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रामजादे-हरामजादे!

राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के अग्रिम संगठन भारतीय जनता पार्टीनीत नरेन्द्र मोदी सरकार की एक मंत्री ने दो शब्दों का प्रयोग किया, रामजादे-हरामजादे! भारत गणतंत्र में रामजादे कौन है और हरामजादे कौन हैं इसका खुलासा हम नहीं कर पायेंगे क्योंकि यह शब्दावली शिक्षितवर्ग के जबान पर आने के योग्य तो कदापि नहीं है।
हम कई दफा अपने कॉलम में लिख चुके हैं कि हिन्दू (इण्डस) समुदाय की उत्पत्ति मेसोपोटामिया में पल्लवित हुई हिब्रू संस्कृति में टूटन के कारण हुई और हिब्रू संस्कृति के टूटने से अस्तित्व में आये चार धर्मों, हिन्दू (इण्डस), क्रिश्चियन (ईसाई), यहूदी और इस्लाम के अनुयायी आपस में लड़ते रहते हैं। इनका भारत गणतंत्र से कोई लेनादेना नहीं है। इस देश का नाम युग पुरूष आदिनाथ तीर्थंकर ऋषभदेव के प्रपौत्र भरत के नाम से भारत पड़ा है। तब हिन्दुओं को इस देश में कोई नहीं जानता था।
अब रामजादे-हरामजादे कौन हैं? यह तो इन शब्दों का प्रयोग करने वाले ही बता सकते हैं? हम तो इतना ही कह सकते हैं कि भारत में हिन्दू, ईसाई, यहूदी और मुसलमान बाहरी समुदायों के रूप में आये हैं और अब भारत में इन समुदायों की संतानों बची है। यह देश वास्तव में जिन संस्कृति एवं वैदिक संस्कृति के समुदायों का है जिन्हें देश मं अल्पसंख्यक बना दिया गया है। दोनों ही संस्कृतियों के समुदाय देश की आजादी का एक प्रतिशत भी नहीं बचे हैं। नतीजन अपने हक की सच्ची बात भी मनवाने में समर्थ नहीं हैं।
नरेन्द्र मोदी सरकार यह स्पष्ट करे कि रामजारे-हरामजादे कौन हैं? क्योंकि इन शब्दों का प्रयोग नरेन्द्र मोदी की ही सरकार के एक मंत्री ने किया है। हालांकि नरेन्द्र मोदी ने ऐसे दुर्भावनापूर्ण शब्दों का प्रयोग करने वाले मंत्री सहित पार्टी के अन्य सांसदों को वाणी पर संयम रखने के लिये नसीहत दी है।
अब कोई यह तर्क देता है कि मंत्री पिछड़े वर्ग से है, दूसरा यह तर्क देता है कि मंत्री एसटीएससी वर्ग से है, खुद नरेन्द्र मोदी का कहना है कि वे महिला हैं और देहात से आई हैं तथा पहली बार मंत्री बनीं हैं इसलिये उनके कृत्य के लिये उन्हें माफ किया जाना चाहिये। ज्ञातव्य रहे कि अपनी कथनी के लिये संसद के दोनों सदनों में मंत्री ने खेद व्यक्त किया है। हम यहां पर यह खुलासा करना चाहेंगे कि अगर सवर्ण जाति के किसी व्यक्ति ने अनुसूचित जाति और जनजाति के लिये व्यक्ति से खुन्नस हो जाती है तो एससीएसटी एक्ट के तहत सवर्ण जाति के व्यक्ति को जेल के दर्शन करा दिये जाते हैं! ऐसी स्थिति में देश के आम अवाम को अभद्र शब्दों से सम्बन्धित करने वाली मंत्री को क्यों नहीं कानून के दायरे में लाया जा सकता है?
तीर्थंकर ऋषभदेव के प्रपौत्र भरत के नाम से अलंकृत इस भारत में समुदायों के बीच नफरत के बीज बोने वालों के लिये कोई स्थान नहीं है। उन्हें देशद्रोही करार देकर देश के बाहर भिजवा दिया जाना चाहिये! वैसे भी इस देश के संविधान में साफ-साफ लिखा है कि यह देश समाजवादी निर्पेक्ष गणतंत्र है। ऐसी स्थिति में नफरत की भाषा बोलने वालों के लिये इस देश में कोई स्थान नहीं होना चाहिये।
उम्मीद है कि सभी राजनेता एवं सभी धर्मों के मठाधीश अपनी वाणी पर संयम रखेंगे और हम खासकर उन राजनेताओं और धर्म के ठेकेदारों से आग्रह करेंगे कि वे अपनी वाणी पर संयम रखें तथा देश में साम्प्रदाकये सौहार्द कायम करने में अपना योगदान दें। इस देश में रामजादों-हरामजादों शब्दों का कोई स्थान नहीं है और देश की जनता चाहती है कि देशमें अमन चैन कायम रहे। इसी में अवाम का भला है।

 
AGRAGAMI SANDESH

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