जयपुर (अग्रगामी) देश में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार को कामकाज संभाले हुये लगभग 100 दिन पूरे होने को आये। भारतीय जनता पार्टी ने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लड़े लोकसभा चुनाव के दौरान मंहगाई, कालाबाजारी, मुनाफाखारी, जमाखोरी, भ्रष्टाचार, भू-माफियाओं, बेरोजगारी, महिलाओं-बच्चों, आदिवासियों, पिछड़े वर्ग पर हो रहे अत्याचारों से निजात दिलाने के लिये भारतीय जनता पार्टी को वोट देने का आग्रह किया था। इन्हीं मुद्दों को लेकर भारतीय जनता पार्टी लोकसभा में चुनाव जीती लेकिन लोकसभा चुनाव को जीतने के बाद नरेन्द्र मोदी सहित भाजपा के सभी नेता इन मुद्दों को भूल गये प्रतीत होते हैं। क्योंकि वे इन मुद्दों पर कार्यवाही न कर अन्य मुद्दों पर चकल्लस करने में जुट गये हैं। प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा हो या फिर देश के अंदर ही राज्यों में यात्रायें हों उन यात्राओं के बारे में असलियत को छुपाकर प्रचारात्मक ढिढ़ोरा पीटने से जनता का कोई भला होने वाला नहीं है। जनता ने भारतीय जनता पार्टी को वोट इसलिये दिये थे कि वह आग अवाम के दुखदर्दों को दूर करने में गतिशील होगी लेकिन भाजपा के नरेन्द्र मोदी सरकार के सौ दिन पूरे होने के बाद भी यह सरकार जनहित के मुद्दों से किनारा करती नजर आ रही है। नतीजन आम अवाम में मोदी सरकार के खिलाफ आक्रोश पनपता जा रहा है।
राजस्थान को ही लें तो राज्य की भारतीय जनता पार्टी निहित वसुन्धरा राजे सरकार ने मंहगाई, कालाबाजारी, जमाखोरी, मुनाफाखोरी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महिलाओं पर अत्याचार के मुद्दों पर धेलेभर भी काम नहीं किया है। वसुन्धरा राजे सरकार पिछले छह महिनों में भरतपुर, बीकानेर और उदयपुर सम्भागों में पिकनिक मनाती फिरी और आज भी हालातऐसे हैं कि इस सरकार को जनता की रोजमर्रा की दुख तकलीफों से कोई वास्ता नजर नहीं आ रहा है। नतीजन आम अवाम में वसुन्धरा राजे सरकार के खिलाफ भी आक्रोश चरम पर पहुंचता नजर आ रहा है। खुद राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के वरिष्ठ नेता भी मानने लगे हैं कि राज्य में वसुन्धरा राजे सरकार अपने दायित्व निर्वहन से भटक गई है और जनहित के कामों को नजर अन्दाज कर रही है। ऐसी स्थिति में अवाम में भाजपा, आरएसएस और वसुन्धरा राजे सरकार के खिलाफ आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। अब इन्हें तो जनता के आक्रोश से उपर वाला ही बचा सकता है!
राजस्थान को ही लें तो राज्य की भारतीय जनता पार्टी निहित वसुन्धरा राजे सरकार ने मंहगाई, कालाबाजारी, जमाखोरी, मुनाफाखोरी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महिलाओं पर अत्याचार के मुद्दों पर धेलेभर भी काम नहीं किया है। वसुन्धरा राजे सरकार पिछले छह महिनों में भरतपुर, बीकानेर और उदयपुर सम्भागों में पिकनिक मनाती फिरी और आज भी हालातऐसे हैं कि इस सरकार को जनता की रोजमर्रा की दुख तकलीफों से कोई वास्ता नजर नहीं आ रहा है। नतीजन आम अवाम में वसुन्धरा राजे सरकार के खिलाफ भी आक्रोश चरम पर पहुंचता नजर आ रहा है। खुद राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के वरिष्ठ नेता भी मानने लगे हैं कि राज्य में वसुन्धरा राजे सरकार अपने दायित्व निर्वहन से भटक गई है और जनहित के कामों को नजर अन्दाज कर रही है। ऐसी स्थिति में अवाम में भाजपा, आरएसएस और वसुन्धरा राजे सरकार के खिलाफ आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। अब इन्हें तो जनता के आक्रोश से उपर वाला ही बचा सकता है!


