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वसुन्धरा राजे शासन में जमाखोरों और भ्रष्ट अफसरशाही के आ गये अच्छे दिन!

नरेन्द्र मोदी का चुनावी आमसभाओं में आरोप रहा है कि मंहगाई के मुद्दे पर उनकी रिपोर्ट को डॉ.मनमोहन सिंह सरकार ने ठण्डे बस्ते में डाल दिया था। लगभग तीन साल पहिले नरेन्द्र मोदी ने मंहगाई रोकने के लिये सुझाया था कि जमाखोरी गैर जमानती अपराध माना जाये! स्टोरेज इन्फ्रास्ट्रेक्चर बढ़ाया जाये! रेग्यूलेटेड मार्केट (कृषि उपज मण्डियां) बिचौलिया मुक्त हों! किसानों को कर्ज देने का दायरा बढ़ाया जाये। कीमतों को स्थिर रखने के उपाय हों और वायदा कारोबार पर तत्काल रोक लगाई जाये!
मंहगाई पर अंकुश लगाने के लिये जब उपरोक्त सुझाव नरेन्द्र मोदी ने दिये थे, तब केंद्र में यूपीएनीत कांग्रेस की अगुआई वाली डॉ.मनमोहन सिंह की सरकार का राज था। नरेन्द्र मोदी का कहना वाजिब हो सकता है कि डॉ.मनमोहन सिंह की सरकार ने उनके सुझावों को कोल्ड स्टोरेज में डाल दिया।
लेकिन सुझाव देने वाले नरेन्द्र मोदी आज देश के प्रधानमंत्री हैं। वे अपने उपरोक्त सुझावों को अब अपने राज में तो लागू कर ही सकते हैं! उनके पास संसद में पूर्ण बहुमत भी है और विपक्ष में बैठा एक भी दल मंहगाई पर अंकुश लगाने के उनके कदमों का विरोध नहीं करेगा। वैसे भी संख्याबल के हिसाब से बिखरा हुआ विपक्ष में  विरोध करने की स्थिति में नहीं है।
राजस्थान को ही लें! भारतीय जनता पार्टीनीत वसुन्धरा राजे सरकार राज्य में दोतिहाई बहुमत के साथ सत्तासीन है। लगभग छह माह होने को आये, लेकिन वसुन्धरा राजे सरकार ने एक भी जमाखोर, कालाबाजारिये, मुनाफाखोर के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की!
राजस्थान में शर्मनाक स्थिति यह रही कि राष्ट्रीय स्तर पर आवश्यक वस्तु अधिनियम कानून मौजूद होने के बावजूद चुनावों के बाद विधानसभा की पहली बैठक में ही जमाखोरों-कालाबाजारियों के खिलाफ कार्यवाही हेतु एक ओर कानून पास करवाया। राज्य में जमाखोरों पर कार्यवाही करने के लिये दो-दो कानून होने के बावजूद वसुन्धरा राजे ने अपने पांच माह से अधिक के शासनकाल में एक भी जमाखोर, कालाबाजरिये, मुनाफाखोर के खिलाफ आजतक कोई कार्यवाही नहीं की! मंहगाई से पीडि़त अवाम में आज बस एक ही चर्चा है कि भारतीय जनता पार्टी के लिये चुनावी चंदा वसूलने के चक्कर में वसुन्धरा राजे सरकार अपना राजधर्म भूल गई और इस ही के चलते जमाखोरों, कालाबाजारियों और मुनाफाखोरों पर कार्यवाही नहीं हो रही है। अवाम में तो यहां तक चर्चा है कि जमाखोरों, कालाबाजारियों और मुनाफाखोरों के खिलाफ कार्यवाही के लिये वसुन्धरा राजे सरकार पर कोई दबाव बना तो दिखावे की कार्यवाही कर लीपापोती की जायेगी ताकि मामला रफादफा हो जाये।
उधर जमाखोर, कालाबाजारिये और मुनाफाखोर उनके खिलाफ सरकारी कार्यवाही नहीं होने के मामले में लगभग पूरी तरह आश्वस्त हैं और प्लानिंग के साथ उपभोक्ता वस्तुओं की जमाखोरी कर मार्केट में पहिले उनकी कमी पैदा करते हैं और फिर ऊंचे दामों में बेच कर भारी मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि वसुन्धरा राजे प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं हो! प्रशासन जमाखोरों की हर हरकत से वाकिफ है और राज्य सरकार स्तर से लापरवाही के चलते मिली छूट के कारण अफसरों की फौज अपनी जेबें भरने के चक्कर में कालाबाजारियों, जमाखोरों और मुनाफाखोरों पर कार्यवाही नहीं कर उन्हें अवाम को लूटने की पूरी छूट दे रहे हैं।
अवाम के अच्छे दिन आयेंगे या नहीं, हां कालाबाजारियों, मुनाफाखोरों, जमाखोरों, भ्रष्ट अफसरों और नौकरशाहों के अच्छे दिन तो आ ही गये हैं।

 
AGRAGAMI SANDESH

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