अग्रगामी संदेश हिन्‍दी साप्ताहिक ***** प्रत्येक सोमवार को प्रकाशित एवं प्रसारित ***** सटीक राजनैतिक विश्लेषण, लोकहित के समाचार, जनसंघर्ष का प्रहरी

अवाम चाहता है कि निजाम उनकी दुख तकलीफों को दूर करे!

जयपुर/नई दिल्ली (अग्रगामी) इस हफ्ते भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार अपना एक साला जश्र मनाने के लिये तैयारी कर रही है। हालांकि इस एक साल में वसुन्धरा राजे सरकार ने सम्भागों में राजनैतिक पिकनिक मनाने के अलावा कुछ भी नहीं किया है। मंहगाई और भ्रष्टाचार राज्य की जनता के सिर पर चढ़ कर बोल रहे हैं। वहीं राजस्थान का युवक बेरोजगारी के थपेड़े सहन करता इधर से उधर भटक रहा है।
प्रदेश की अल्पसंख्यक आबादी हिन्दुत्ववादी हुक्कामों से परेशान है। भारतीय जनता पार्टीनीत वसुन्धरा राजे सरकार और उसके आका राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ पूंजीवादी ताकतों के साथ मिलकर राज्य के अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव की नीति बरत रहे हैं। नतीजन अल्पसंख्यकों को उनके अल्पसंख्यकता प्रमाण पत्र बनवाने तक में भी दिक्कतें आ रही है।
राजस्थान की भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार एक साजिश के तहत माल संस्कृति को बढ़ावा दे कर गरीब खुदरा व्यापारियों को नेस्तनाबूद करने पर भी तुली है। वहीं नया कानून लाकर मजदूरों को उनके हकों से वंचित करना चाहती है। शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की विचारधारा को थोप कर पूरे शिक्षा जगत के माहौल को बिगाडऩे पर भी तुली है। जब भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में थी तब कक्षा 8 की परीक्षा जिला बोर्डों से कराने के खिलाफ थी आज वही भारतीय जनता पार्टीनीत वसुन्धरा राजे सरकार कक्षा 8 में वैकल्पिक बोर्ड परीक्षा की आड़ में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से बोर्ड परीक्षा आयोजित करवाने पर तुली है और इसके लिये कक्षा 8 के छात्र-छात्राओं से आवेदन पत्र भरवाये जा चुके हैं।
अब आगामी मंगलवार को भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार के मंत्रीमंडल की बैठक बुलाई गई है जिसमें 12 से 15 घोषणाऐं करने हेतु सहमति बनाई जायेगी। वहीं आगामी 13 दिसम्बर को भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार का एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की विरूदावली गायन हेतु सरकारी खर्च पर कार्यक्रम आयोजित करने की जुगत बैठाई जा रही है। आखीरकार जनता की गाढ़ी कमाई जो कि टैक्स के रूप में अवाम ने सरकार को दी है उसका दुरूपयोग करने का आशय क्या है? यह तो वसुन्धरा राजे सरकार ही बता सकती है।
अवाम मंहगाई भ्रष्टाचार और भू-माफियाओं की करतूतों से आहत है वहीं युवा बेरोजगारी से पीडि़त है। लेकिन भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार इन मुद्दों पर मौन रहकर अवाम की अनदेखी कर रही है। उधर केंद्र की भाजपानीत नरेन्द्र मोदी सरकार देश में साम्प्रदायिकता को बढ़ावा दे रही है। उसको भी मंहगाई और भ्रष्टाचार से पीडि़त आम अवाम खासकर दबे-कुचले वर्ग की खुशहाली की कोई चिंता नहीं है।
राजस्थान की भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार की घोषणाओं से खुद उनकी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता भी नाराज हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं का कथन है कि सरकार और पार्टी के बड़े नेता घोषणाऐं तो बहुत सी कर देते हैं लेकिन धरातल पर काम कुछ भी नहीं करते हैं, नतीजन आम अवाम का आक्रोश उन्हें सहन करना पड़ता है। पिछले एक साल में वसुन्धरा राजे सरकार ने घोषणाओं के बूते पर चुनाव तो जीत लिये लेकिन धरातल पर कार्य नहीं होने से जनआक्रोश को कार्यकर्ता भुगत रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं का यह भी मानना है कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के बूते पर भारतीय जनता पार्टी का राजनैतिक जीवन बहुत समय तक चलने वाला नहीं है। ऐसी स्थिति में पार्टी नेताओं को अधिनायकवादी, सामन्तवादी सोच को छोड़ कर जनहित के मुद्दों पर ठोस कार्य करना चाहिये।
राजस्थान मेंं मंहगाई, भ्रष्टाचार, अफसरशाही और युवाओं में बेरोजगारी का बोलबाला तो है ही, अब गुर्जर आंदोलन भी सिर पर चढ़ कर बोल रहा है। गुर्जर नेताओं की मांग है कि उन्हें अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाये जबकि अनुसूचित जनजाति से सम्बन्धित सुविधाओं का एक छत्र फायदा उठा रहा मीणा समाज नहीं चाहता है कि गुर्जरों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिले। कांग्रेस की सरकार व बीजेपी की वसुन्धराजे सरकार दोनों समुदायों को आपस में लड़वा कर सत्ता का सुख भोगने में लगी रही है। वैसे भी सत्ता के गलियारे का मीणा समुदाय का लगभग एक छत्र राज है और सत्ताधीश राजनेताओं को मीणाओं के आगे झुक कर ही चलना पड़ता है। कोई भी सत्ताधीश राजनेता नहीं चाहेंगे कि सत्ता उनके हाथ से जाये!
प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया क्षेत्र की भी हालत ठीक नहीं है छोटे और मझौले अखबारों के विज्ञापन बंद कर वसुन्धरा राजे सरकार ने उन पर शिकंजा कसना प्रारंभ कर दिया है। राजनेताओं को समझ लेना चाहिये कि छोटे अखबारों के बूते पर ही देश का स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन मुकाम तक पहुंचा था। संघर्षशील छोटे अखबारों की अनदेखी कर सरकारें ज्यादा दिन तक टिक नहीं सकती है और न ही टिकी हैं।

 
AGRAGAMI SANDESH

AGRAGAMI SANDESH
AGEAGAMI SANDESH

मुख्‍य पृष्‍ठ | जयपुर संस्‍करण | राज्‍य समाचार | देश समाचार | विज्ञापन दर | सम्‍पर्क