जयपुर (अग्रगामी) मालपुरा दादाबाडी के पास बताई जा रही अनुसूचित जाति के व्यक्ति की जमीन खरीदने का मामला हो या फिर मकराना मार्बल खरीद में बर्ती जा रही अनियमितताओं का मामला हो या फिर मौनबाडी (मोहनबाडी) में हमारे पूर्वज आचार्यों, साधु-साध्वियों और यतियों की मूर्तियों और चरणों के बेशर्मीपूर्ण तरीके से किये जा रहे अनादर का मामला हो, परत-दर-परत हुए खुलासों से खरतरगच्छ समाज में नारागी का माहौल पैदा कर दिया है। अब सामान्य समाज बंधुओं की जबान पर यह आने लगा है कि श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ को पदाधिकारियों ने गड़बड़झाले का कोथला बना दिया है। समाज बंधुओं ने सवाल करना शुरू कर दिया है कि क्या दाल में काला है या फिर सारी दाल ही काली है?
श्री जैन श्वेताम्बर स्कूल, घीवालों का रास्ता (लीलाधर जी के उपाश्रय) में पिछले कई वर्षों से स्थिर पड़े जिनरथ को चलायमान करने का भी कोई मानस खरतरगच्छ संघ पदाधिकारियों का नजर नहीं आ रहा है। भोजनशाला का नियन्त्रण संचालकों के पास न हो कर नौकरों-कर्मचारियों के हवाले कर दिया गया है। भोजनशाला कुपनों और आय का गड़बड़झाला सर्वविदित है। मौनबाडी से लापता सैंकड़ों पेड़ों और दुर्लभ वनस्पतियों के बारे में कोई जवाब देही नहीं है और कोई जवाब देने वाला भी नहीं है। मौनबाडी से 52 जिनालयों को विलोपित करने के पीछे की कहानी को भी कोई बताने वाला नहीं है।
ऐसी स्थिति में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना का क्या दायीत्व बनता है? जवाब दें सुराना जी! हम सुराना जी को याद दिला दें कि अकर्मण्यता के चलते उन्हें पूर्व में भी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा था। क्या वे पुन: अपनी उसही स्थिति को दोहराने के लिये तत्पर हैं? जवाब दें सुराना साहब!
श्री जैन श्वेताम्बर स्कूल, घीवालों का रास्ता (लीलाधर जी के उपाश्रय) में पिछले कई वर्षों से स्थिर पड़े जिनरथ को चलायमान करने का भी कोई मानस खरतरगच्छ संघ पदाधिकारियों का नजर नहीं आ रहा है। भोजनशाला का नियन्त्रण संचालकों के पास न हो कर नौकरों-कर्मचारियों के हवाले कर दिया गया है। भोजनशाला कुपनों और आय का गड़बड़झाला सर्वविदित है। मौनबाडी से लापता सैंकड़ों पेड़ों और दुर्लभ वनस्पतियों के बारे में कोई जवाब देही नहीं है और कोई जवाब देने वाला भी नहीं है। मौनबाडी से 52 जिनालयों को विलोपित करने के पीछे की कहानी को भी कोई बताने वाला नहीं है।
ऐसी स्थिति में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना का क्या दायीत्व बनता है? जवाब दें सुराना जी! हम सुराना जी को याद दिला दें कि अकर्मण्यता के चलते उन्हें पूर्व में भी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा था। क्या वे पुन: अपनी उसही स्थिति को दोहराने के लिये तत्पर हैं? जवाब दें सुराना साहब!


