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मौनबाडी में समाधि स्थलों को उजाडऩे वालों पर हो सख्त कार्यवाही!

जयपुर (अग्रगामी) स्थानीय मौनबाडी (मौहनबाडी) में समाधि स्थल को मैरिज लॉन में परिवर्तित कर दिया गया है और वहां से विस्थापित मूर्तियों और चरणों को एक साध्वी के समाधि स्थल की ताकों में रख दिया गया है या फिर उन चरणों पर लिखी इबादत को मिटा कर अन्यत्र उपयोग में ले लिया गया है। श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना और पूर्व में उपाध्यक्ष रहे इनके छोटे भाई विमलचंद सुराना की करतूतों का एक जीता जागता उदाहरण मौनबाडी में देखा जा सकता है। ये दोनों भाई मिलकर मौनबाडी को धार्मिक एवं सामाजिक स्थल के स्थान पर अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिये व्यवसायिक स्थल बनाना चाहते हैं।
हमने पहले जानकारी दी थी कि मौनबाडी समग्र पंच ओसवालान के स्वामित्व की जमीन है। इस जमीन से श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर का कोई लेनादेना नहीं है तथा श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) की आड़ लेकर सुराना बन्धु एक रजिस्टर्ड सोसायटी के जरिये इस जमीन को अपने स्वामित्व में लेना चाहते हैं। खरतरगच्छ समाज में यह भी सुगबुगाहट है कि देवद्रव्य को साधारण आय में शामिल कर उसका दुरूपयोग जयपुर नगर निगम व राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग के अफसरों एवं कारिंदों की जेब गरम करने के काम में लिया जा रहा है जोकि निन्दनीय है।
ज्ञातव्य रहे कि मौनबाडी के स्वामित्व की असलियत की जानकारी दिये बिना पंच ओसवालान की जमीन पर गैर कानूनी रूप से कब्जा जमाकर बैठे लोगों ने विवाह स्थल उपयोग हेतु लाइसेंस प्राप्त करने बाबत प्रार्थनापत्र के प्रपत्र क के क्रम-5 में मालिक श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर को बताया है, जबकि इसके मालिकाना हक के सम्बन्ध में कोई भी दस्तावेज पेश नहीं किये है। मात्र प्रपत्र-क में मालिक श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर को बताया है।
वास्तव में न तो उक्त जमीन को श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर ने खरीदी है और न  ही सरकार ने अलॉट की है। यह जमीन जयपुर रियासत के राजा सवाई प्रताप सिंह ने बैसाख बदी 2 संवत् 1836 को पंच ओसवालान को 25 बीघा जमीन बागवां बाग हेतु बक्क्षी थी। तब श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर का जन्म ही नहीं हुआ था और लोग जानते भी नहीं थे कि खरतरगच्छ नाम का संगठन है। अत: यह स्पष्ट है कि मौनबाडी, म्युनिसिपल भवन संख्या-75 और इससे सलग्र जयपुर रियासत के राजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा बक्क्षीश में दी गई जमीन खसरा नम्बर 535, 536 और 537 की जमीन के मालिक श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर नहीं है और न ही थे। ऐसी स्थिति में पंच ओसवालान की सम्पत्ति पर श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर के जरिये कुशलचंद सुराना और विमलचंद सुराना द्वारा धार्मिक और सामाजिक सम्पत्ति पर गैर कानूनी तरीके से कब्जे की कार्यवाही निन्दनीय है।
खरतरगच्छ जन चेतना मंच ने इस निन्दनीय और गैर कानूनी कार्यवाही पर तत्काल कार्यवाही की राज्य सरकार, पर्यावरण विभाग, नगरीय विकास विभाग, जयपुर नगर निगम से मांग की है। खरतरगच्छ जन चेतना मंच ने जयपुर नगर निगम और नगरीय विकास विभाग के कारिंदों द्वारा मौनबाडी में गैर कानूनी गतिविधियों पर कार्यवाही नहीं करने और लम्बित रखने को भी गम्भीर माना है।
मंच ने राज्य सरकार से स्पष्ट मांग की है कि मौनबाडी में समाधि स्थलों को उजाडऩे के मामले में उक्त जमीन पर प्रशासक बैठाया जाये साथ ही पूरे मामले में पीठासीन हाईकोर्ट के जजों के आधीन जांच करवाई जाकर राज्य सरकार के आधीन निकायों के उन दोषी अधिकारियों और कर्मचरियों पर नियमानुसार कार्यवाही करवाई जाये, जो लगातार गैर कानूनी कार्यों को प्रोत्साहन दे रहे हैं और मौनबाडी में गैर कानूनी तरीके से विवाह स्थल और व्यवसायिक गतिविधियों को संचालित करवा रहे है।
अगले अंकों में हम विस्तार से जानकारी साया करेंगे।

 
AGRAGAMI SANDESH

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