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भाजपाइयों अच्छे दिन कब आयेंगे?

देश में विधानसभा के उपचुनाव का दूसरा दौर शुरू हो गया है। उत्तरप्रदेश, गुजरात, राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों में विधानसभाओं के उपचुनाव इस हफ्ते के अंत तक सम्पन्न हो जायेंगे और उम्मीद है कि इस सप्तान्त तक इन उपचुनावों के नतीजे भी आ जायेंगे। इन उपचुनावों से एक बात साफ हो गई है कि लोकसभा में जो बढ़त भारतीय जनता पार्टी को मिली थी वैसी बढ़त मिलने वाली नहीं है। भारतीय जनता पार्टी का लोकसभा में दिया गया यह नारा कि अच्छे दिन आने वाले हैं लगभग फ्लाप शो बनता नजर आ रहा है। अगर उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी अपना प्रदर्शन लोकसभा चुनावों जैसा नहीं कर पाती है तो उसे इसका खामियाजा आने वाले चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में भुगतना पड़ सकता है। महाराष्ट्र, हरियाणा, जम्मु और काश्मीर और झारखण्ड में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का कैडर भी उतना मजबूत नहीं है जितना कि राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश आदि जिलों में है। महाराष्ट्र, हरियाणा, और जम्मु-काश्मीर में कांग्रेस की सरकारें है वहीं झारखण्ड में शिब्बु सोरेन कांड़ का डंका बजता है। ऐसी स्थिति में भाजपा अपना साथी पार्टी शिवसेना के साथ मिलकर सत्तारूढ़ होने की कोशिश तो करेगी।  वहीं झारखण्ड और हरियाणा में भी भाजपा का मुकाबला कांग्रेस और शिब्बु सोरेन की पार्टी से होना निश्चित है।
विधानसभाओं के उपचुनावों तथा उसके बाद होने वाले चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में सत्ता का ऊंट किस करवट बैठेगा नहीं जानता है लेकिन एक बात तो साफ है कि भाजपा का अच्छे दिन आयेंगे का नारा एक शगुफे से ज्यादा कारगर साबित नहीं हुआ। जनता धीरे-धीरे असलियत समझने लगी है और अपने किये पर पछताने की स्थिति में आ गई है। मोदी सरकार चाहे तो मंहगाई,  मुनाफाखोरी, कालाबाजारी, जमाखोरी, भू-माफियाओं, अवैध निर्माणकर्ताओं, भ्रष्टाचारियों के साथ बच्चों, आदिवासियों, महिलाओं पर अत्याचार से निजात दिलाकर जनता को अपने पक्ष में कर सकती है और उसे करना भी चाहिये।

 
AGRAGAMI SANDESH

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