कालाबाजारी, जमाखोरी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अनाचार से पीडि़त राजस्थान के अवाम को अब मंहगाई की मार सहने के लिये तैयार हो जाना चाहिये। केंद्र में सत्ता भारतीय जनता पार्टी की आती है या भाजपा सत्ता में आने से वंचित रह जाती है, खमियाजा कुल मिला कर अवाम को ही भुगतना होगा। एक कहावत है कि चाकू खरबूजे पर गिरे या फिर खरबूजा चाकू पर गिरे, दोनों ही स्थितियों में कटना तो खरबूजे हो ही होगा।
आगामी 16 मई, 2014 को आनेवाले लोकसभा चुनावों के बाद राजस्थान की जनता को एक गम्भीर परिस्थिती से भी गुजरना पड़ सकता है। अगर चुनावी नतीजे भाजपा के पक्ष में आते हैं तो अवाम को जोशीले भाजपा कार्यकर्ताओं के जोश से मुखातिब होना होगा। वहीं अगर भाजपा के हाथों से सत्ता फिसलती नजर आई तो उन्मादियों के उन्माद का सामना करने के लिये तैयार रहना होगा।
हम और हमारे साथ राजस्थान का आम अवाम चुनावी नतीजों की घोषणा और उसके बाद केंद्र सरकार के गठन तक रहने वाली अत्यन्त संवेदनशील परिस्थितियों में यही दुआ कर सकते हैं कि सब कुछ सही रहे और यही उम्मीद करते हैं कि जो भी चुनावी नतीजे आयें वे देश और देश के अवाम के पक्ष में ही आयें। इन्ही उम्मीदों के साथ हमें चुनावी नतीजों का इन्तजार रहेगा!
आगामी 16 मई, 2014 को आनेवाले लोकसभा चुनावों के बाद राजस्थान की जनता को एक गम्भीर परिस्थिती से भी गुजरना पड़ सकता है। अगर चुनावी नतीजे भाजपा के पक्ष में आते हैं तो अवाम को जोशीले भाजपा कार्यकर्ताओं के जोश से मुखातिब होना होगा। वहीं अगर भाजपा के हाथों से सत्ता फिसलती नजर आई तो उन्मादियों के उन्माद का सामना करने के लिये तैयार रहना होगा।
हम और हमारे साथ राजस्थान का आम अवाम चुनावी नतीजों की घोषणा और उसके बाद केंद्र सरकार के गठन तक रहने वाली अत्यन्त संवेदनशील परिस्थितियों में यही दुआ कर सकते हैं कि सब कुछ सही रहे और यही उम्मीद करते हैं कि जो भी चुनावी नतीजे आयें वे देश और देश के अवाम के पक्ष में ही आयें। इन्ही उम्मीदों के साथ हमें चुनावी नतीजों का इन्तजार रहेगा!


