अच्छे दिन आयेंगे का नारा देकर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव जीती भारतीय जनता पार्टी अपनी केंद्रीय सरकार के सौ दिन के कार्यकाल के दौरान ही धराशाही हो गई है! देश की जनता ने भारतीय जनता पार्टी की देशभर में हुये उपचुनावों में ऐसी पिटाई की कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के आकाओं के भी होंश उड़ गये। उपचुनाव में जीतने के लिये भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने धार्मिक उन्माद फैलाने का प्रयास भी किया लेकिन उन्मादियों की एक भी नहीं चली। उत्तरप्रदेश में तो संघ निष्ट भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह और योगी आदित्यनाथ तथा साक्षी महाराज ने धार्मिक उन्माद को बढ़ावा देकर विधानसभा की ग्यारह सीटें जीतने का प्रयास किया लेकिन मायावती की समझदारी के चलते भाजपाइयों की एक भी नहीं चली और आठ सीटों पर समाजवादी पार्टी को जीत मिली।
देश की जनता समझ गई है कि भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस का ही वैकल्पिक स्वरूप है और दोनों ही पार्टियों के नेता सत्ता परस्त हैं। तीसरा नेतृत्व राजनेताओं की सत्तापरक महत्वकांक्षाओं के चलते नहीं चल पा रही है। लाल झंडे वाले भी लोकसभा चुनाव में हुई गहरी पिटाई के बाद बिलों में घुस गये हैं। इन दलों के बुजूर्ग नेता जो कि लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी की हार के लिये जुम्मेदार हैं वे पार्टी ने अपने पदों को छोडऩा नहीं चाहते हैं और नहीं नये नेतृत्व को पनपने देना चाहते हैं। नतीजन वामपंथी जनवादी पार्टियां बिखराव, टूटन और पतन के रास्ते पर आ खड़ी हुई है।
मुलायम सिंह, मायावती सहित कई व्यक्तिवादी पार्टियों के नेता देश का प्रधानमंत्री बनने की कतार में खड़े हैं। लेकिन न तो इनके पास सांसदों की संख्या है और न ही जनता की दुख तकलीफों को दूर करने का वीजन है। नतीजन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के एक अग्रिम संगठन भारतीय जनता पार्टी ने आम अवाम को भरमा कर सत्ता हासिल करली।
नरेन्द्र मोदी सरकार की एक मंत्री यह कहती फिर रही है कि मोरपंखों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाये। अपनी इस करतूत की आड़ में वो चहती है कि जैन समुदाय पर अनुचित दबाव बढ़ाया जाये ताकि जैन समुदाय हिन्दुओं का गुलाम बन जाये। मोरपंख धार्मिक कार्यों में ही उपयोग में लिये जाते हैं और राष्ट्रीय पक्षी मोर द्वारा प्राकृतिक रूप से त्यागे हुये मोरपंखों को आदिवासियों द्वारा इक_ा कर धार्मिक संगठनों और व्यक्तियों को उपलब्ध कराये जाते हैं। ये केबीनेट मंत्री मोरपंखों की आड़ में धार्मिक विद्वेश फैलाने में जुटी है।
अब अवाम को लगता है कि नरेन्द्र मोदी अपने मंत्रीमण्डल पर नियन्त्रण नहीं दख पा रहे हैं। यही कारण है कि पिछले सौ दिन में जनहित में एक भी कार्य नहीं करने वाली मेनका गांधी मोरपंखों की आड़ में धार्मिक विद्वेश फैलाने की राह पर चल पड़ी है।
जनता ने मंहगाई, कालाबाजारी, जमाखोरी, मुनाफाखोरी, भ्रष्टाचार, भू-माफिया, बिल्डर माफिया पर नियन्त्रण तथा रोजगार उपलब्ध कराने के लिये नरेन्द्र मोदी सरकार को सत्ता में लाने की जुरर्त की थी। लेकिन नरेन्द्र मोदी और उनके मंत्रीमण्डल के सहयोगी अपने किये गये वादों से विमुख होकर देश में धार्मिक उन्माद फैलाने की राह पर चल पड़े हैं। अब तो उनका रब ही मालिक है।
देश की जनता समझ गई है कि भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस का ही वैकल्पिक स्वरूप है और दोनों ही पार्टियों के नेता सत्ता परस्त हैं। तीसरा नेतृत्व राजनेताओं की सत्तापरक महत्वकांक्षाओं के चलते नहीं चल पा रही है। लाल झंडे वाले भी लोकसभा चुनाव में हुई गहरी पिटाई के बाद बिलों में घुस गये हैं। इन दलों के बुजूर्ग नेता जो कि लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी की हार के लिये जुम्मेदार हैं वे पार्टी ने अपने पदों को छोडऩा नहीं चाहते हैं और नहीं नये नेतृत्व को पनपने देना चाहते हैं। नतीजन वामपंथी जनवादी पार्टियां बिखराव, टूटन और पतन के रास्ते पर आ खड़ी हुई है।
मुलायम सिंह, मायावती सहित कई व्यक्तिवादी पार्टियों के नेता देश का प्रधानमंत्री बनने की कतार में खड़े हैं। लेकिन न तो इनके पास सांसदों की संख्या है और न ही जनता की दुख तकलीफों को दूर करने का वीजन है। नतीजन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के एक अग्रिम संगठन भारतीय जनता पार्टी ने आम अवाम को भरमा कर सत्ता हासिल करली।
नरेन्द्र मोदी सरकार की एक मंत्री यह कहती फिर रही है कि मोरपंखों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाये। अपनी इस करतूत की आड़ में वो चहती है कि जैन समुदाय पर अनुचित दबाव बढ़ाया जाये ताकि जैन समुदाय हिन्दुओं का गुलाम बन जाये। मोरपंख धार्मिक कार्यों में ही उपयोग में लिये जाते हैं और राष्ट्रीय पक्षी मोर द्वारा प्राकृतिक रूप से त्यागे हुये मोरपंखों को आदिवासियों द्वारा इक_ा कर धार्मिक संगठनों और व्यक्तियों को उपलब्ध कराये जाते हैं। ये केबीनेट मंत्री मोरपंखों की आड़ में धार्मिक विद्वेश फैलाने में जुटी है।
अब अवाम को लगता है कि नरेन्द्र मोदी अपने मंत्रीमण्डल पर नियन्त्रण नहीं दख पा रहे हैं। यही कारण है कि पिछले सौ दिन में जनहित में एक भी कार्य नहीं करने वाली मेनका गांधी मोरपंखों की आड़ में धार्मिक विद्वेश फैलाने की राह पर चल पड़ी है।
जनता ने मंहगाई, कालाबाजारी, जमाखोरी, मुनाफाखोरी, भ्रष्टाचार, भू-माफिया, बिल्डर माफिया पर नियन्त्रण तथा रोजगार उपलब्ध कराने के लिये नरेन्द्र मोदी सरकार को सत्ता में लाने की जुरर्त की थी। लेकिन नरेन्द्र मोदी और उनके मंत्रीमण्डल के सहयोगी अपने किये गये वादों से विमुख होकर देश में धार्मिक उन्माद फैलाने की राह पर चल पड़े हैं। अब तो उनका रब ही मालिक है।


