुटा है और श्वेताम्बर व दिगम्बर साधुओं को पूंजीपतियों के जरिये दबाव डालकर अपने पक्ष में करने की जुगत बैठा रहा है। कुछ साधुओं के द्वारा यह भी कहलाया जा रहा है कि जैन समुदाय हिन्दुओं का अंग है। हालांकि इन साधुओं ने अपनी अब तक की उम्र में जैन संस्कृति के इतिहास को पढऩे की जहमत भी नहीं उठाई है!
कोई भी व्यक्ति जब अपना सोच बदलता है तो उसके पीछे निश्चित रूप से कोई ठोस कारण होता है, लेकिन आज तो धर्मान्तरण या घर वापसी हो रही है उसके पीछे दोनों पक्षों के आर्थिक कारक निहित हैं। ऐसी स्थिति में धर्मान्तरण या घर वापसी का कोई वैचारिक उद्देश्य नहीं है।
धर्मान्तरण/घर वापसी के कार्यक्रम आयोजित करने का कोई वैचारिक सोच नहीं होने के कारण इनके आयोजन को अनुचित ही कहा जा सकता है और यह राष्ट्रहित में नहीं है।


