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जैन समुदाय को उसके वाजिब हकों से महरूम कर अपमानित न करे सरकार!

जयपुर (अग्रगामी) राजस्थान में भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के हिन्दुत्ववादी ऐजेण्डे को लागू करने के चक्कर में जैन समुदाय को अल्पसंख्यक के रूप में मिलने वाली सुविधाओं से महरूम रख कर अपमानित/प्रताडि़त कर रही है।
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन ने आरोप लगाया है कि जिला स्तर पर अल्पसंख्यक के रूप में जैन समुदाय को अल्पसंख्यक वर्ग का प्रमाण पत्र जारी नहीं किये जा रहे हैं। नतीजन अल्पसंख्यक जैन समुदाय के शिक्षार्थियों को शैक्षणिक छात्रवृति प्राप्त करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
खरतरगच्छ जन चेतना मंच ने राज्य की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे से सीधा सवाल किया है कि जब भारत सरकार की अधिसूचना क्रमांक एसओ 816 (ई) दिनांक 23 अक्टूबर, 1993 के तहत मुस्लिम, ईसाई, सिक्ख, बौद्ध और पारसी वर्ग के लिये अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है तो फिर भारत के राजपत्र असाधारण (एक्ट्राआर्डिनटी)संख्या 267 (ई) में उल्लेखित अल्पसंख्यक जैन समुदाय को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र क्यों जारी नहीं किये जा रहे हैं? ज्ञातव्य रहे कि मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे खुद अल्पसंख्यक मामलात विभाग की प्रभारी मंत्री भी हैं!
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन ने यहां बताया कि अगर राज्य सरकार ने राज्य के जिला कलक्टरों और जिला प्रशासन के सम्बद्ध अधिकारियों को जैन समुदाय को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने के लिये स्पष्ट निर्देश जारी नहीं किये तो जैन समुदाय के हजारों शिक्षार्थी छात्रवृतियां प्राप्त करने से महरूम हो जायेंगे।
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन ने आगे बताया कि राजस्थान में अल्पसंख्यक समुदाय के शिक्षार्थियों के लिये ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया आगामी जुलाई माह से प्रारम्भ होने की सम्भावना है। ऐसी स्थिति में अगर अल्पसंख्यक जैन समुदाय को अल्पसंख्यकता प्रमाण पत्र जारी करने में देरी हुई तो इसका खमियाजा इस समुदाय के प्रतिभावान शिक्षार्थियों खास कर बालिकाओं को भुगतना पड़ेगा।
हम यहां बता दें कि वर्ष-2011 की जनगणना के अनुसार पूरे देश में जैन समुदाय की कुल आबादी मात्र 42 लाख 25 हजार 053 है। याने कि देश की आबादी का मात्र 0.4 प्रतिशत! जैन समुदाय की जनसंख्या दिन प्रतिदिन घटती ही जा रही है और पारसी समुदाय के साथ-साथ जैन समुदाय की आबादी तेजी से घटती जा रही है और इतिहासकार और समाजशास्त्री चेतावनी दे रहे हैं कि घटती जैन समुदाय की आबादी पर अगर अंकुश नहीं लगा तो इस शताब्दी के अंत तक जैन समुदाय विलुप्ति के कागार पर पहुंच जायेगा और अगली शताब्दी में वह इतिहास का हिस्सा ही बन कर रह जायेगा।
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन ने वसुन्धरा राजे सरकार से आग्रह किया है कि अल्पसंख्यक जैन समुदाय के संविधान प्रदत्त अधिकार दिलवाने के लिये तत्काल सक्षम कार्यवाही की जाये। हम यहां पुन: स्पष्ट कर दें कि राजस्थान में अल्पसंख्यक मामलात विभाग वर्तमान में सीधे ही मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के आधीन है।

 
AGRAGAMI SANDESH

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