जयपुर (अग्रगामी) आखीरकार जैन समुदाय के किस धर्म ग्रंथ में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने, टैक्स चोरी करने, धार्मिक स्थल का व्यवसायिक उपयोग करने, समाज को अपनी बपौती या जागीर समझने, समाज की व्यवस्था अपने दुमछल्लों और नौकरशाहों के जरिये अपनी दूकान समझ कर चलाने का उल्लेख है? बतायेंगे श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना और उनकी मंडली!
पंच ओसवालान को ठाकुरजी श्री ऋषभदेव जी और भट्टारक श्री जिनकुशल सूरि की चरण पादुकाओं की सेवा पूजा के लिये बागवां बाग लगाने के लिये तत्कालीन जयपुर रियासत के महाराजा सवाई प्रतापसिंह द्वारा पंच ओसवालान की अर्जी पर 25 बीघा जमीन बक्क्षी गई थी। इस जमीन पर बगीचा लगा कर इससे प्राप्त होने वलो पुष्पम-पत्रम से ठाकुरजी श्री ऋषभदेव जी और भट्टारक जिनकुशल सूरि की चरण पादुकाओं की सेवा पूजा की जानी थी।
पंच ओसवालान को ठाकुरजी श्री ऋषभदेव जी और भट्टारक श्री जिनकुशल सूरि की चरण पादुकाओं की सेवा पूजा के लिये बागवां बाग लगाने के लिये तत्कालीन जयपुर रियासत के महाराजा सवाई प्रतापसिंह द्वारा पंच ओसवालान की अर्जी पर 25 बीघा जमीन बक्क्षी गई थी। इस जमीन पर बगीचा लगा कर इससे प्राप्त होने वलो पुष्पम-पत्रम से ठाकुरजी श्री ऋषभदेव जी और भट्टारक जिनकुशल सूरि की चरण पादुकाओं की सेवा पूजा की जानी थी।
इस बागवां बाग की 25 बीघा जमीन में से श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के कब्जे वाली जमीन पर लगा बाग कहां है? लगभग ढाई सौ से चार सौ प्राचीन वृक्ष और दुर्लभ प्रजाति की बनस्पतियों का कोई अतापता नजर नहीं आ रहा है। कहां है प्राचीन वृक्ष और दुर्लभ प्रजाति की बनस्पतियां? बतायेंगे, खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना! धार्मिक प्रयोजन हेतु दी गई जमीन पर किन कानूनों और धार्मिक मान्यताओं के तहत मैरिज गार्डन (जिसमें गार्डन लापता है) कायम कर दिये गये और राजमल सुराना अतिथि भवन, जिसके निर्माण की इजाजत नहीं ली गई, फिर भी निर्माण करा कर उसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है, आखीर क्यों?
मौनबाडी (मोहनबाडी) में हरे वृक्षों और दुर्लभ प्रजाति की वनस्पतियों का सफाया कर बनाये गये मैरिज गार्डनों और विश्रान्ति गृह की आड़ में बने होटल के मामलों में लम्बे अर्से से सर्विस टैक्स क्यों नहीं चुकाया गया? जवाब दें खरतरगच्छ संघ अध्यक्ष कुशलचंद सुराना! सुराना यह भी बतायें कि आमेर में धार्मिक स्थल पर अवैध रूप से बनाये गये मैरिज गार्डन का कितना सर्विस टैक्स चुकाया गया, अगर नहीं तो क्यों? इस सवाल का जवाब भी सुराना साहब को देना होगा कि आमेर के मैरिज गार्डन को ठेके पर देने से कितनी आमदनी हो रही है और इस ठेकेदार को आमेर मंदिर की कितनी प्रापर्टी मुफ्त में उसका सामान रखने के लिये दी गई है? यदि हां तो क्यों और इससे आमरे मंदिर को कितना आर्थिक नुकसान हो रहा है? बताओ हुजूर साहब!
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन ने खरतरगच्छ संघ अध्यक्ष कुशलचंद सुराना को पुन: चेताया है कि धार्मिक स्थल की सम्पत्तियों का व्यावसायिक दुरूपयोग तत्काल बंद करें और उनका स्पष्ट रूप से धार्मिक कृत्यों के लिये ही उपयोग सुनिश्चित करवायें अन्यथा इससे होने वाले दूरगामी परिणामों को भुगतने के लिये तैयार रहें।




