जयपुर (अग्रगामी) राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे अपनी सिंगापुर यात्रा से वापिस जयपुर लौट आई हैं! उधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिव पायलेट और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस के एक प्रतिनिधी मंडल ने प्रदेश की कानून और व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर राज्यपाल कल्याण सिंह को एक ज्ञापन देकर अवगत कराया है। वहीं राज्य के वरिष्ठ आईएएस अफसरों का दिल्ली पलायन थम नहीं रहा है। आज स्थिति ये है कि राजस्थान की वसुन्धरा राजे सरकार के राज्य प्रशासन में अफसरों की प्रथम पंक्ति लगभग खाली हो चुकी है। वहीं लगभग साढे तीन सौ राजस्थान सेवा के अधिकारियों के तबादले कर दिये गये जिससे पूरे राज्य प्रशासनिक में व्यवस्था चरमरा गई है। उधर राज्य मंत्रीमण्डल में भी योग्य मंत्रियों की कमी महसूस की जा रही है।
पिछले 10 महिनों में राजस्थान की भाजपानीहित वसुन्धरा राजे सरकार जनहित में कोई फैसला लेने में असमर्थ रही है। संभागों में राजनैतिक पिकनिक मनाने के अलावा इस सरकार के खाते में कोई विशेष उपलब्धि नहीं है।
मंहगाई ने गरीब के बजट को लील लिया है। वहीं जमाखोरों, कालाबाजारियों, भूमाफियाओं, बिल्डर माफियाओं ने आम अवाम के घर के बजट को अपनी मुनाफाखोरी की भेंट चढ़ा दिया हैं और ऐसी स्थिति में राज्य में कोई सरकार या प्रांतीय प्रशासन नजर नहीं आ रहा है और बाबू राज के चलते आम अवाम की फाईलें एक टेबल से दूसरी टेबल, एक बाबू से दूसरे बाबू के पास भटक कर अटकी पड़ी है या फिर इस इंतजार में बाबू की अलमारी में बंद है कि कब इन पर नोटों का वजन डले और फिर...!
आगामी 1 नवम्बर से राज्य में स्थानीय निकाय के चुनावों हेतु आचार संहिता लागू होने का अंदेशा है ऐसी स्थिति में वसुन्धरा राजे सरकार यही रोना रोयेगी कि आचार संहिता लागू हो जाने के कारण हम कुछ भी काम करने में असमर्थ हैं। जबकि वसुन्धरा राजे को मुख्यमंत्री पद की शपथ लिये 10 महिने से ज्यादा गुजर चुके हैं। आखिर विधानसभा में पूर्ण बहुमत प्राप्त वसुन्धरा राजे सरकार को काम करने से कौन रोक रहा है?
अब वक्त आ गया है कि वामपंथी जनवादी दल अवाम को अपने साथ लेकर सड़कों पर उतरें और जनहित के मुद्दों पर कार्य करने के लिये सरकार को मजबूर करें, उनके लिये क्रियाशील होने के लिये यह बेहतरीन मौका है।
पिछले 10 महिनों में राजस्थान की भाजपानीहित वसुन्धरा राजे सरकार जनहित में कोई फैसला लेने में असमर्थ रही है। संभागों में राजनैतिक पिकनिक मनाने के अलावा इस सरकार के खाते में कोई विशेष उपलब्धि नहीं है।
मंहगाई ने गरीब के बजट को लील लिया है। वहीं जमाखोरों, कालाबाजारियों, भूमाफियाओं, बिल्डर माफियाओं ने आम अवाम के घर के बजट को अपनी मुनाफाखोरी की भेंट चढ़ा दिया हैं और ऐसी स्थिति में राज्य में कोई सरकार या प्रांतीय प्रशासन नजर नहीं आ रहा है और बाबू राज के चलते आम अवाम की फाईलें एक टेबल से दूसरी टेबल, एक बाबू से दूसरे बाबू के पास भटक कर अटकी पड़ी है या फिर इस इंतजार में बाबू की अलमारी में बंद है कि कब इन पर नोटों का वजन डले और फिर...!
आगामी 1 नवम्बर से राज्य में स्थानीय निकाय के चुनावों हेतु आचार संहिता लागू होने का अंदेशा है ऐसी स्थिति में वसुन्धरा राजे सरकार यही रोना रोयेगी कि आचार संहिता लागू हो जाने के कारण हम कुछ भी काम करने में असमर्थ हैं। जबकि वसुन्धरा राजे को मुख्यमंत्री पद की शपथ लिये 10 महिने से ज्यादा गुजर चुके हैं। आखिर विधानसभा में पूर्ण बहुमत प्राप्त वसुन्धरा राजे सरकार को काम करने से कौन रोक रहा है?
अब वक्त आ गया है कि वामपंथी जनवादी दल अवाम को अपने साथ लेकर सड़कों पर उतरें और जनहित के मुद्दों पर कार्य करने के लिये सरकार को मजबूर करें, उनके लिये क्रियाशील होने के लिये यह बेहतरीन मौका है।


