जयपुर (अग्रगामी) अपने आप को धर्म का ठेकेदार आरोपित करने वाले और श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ पर कुंडली जमाये बैठे सेठियों ने अपनी हवस पूरी करने और अपनी मर्जी माफिक सीमेंट कंकरीट का जंगल कायम करने और वहां धर्म और समाज की आड़ में कॉमर्शियल गतिविधियां चलाने के लिये जयपुर की मौनबाडी के लगभग तीन चौथाई से ज्यादा पेड़ों को शहीद कर दिया है। वहीं काफी तादाद में समाज के गुरू भगवन्तों की समाधियों का पुर्ननिर्माण नहीं कर उन्हें असाधना के फेरों में डाल कर अपमानित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
जैसा कि हमने पिछले अंकों में साया किया था कि तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की चरण पादुका और पूज्य भट्टारक जिन कुशल सूरि की चरण पादुका (चरणों) की सेवा पूजा के लिये पुष्प-पत्रम उपलब्ध करने के लिये जयपुर रियासत के महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने बागवां बाग खर्चे हेतु मिति बैसाख सुदी 5 विक्रम सम्वत् 1836 को तत्कालीन पंच ओसवालान को खसना नम्बर 535, 536, 537 की 25 बीघा जमीन बक्क्षी थी। इस जमीन पर बगीचा लगा कर उस में पैदा होने वाले पुष्प-पत्रम् इन चरण पादुकाओं (चरणों) पर चढ़ाये जायेंगे और उससे मिलने वाले पुण्य में पंच ओसवालान के साथ-साथ जयपुर रियासत के अवाम और शासकों को भी इसका पूण्य मिलेगा।
अब शर्मनाक स्थिति देखिये, इस जमीन का काफी हिस्सा खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारियों की लापरवाही और गैर जुम्मेदारान क्रियाकलापों के चलते राजसात (भूमि अधिग्रहण) को गया, वहीं जमीन के काफी हिस्से का अतापता खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारियों को है ही नहीं! आज स्थिति यह है कि खरतरगच्छ संघ अध्यक्ष कुशलचंद सुराना सहित संघ में बैठे उनके सहयोगी पदाधिकारियों को इस पच्चीस बीघा जमीन की पूरी हकीकत के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी है ही नहीं! उन्हें यह भी पता नहीं है कि हकीकत में खरतरगच्छ संघ के कब्जे में वास्तव में कितनी जमीन है, कितनी जमीन पर अतिक्रमण है और कितनी जमीन लावारिस पड़ी है और लोग गैर कानूनी कब्जा कर रहे हैं?
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन का श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना और उनके संघ में सहयोगी वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित कार्यकारिणी के अन्य पदाधिकारियों से सीधा सवाल है कि अवैध रूप से उनके कब्जे की 225 साल (सवा दो सौ साल) पुरानी पंच ओसवालान की सेवा पूजा के आधीन रही मौनबाडी के इस बगीचे (बाडी) के लगभग साढ़े तीन सौ से ज्यादा पेड़ और उनके साथ हजारों पौधे आखीर कहां है? क्यों मौनबाडी की खसरा नम्बर 535, 536, 537 की जमीन पर एक भी पुराना पेड़ या विलुप्त हो रही प्रजाति का कोई पौधा नजर नहीं आ रहा है। वहां सिर्फ गैर कानूनी तरीके से बनाया गया राजमल सुराना स्मृति भवन के नाम और उसकी आड़ में बनाया गया होटल और गैर कानूनी अवैध रूप से संचालित मैरेज गार्डन (इसमें भी कोई गार्डन नहीं है) ही क्यों नजर आ रहा है?
खरतरगच्छ जन चेतना मंच पहिले भी खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना एवं उनकी भजन मण्डली को चेता चुका है कि वे धार्मिक स्थल का, अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिये व्यवसायिक दुरूपयोग तत्काल बंद करें और सम्पूर्ण मौनबाडी का सिर्फ समाज के धार्मिक और सामाजिक क्रियाकलापों में ही उपयोग करें।
हम आगे इस मुद्दे के साथ-साथ मौनबाडी से विलोपित किये गये 52 जिनालयों और पाश्र्वनाथ जयन्ति पर संचालित किये जाने वाले जिनरथ की दुर्दशा के बारे में भी विस्तार से जानकारियां साया करेंगे और खरतरगच्छ समाज के सामने उन हकीकतों को उजागर करेंगे जो खरतरगच्छ संघ अध्यक्ष कुशलचंद सुराना और उनकी भजन मण्डली समाज से छुपाती आ रही है और मौनबाडी को कॉमर्शियल ट्यूरिस्ट हब बनाने के लिये उसकी धार्मिक और सामाजिक अस्मिता के साथ गैर कानूनी तरीके से खिलवाड़ किया जा रहा है।
खरतरगच्छ जन चेतना मंच ने फिर चेताया है कि खरतरगच्छ समुदाय के धार्मिक स्थानों का सिर्फ धार्मिक और सामाजिक कार्यों में ही उपयोग होना चाहिये! वहीं मौनबाडी में शहीद किये गये सैंकड़ों पेड़ों का हिसाब सुराना एवं उनकी भजनमण्डली सार्वजनिक रूप से खरतरगच्छ समाज सहित पूरे जैन समाज को दें क्योंकि यह सम्पत्ति मुश्र्तका श्वेताम्बर जैन समाज की है। अगर वे अपनी करनी का हिसाब समाज को नहीं देते हैं? और समाज को गुमराह करते हैं तो फिर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को तो जवाब देना ही होगा!
जैसा कि हमने पिछले अंकों में साया किया था कि तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की चरण पादुका और पूज्य भट्टारक जिन कुशल सूरि की चरण पादुका (चरणों) की सेवा पूजा के लिये पुष्प-पत्रम उपलब्ध करने के लिये जयपुर रियासत के महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने बागवां बाग खर्चे हेतु मिति बैसाख सुदी 5 विक्रम सम्वत् 1836 को तत्कालीन पंच ओसवालान को खसना नम्बर 535, 536, 537 की 25 बीघा जमीन बक्क्षी थी। इस जमीन पर बगीचा लगा कर उस में पैदा होने वाले पुष्प-पत्रम् इन चरण पादुकाओं (चरणों) पर चढ़ाये जायेंगे और उससे मिलने वाले पुण्य में पंच ओसवालान के साथ-साथ जयपुर रियासत के अवाम और शासकों को भी इसका पूण्य मिलेगा।
अब शर्मनाक स्थिति देखिये, इस जमीन का काफी हिस्सा खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारियों की लापरवाही और गैर जुम्मेदारान क्रियाकलापों के चलते राजसात (भूमि अधिग्रहण) को गया, वहीं जमीन के काफी हिस्से का अतापता खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारियों को है ही नहीं! आज स्थिति यह है कि खरतरगच्छ संघ अध्यक्ष कुशलचंद सुराना सहित संघ में बैठे उनके सहयोगी पदाधिकारियों को इस पच्चीस बीघा जमीन की पूरी हकीकत के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी है ही नहीं! उन्हें यह भी पता नहीं है कि हकीकत में खरतरगच्छ संघ के कब्जे में वास्तव में कितनी जमीन है, कितनी जमीन पर अतिक्रमण है और कितनी जमीन लावारिस पड़ी है और लोग गैर कानूनी कब्जा कर रहे हैं?
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन का श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना और उनके संघ में सहयोगी वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित कार्यकारिणी के अन्य पदाधिकारियों से सीधा सवाल है कि अवैध रूप से उनके कब्जे की 225 साल (सवा दो सौ साल) पुरानी पंच ओसवालान की सेवा पूजा के आधीन रही मौनबाडी के इस बगीचे (बाडी) के लगभग साढ़े तीन सौ से ज्यादा पेड़ और उनके साथ हजारों पौधे आखीर कहां है? क्यों मौनबाडी की खसरा नम्बर 535, 536, 537 की जमीन पर एक भी पुराना पेड़ या विलुप्त हो रही प्रजाति का कोई पौधा नजर नहीं आ रहा है। वहां सिर्फ गैर कानूनी तरीके से बनाया गया राजमल सुराना स्मृति भवन के नाम और उसकी आड़ में बनाया गया होटल और गैर कानूनी अवैध रूप से संचालित मैरेज गार्डन (इसमें भी कोई गार्डन नहीं है) ही क्यों नजर आ रहा है?
खरतरगच्छ जन चेतना मंच पहिले भी खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना एवं उनकी भजन मण्डली को चेता चुका है कि वे धार्मिक स्थल का, अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिये व्यवसायिक दुरूपयोग तत्काल बंद करें और सम्पूर्ण मौनबाडी का सिर्फ समाज के धार्मिक और सामाजिक क्रियाकलापों में ही उपयोग करें।
हम आगे इस मुद्दे के साथ-साथ मौनबाडी से विलोपित किये गये 52 जिनालयों और पाश्र्वनाथ जयन्ति पर संचालित किये जाने वाले जिनरथ की दुर्दशा के बारे में भी विस्तार से जानकारियां साया करेंगे और खरतरगच्छ समाज के सामने उन हकीकतों को उजागर करेंगे जो खरतरगच्छ संघ अध्यक्ष कुशलचंद सुराना और उनकी भजन मण्डली समाज से छुपाती आ रही है और मौनबाडी को कॉमर्शियल ट्यूरिस्ट हब बनाने के लिये उसकी धार्मिक और सामाजिक अस्मिता के साथ गैर कानूनी तरीके से खिलवाड़ किया जा रहा है।
खरतरगच्छ जन चेतना मंच ने फिर चेताया है कि खरतरगच्छ समुदाय के धार्मिक स्थानों का सिर्फ धार्मिक और सामाजिक कार्यों में ही उपयोग होना चाहिये! वहीं मौनबाडी में शहीद किये गये सैंकड़ों पेड़ों का हिसाब सुराना एवं उनकी भजनमण्डली सार्वजनिक रूप से खरतरगच्छ समाज सहित पूरे जैन समाज को दें क्योंकि यह सम्पत्ति मुश्र्तका श्वेताम्बर जैन समाज की है। अगर वे अपनी करनी का हिसाब समाज को नहीं देते हैं? और समाज को गुमराह करते हैं तो फिर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को तो जवाब देना ही होगा!


