सेठों द्वारा समाज की संस्थाओं पर अपना कब्जा बनाये रखने के लिये समाज के नवयुवकों को रोजगार नहीं देने का सालों पुराना एक षडय़न्त्र उजागर हुआ है।
श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर के अध्यक्ष की अगुआई में उनकी भजन मंडली संघ कार्यालय में समाज के लोगों को रोजगार नहीं दे रही है। क्योंकि अगर कार्यालय में समाज के नवयुवक सेवारत होंगे तो उनके द्वारा की जा रही घपलेबाजी उजागर हो जायेगी। आज स्थिति यह है कि दो चार व्यक्तियों को छोड़कर अधिकांश पदों पर जैन नवयुवकों को नियुक्त करने हेतु महत्व नहीं दिया जा रहा है। नतीजन कर्मचारियों पर दबाव बना रहता है कि वे अध्यक्ष कुशलचंद सुराना और उनकी भजन मंडली के खिलाफ एक शब्द भी ना बोले चाहे वे कितना भी गलत काम करे। इस श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर में कर्मचारियों के कोई सेवा नियम नहीं हैं और जो भी अध्यक्ष चाहते हैं वैसे ही नियम लागू हो जाते हैं। हालांकि अध्यक्ष साधारण सभा से चुनिंदा प्रतिनिधी नहीं हैं। उन्हें भी उनकी पूंजीपति राठौड़ी के चलते कार्यकारिणी में सहवृत किया गया है और सहवृत होकर के वे अध्यक्ष बने हैं। इससे पहले भी वे श्रीमती जतन कंवर गोलेछा को अध्यक्ष पद से हटाकर सहवरण के जरिये कार्यकारिणी में आकर अध्यक्ष बने थे। अब इन अध्यक्ष महोदय से स्पष्ट पूछा जाये कि वे कौनसे कारण हैं जिनकी वजह से श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर के आधीन कार्यालयों में सृजित पदों पर जैन समुदाय के पढ़े लिखे नौजवानों को नियुक्त नहीं करना चाहते हैं?
एक पंजीकृत संस्था जोकि आयकर विभाग से छूट प्राप्त कर रही है। उसमें राज्य सरकार और केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित कानूनों का पालन करना अनिवार्य है। इसके बावजूद स्थापित कानूनों का पूरी तरह से उलंघन किया जा रहा है। श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर, संघ के अध्यक्ष और उनकी भजन मंडली की घर की दुकान नहीं है और अब समय आ गया है कि सहवरण के जरिये श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर पर कब्जा जमाये बैठे अध्यक्ष कुशलचंद सुराना और उनकी भजन मंडली स्थापित कानूनों की पालना करें और कानूनों की रूह में अपने कार्यकलापों को सुधारें या फिर अपने पदों से इस्तीफा दें।
अब यह आवश्यक हो गया है कि कानून की रूह में जैन समुदाय के युवकों को स्थापित कानूनों और प्रक्रियाओं के तहत नियुक्तियां श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर में दी जायें और अनुचित तरीके से दी जाने वाली नियुक्तियों के लिये जुम्मेदार संघ पदाधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्यवाही की जाये।
श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर के अध्यक्ष की अगुआई में उनकी भजन मंडली संघ कार्यालय में समाज के लोगों को रोजगार नहीं दे रही है। क्योंकि अगर कार्यालय में समाज के नवयुवक सेवारत होंगे तो उनके द्वारा की जा रही घपलेबाजी उजागर हो जायेगी। आज स्थिति यह है कि दो चार व्यक्तियों को छोड़कर अधिकांश पदों पर जैन नवयुवकों को नियुक्त करने हेतु महत्व नहीं दिया जा रहा है। नतीजन कर्मचारियों पर दबाव बना रहता है कि वे अध्यक्ष कुशलचंद सुराना और उनकी भजन मंडली के खिलाफ एक शब्द भी ना बोले चाहे वे कितना भी गलत काम करे। इस श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर में कर्मचारियों के कोई सेवा नियम नहीं हैं और जो भी अध्यक्ष चाहते हैं वैसे ही नियम लागू हो जाते हैं। हालांकि अध्यक्ष साधारण सभा से चुनिंदा प्रतिनिधी नहीं हैं। उन्हें भी उनकी पूंजीपति राठौड़ी के चलते कार्यकारिणी में सहवृत किया गया है और सहवृत होकर के वे अध्यक्ष बने हैं। इससे पहले भी वे श्रीमती जतन कंवर गोलेछा को अध्यक्ष पद से हटाकर सहवरण के जरिये कार्यकारिणी में आकर अध्यक्ष बने थे। अब इन अध्यक्ष महोदय से स्पष्ट पूछा जाये कि वे कौनसे कारण हैं जिनकी वजह से श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर के आधीन कार्यालयों में सृजित पदों पर जैन समुदाय के पढ़े लिखे नौजवानों को नियुक्त नहीं करना चाहते हैं?
एक पंजीकृत संस्था जोकि आयकर विभाग से छूट प्राप्त कर रही है। उसमें राज्य सरकार और केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित कानूनों का पालन करना अनिवार्य है। इसके बावजूद स्थापित कानूनों का पूरी तरह से उलंघन किया जा रहा है। श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर, संघ के अध्यक्ष और उनकी भजन मंडली की घर की दुकान नहीं है और अब समय आ गया है कि सहवरण के जरिये श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर पर कब्जा जमाये बैठे अध्यक्ष कुशलचंद सुराना और उनकी भजन मंडली स्थापित कानूनों की पालना करें और कानूनों की रूह में अपने कार्यकलापों को सुधारें या फिर अपने पदों से इस्तीफा दें।
अब यह आवश्यक हो गया है कि कानून की रूह में जैन समुदाय के युवकों को स्थापित कानूनों और प्रक्रियाओं के तहत नियुक्तियां श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर में दी जायें और अनुचित तरीके से दी जाने वाली नियुक्तियों के लिये जुम्मेदार संघ पदाधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्यवाही की जाये।


