केंद्र सरकार द्वारा जैन समुदाय को अल्पसंख्यक दर्जा देने के बाद इस समुदाय द्वारा अल्पसंख्यकता प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु सक्रियता बढ़ती जा रही है। बाड़मेर जिले में जैन समाज के दस हजार से ज्यादा अल्पसंख्यकता प्रमाण पत्र बनवाये जा चुके हैं। नाकोड़ा तीर्थ के पूर्व अध्यक्ष तथा अखिल भारतीय श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ महासंघ के पूर्व उपाध्यक्ष नैनमल भंसाली ने यह जानकारी अग्रगामी संदेश के सम्पादक हीराचंद जैन को टेलीफोन पर दी। विभिन्न जिलों में जैन समुदाय के सदस्यों हेतु अल्पसंख्यकता प्रमाण पत्र बनाने की जो मुहिम चल रही है उसमें बाड़मेर के जैन संगठन सबसे आगे हैं।
राजस्थान की राजधानी जयपुर की बात करें तो यहां के सबसे बड़े श्वेताम्बर समाज के संगठन श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगगच्छ संघ (रजि.) जयपुर सहित पूंजीपतियों और सेठों की छत्रछाया में चलने वाले जैन संगठनों में अभी तक यह सोच भी नहीं पनप पाया है कि अपने समाज बंधुओं के अल्पसंख्यकता प्रमाण पत्र बनवाने में रूचि ली जाये या नहीं!
ज्ञातव्य रहे कि लगभग ढ़ाई दशक की लम्बी लड़ाई के बाद केंद्र की कांग्रेसनीत डॉ.मनमोहन सिंह सरकार ने जनवरी, 2014 में जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिलाने हेतु नोटिफिकेशन जारी किया जिसका विरोध राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के भैयाजी जोशी व मुरलीमनोहर जोशी सरीखे आला नेताओं ने बेतुका विरोध किया था। इसमें भी जैन समुदाय की जीत हुई और अल्पसंख्यकता प्रमाण पत्र बनवाने हेतु आदेश जारी हुये लेकिन राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) सहित श्वेताम्बर-दिगम्बर एकता की बांग लगाने वाले नेताओं के दिमाग में अभी तक यह नहीं ठुंसा है कि प्रमाण पत्र मिलने से समाज बंधुओं को सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के लिये संचालित शासकीय योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
हमारा जैन समुदाय के सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों पर कब्जा जमाये बैठे सेठियों और उनके पिछलग्गुओं से आग्रह है कि वे जैन समुदाय को अपनी आर्थिक उपलब्धियों का हथियार न बनायें और समाजहित में समाज बंधुओं के हित में कार्य करें ताकि हर समाज बन्धु को सामाजिक संगठनों से लाभ मिल सके।
हम विस्तार से इस विषय में आगे और लिखेंगे। आशीष कुमार जैन
राजस्थान की राजधानी जयपुर की बात करें तो यहां के सबसे बड़े श्वेताम्बर समाज के संगठन श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगगच्छ संघ (रजि.) जयपुर सहित पूंजीपतियों और सेठों की छत्रछाया में चलने वाले जैन संगठनों में अभी तक यह सोच भी नहीं पनप पाया है कि अपने समाज बंधुओं के अल्पसंख्यकता प्रमाण पत्र बनवाने में रूचि ली जाये या नहीं!
ज्ञातव्य रहे कि लगभग ढ़ाई दशक की लम्बी लड़ाई के बाद केंद्र की कांग्रेसनीत डॉ.मनमोहन सिंह सरकार ने जनवरी, 2014 में जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिलाने हेतु नोटिफिकेशन जारी किया जिसका विरोध राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के भैयाजी जोशी व मुरलीमनोहर जोशी सरीखे आला नेताओं ने बेतुका विरोध किया था। इसमें भी जैन समुदाय की जीत हुई और अल्पसंख्यकता प्रमाण पत्र बनवाने हेतु आदेश जारी हुये लेकिन राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) सहित श्वेताम्बर-दिगम्बर एकता की बांग लगाने वाले नेताओं के दिमाग में अभी तक यह नहीं ठुंसा है कि प्रमाण पत्र मिलने से समाज बंधुओं को सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के लिये संचालित शासकीय योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
हमारा जैन समुदाय के सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों पर कब्जा जमाये बैठे सेठियों और उनके पिछलग्गुओं से आग्रह है कि वे जैन समुदाय को अपनी आर्थिक उपलब्धियों का हथियार न बनायें और समाजहित में समाज बंधुओं के हित में कार्य करें ताकि हर समाज बन्धु को सामाजिक संगठनों से लाभ मिल सके।
हम विस्तार से इस विषय में आगे और लिखेंगे। आशीष कुमार जैन


