जयपुर (अग्रगामी) जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व व हवामहल जोन पश्चिम के आधीन इलाकों में जयपुर नगर निगम के अफसरों, कारिंदों और पार्षदों की मिलीभगत से अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों का निर्माण परवान पर है। लेकिन हवामहल जोन पूर्व और हवामहल जोन पश्चिम के आयुक्तों और कारिंदों पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार अफसरों, कारिंदों और पार्षदों का यह कहना बताया जाता है कि अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों और निर्माणों के लिये जो नजराना दिया जा रहा है उसमें से मोटी राशि विधानसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवारों को देते रहे हैं और अब स्थानीय निकाय चुनावों हेतु पार्टी फण्ड में दे रहे हैं।
इनके कथित कथन को अगर गम्भीरता से लिया जाये तो साफ हो जाता है कि जयपुर नगर निगम में भ्रष्टाचार के पीछे ज्यादातर भाजपाई नेताओं का ही हाथ है और भाजपाई नेताओं, पार्षदों, जयपुर नगर निगम के अफसरों और कर्मचारियों के गठजोड़ के चलते चार दिवारी क्षेत्र में धार्मिक एवं आवासीय क्षेत्र को व्यावसायिक स्थलों के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है।
अवैध निर्माणों के मामले में दबी आवाज में सूत्रों का कहना है कि जोन आयुक्तों और अधिकारियों तथा कर्मचारियों की मिलीभगत की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार को भी है लेकिन सरकार में बैठे अपनी पार्टी के नेताओं को पार्षद, विधायक और सांसद को दिये गये चुनावी चंदे और अन्य मदद का हवाला देकर कार्यवाही करने से रोक रहे हैं। वहीं अवैध निर्माणकर्ताओं से इसके बदले आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में मोटी रकम वसूलने के बारे में सूत्र इशारा कर रहे हैं।
अग्रगामी संदेश को सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा लिखित शिकायत के बाद भी म्युनिसिपल भवन संख्या 3834-35, मोतीसिंह भौमियों का रास्ता, जयपुर में निर्माण कार्य जोरशोर से जारी है। पूर्व में भी इस की शिकायत की गई तो नोटिस की आड़ में जोन के कारिंदों ने व्यवसायिक निर्माण करवा दिया और बार-बार निरीक्षण की आड़ में नजराना वसूलते रहे। यह समाचार लिखने तक उक्त स्थान पर निर्माण कार्य जारी है। बताया जाता है कि नोटिस देने के बाद मोटा नजराना मिल गया और निर्माण कार्य की गति बढ़ गई। अब अधिकारियों और कारिंदों को इंतजार है कब आचार संहिता लगे और अवैध निर्माण पूरा बनवा दिया जाये।
ज्ञातव्य रहे कि अग्रगामी संदेश लगातार सरकार और नगर निगम के अधिकारियों की जानकारी में स्थानीय पार्षद की शह पर हो रहे अवैध निर्माणों को उजागर कर बता रहा है और सरकार तथा अधिकारी मामले को दबाते जा रहे हैं। ताकि नजराने की रकम की किश्तें लगातार मिलती रहे।
मौहनबाड़ी में अवैध निर्माण के मामले में भी जयपुर नगर निगम के अधिकारी वर्ष 2009 से कार्यवाही करने से बचते रहे हैं और आज यह अवैध निर्माण जयपुर नगर निगम और सरकार को मुंह चिड़ा रहा है। क्योंकि भाजपा के पदाधिकारियों को सम्मानित करने वालों और पार्टी की मीटिंगों को का आयोजन कर नेताओं की पेटपूजा करने वालों के अवैध निर्माण पर कार्यवाही करने से रोकने में इनकी भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार अफसरों, कारिंदों और पार्षदों का यह कहना बताया जाता है कि अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों और निर्माणों के लिये जो नजराना दिया जा रहा है उसमें से मोटी राशि विधानसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवारों को देते रहे हैं और अब स्थानीय निकाय चुनावों हेतु पार्टी फण्ड में दे रहे हैं।
इनके कथित कथन को अगर गम्भीरता से लिया जाये तो साफ हो जाता है कि जयपुर नगर निगम में भ्रष्टाचार के पीछे ज्यादातर भाजपाई नेताओं का ही हाथ है और भाजपाई नेताओं, पार्षदों, जयपुर नगर निगम के अफसरों और कर्मचारियों के गठजोड़ के चलते चार दिवारी क्षेत्र में धार्मिक एवं आवासीय क्षेत्र को व्यावसायिक स्थलों के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है।
अवैध निर्माणों के मामले में दबी आवाज में सूत्रों का कहना है कि जोन आयुक्तों और अधिकारियों तथा कर्मचारियों की मिलीभगत की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार को भी है लेकिन सरकार में बैठे अपनी पार्टी के नेताओं को पार्षद, विधायक और सांसद को दिये गये चुनावी चंदे और अन्य मदद का हवाला देकर कार्यवाही करने से रोक रहे हैं। वहीं अवैध निर्माणकर्ताओं से इसके बदले आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में मोटी रकम वसूलने के बारे में सूत्र इशारा कर रहे हैं।
अग्रगामी संदेश को सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा लिखित शिकायत के बाद भी म्युनिसिपल भवन संख्या 3834-35, मोतीसिंह भौमियों का रास्ता, जयपुर में निर्माण कार्य जोरशोर से जारी है। पूर्व में भी इस की शिकायत की गई तो नोटिस की आड़ में जोन के कारिंदों ने व्यवसायिक निर्माण करवा दिया और बार-बार निरीक्षण की आड़ में नजराना वसूलते रहे। यह समाचार लिखने तक उक्त स्थान पर निर्माण कार्य जारी है। बताया जाता है कि नोटिस देने के बाद मोटा नजराना मिल गया और निर्माण कार्य की गति बढ़ गई। अब अधिकारियों और कारिंदों को इंतजार है कब आचार संहिता लगे और अवैध निर्माण पूरा बनवा दिया जाये।
ज्ञातव्य रहे कि अग्रगामी संदेश लगातार सरकार और नगर निगम के अधिकारियों की जानकारी में स्थानीय पार्षद की शह पर हो रहे अवैध निर्माणों को उजागर कर बता रहा है और सरकार तथा अधिकारी मामले को दबाते जा रहे हैं। ताकि नजराने की रकम की किश्तें लगातार मिलती रहे।
मौहनबाड़ी में अवैध निर्माण के मामले में भी जयपुर नगर निगम के अधिकारी वर्ष 2009 से कार्यवाही करने से बचते रहे हैं और आज यह अवैध निर्माण जयपुर नगर निगम और सरकार को मुंह चिड़ा रहा है। क्योंकि भाजपा के पदाधिकारियों को सम्मानित करने वालों और पार्टी की मीटिंगों को का आयोजन कर नेताओं की पेटपूजा करने वालों के अवैध निर्माण पर कार्यवाही करने से रोकने में इनकी भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


