टौंक/मालपुरा/जयपुर (अग्रगामी) श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ की दिनांक 20 अप्रेल, 2014 को आमंत्रित असाधारण सभा और उसमें मालपुरा के वर्तमान दादाबाडी परिसर के पास वाली जमीन खरीदने बाबत ऐजेण्डे पर निर्णय के संदर्भ में खुलासों के साथ ही अन्य खुलासों के पिटारे खुलने लगे है!
खरतरगच्छ संघ की गत 20 अप्रेल, 2014 की असाधारण सभा में जिस तरह तथ्यों को छुपा कर ब्लाइण्ड प्रस्ताव पारित करवाया गया, उससे ही साफ जाहिर हो गया था कि मालपुरा जमीन खरीद मामले में दाल में कुछ काला है। लेकिन अब जब कि खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारी मालपुरा के अनुसूचित जनजाति के जिस गरीब की जमीन बिचौलिये भू-माफियाओं के माध्यम से खरीदने की जुगत बैठा रहे हैं, उसकी असलियत उजागर होने के बावजूद हकीकत की स्पष्ट जानकारी समाज को नहीं दे रहे हैं, ऐसे में यह साफ हो गया है कि मालपुरा दादाबाडी के पास की अनुसूचित जनजाति के गरीब की जमीन पर गैर कानूनी तरीके से कॉलोनी बसाने में विफल रहने वाले भू-माफियाओं और बिचौलियों को आर्थिक एवं वैधानिक फायदा पहुंचाने और खरतरगच्छ संघ को गैर जुम्मेदारान तरीके से मामले मुकदमों में अटकाने में खुद श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना की गहरी मिलीभगत हो सकती है। ऐसे में दाल में काला ही नहीं पूरी दाल ही काली नजर आने लगी है। क्योंकि जिस जमीन को कानूनों को ताक में रख कर बिचौलिये कमल कोठारी के जरिये खरीदने की जुगत बैठाई जा रही है वह कमल कोठारी खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना का करीबी रिश्तेदार है और उस जमीन के मालिक से खरीद का एग्रीमेंट करने वालों में से एक है। उसने 20 अप्रेल को साधारण सभा में जमीन खरीद के मामले को गोपनीय रखने हेतु दबाव भी बनाया था, अत: साफ हो गया है कि इस कमल कोठारी को खरतरगच्छ संघ अध्यक्ष कुशलचंद सुराना का वरदहस्त है।
श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना का एक ओर गम्भीर कारनामा हम उजागर चुके हैं। कुशलचंद सुराना और इनके सहयोगियों द्वारा एक निर्माण कमेटी बना कर गलता रोड़ स्थित पंच ओसवाल समाज की जमीन पर गैर कानूनी तरीके से बिना सरकारी इजाजत लिये अवैध रूप से राजमल सुराना अतिथि भवन के नाम से होटल का निर्माण किया गया है। बिना इजाजत गैर कानूनी अवैध निर्माण के लिये नगर निगम ने इन्हें कई बार नोटिस भी जारी किये हैं।
इस पंच ओसवालान की संयुक्त मिलकियत की खसरा नम्बर 535, 536 और 537 की जमीन के व्यवसायिक प्रयोग हेतु श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के आवेदन को प्रशासनिक एवं राज्य सरकार के स्तर पर रद्द कर दिया गया था। इसके बाद श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारियों ने यह तथ्य छुपाते हुए कि यह जमीन हकीकत में पंच ओसवालान की शामीलात की मिल्कियत है, खरतरगच्छ संघ के नाम से भूरूपान्तरण रियायत दर पर करवाना चाहा, उस आवेदन को भी प्रशासनिक एवं सरकारी स्तर पर खारिज कर दिया गया। इसके बाद श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ ने आवेदन किया कि यह जमीन केवल आवासीय प्रयोजनार्थ काम में ली जावेगी। मोनबाडी और इसकी मिल्कियत की खसरा नम्बर 535, 536 और 537 की जमीन से जुड़े अहम दस्तावेजों की फोटो प्रतियां खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन के पास उपलब्ध है जो यह दर्शाता है कि (1) यह जमीन श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के स्वामित्व की नहीं है। (2) इस जमीन पर इन्हें किसी भी तरह की निर्माण की इजाजत नहीं है। (3) यह भी स्पष्ट है कि खरतरगच्छ संघ इसका व्यवसायिक उपयोग भी नहीं कर सकता है।
लेकिन कुशलचंद सुराना और उनके सहयोगियों ने इस जमीन पर राजमल सुराना अतिथि भवन के नाम से अवैध रूप से एक होटल शुरू कर रखा है और आसपास की सारी जमीन पर तीन मैरेज गार्डन बना कर उनका कॉमर्शियल उपयोग करवा रहे हैं। जो कि गैर कानूनी और अवैध है। इससे साफ हो जाता है कि कुशलचंद सुराना और खरतरगच्छ संघ में बैठे उनके सहयोगियों ने खरतरगच्छ संघ के संविधान और सारे कानून कायदों की धज्जियां उडा कर मोहनबाडी (मौनबाडी) को अपनी जागीर बना रखा है।
ज्ञातव्य रहे कि कुशलचंद सुराना ने पहिले भी एक संस्था पंजीकृत करवा कर जवाहरलाल नेहरू मार्ग स्थित खरतरगच्छ संघ की मिल्कियत यात्री निवास और उसकी जमीन पर कब्जा कर लिया था और बाद में खरतरगच्छ जन चेतना मंच के मुख्य कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन द्वारा इसका भांडाफोड़ किये जाने के बाद जबर्दस्त हंगामा होने पर यात्री निवास और उक्त जमीन पर सुराना बंधुओं द्वारा पंजीकृत सोसायटी की आड़ में किये गये कब्जे को हटाने के लिये उन्हें मजबूर होना पड़ा था।
इधर श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ में मालपुरा जमीन घोटाले के साथ-साथ मारबल घोटाला भी उजागर हो गया है। मोहम्मद इकबाल उर्फ नेपाली को कुशलचंद सुराना, किशनचंद डागा और सुनील मेहमवाल के दबाव में मंदिर खाते से खरतरगच्छ संघ ने मोटी रकम का भुगतान किया है। सूत्रों के अनुसार मोहम्मद इकबाल उर्फ नेपाली की फर्म का नाम एकमे मारबल सप्लायर्स मकराना है! खरतरगच्छ संघ ने इकबाल की इस फर्म के नाम से भुगतान नहीं किया है। जो भुगतान किया गया है वह ......इण्डस्ट्रीज के नाम से चैक और नकद भुगतान हुआ बताया जाता है। जिसने मारबल का एक चौका भी आज तक संघ को सप्लाई नहीं किया है। चैक का रेकार्ड संघ के कार्यालय में उपलब्ध है। इसके साथ ही फर्म का नाम, बैंक खाता संख्या, बैक का आईएफएमसी कोड़, बैंक का नाम और शाखा का विवरण भी खरतरगच्छ संघ कार्यालय में उपलब्ध है। जो साफ जाहिर करता है कि दाल में कुछ काला ही नहीं पूरी दाल ही काली है। अब सवाल उठता है कि क्या जो रकम मारबल के लिये एडवांस दी गई है, उस पर टीडीएस काटा गया है या नहीं! अगर नहीं तो क्यों?
खरतरगच्छ संघ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन ने श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना से सवाल किया है कि क्या खरतरगच्छ संघ अध्यक्ष और उनकी कार्यकारिणी के क्रियाकलापों की जानकारी संघ के सदस्यों को होनी चाहिये या नहीं! अगर नहीं तो क्यों? उन्होंने सवाल किया कि मारबल सप्लायर को जितनी राशि का चैक दिया गया है वह बिना संघ की साधारण सभा की स्वीकृति के नहीं दिया जा सकता है। ऐसे में यह मोटा भुगतान कैसे हो गया? उन्होंने खरतरगच्छ संघ अध्यक्ष कुशलचंद सुराना को चेताया है कि या तो वे संघ में अपनी और अपने सहयोगियों की गतिविधियों को संघ विधान के अनुसार नियमित करें अन्यथा खरतरगच्छ संघ से तत्काल इस्तीफा दे दें!
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन ने स्पष्ट किया कि इस मामले में गहराई तक जाने के लिये वे इस मामले से जुडे सभी ठेकेदारों-व्यापारियों की जांच हेतु आयकर विभाग सहित सम्बन्धित जांच एजेंसियों से भी आग्रह करेंगे! ताकि समाज की आड़ लेकर किये जा रहे घोटालों में बेनामी लेनदेन का खुलासा भी हो सके जिसे पूंजीपति अबतक समाज से छुपाते रहे हैं? हम इन मामालों में विस्तार से आगे भी लिखेंगे।
खरतरगच्छ संघ की गत 20 अप्रेल, 2014 की असाधारण सभा में जिस तरह तथ्यों को छुपा कर ब्लाइण्ड प्रस्ताव पारित करवाया गया, उससे ही साफ जाहिर हो गया था कि मालपुरा जमीन खरीद मामले में दाल में कुछ काला है। लेकिन अब जब कि खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारी मालपुरा के अनुसूचित जनजाति के जिस गरीब की जमीन बिचौलिये भू-माफियाओं के माध्यम से खरीदने की जुगत बैठा रहे हैं, उसकी असलियत उजागर होने के बावजूद हकीकत की स्पष्ट जानकारी समाज को नहीं दे रहे हैं, ऐसे में यह साफ हो गया है कि मालपुरा दादाबाडी के पास की अनुसूचित जनजाति के गरीब की जमीन पर गैर कानूनी तरीके से कॉलोनी बसाने में विफल रहने वाले भू-माफियाओं और बिचौलियों को आर्थिक एवं वैधानिक फायदा पहुंचाने और खरतरगच्छ संघ को गैर जुम्मेदारान तरीके से मामले मुकदमों में अटकाने में खुद श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना की गहरी मिलीभगत हो सकती है। ऐसे में दाल में काला ही नहीं पूरी दाल ही काली नजर आने लगी है। क्योंकि जिस जमीन को कानूनों को ताक में रख कर बिचौलिये कमल कोठारी के जरिये खरीदने की जुगत बैठाई जा रही है वह कमल कोठारी खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना का करीबी रिश्तेदार है और उस जमीन के मालिक से खरीद का एग्रीमेंट करने वालों में से एक है। उसने 20 अप्रेल को साधारण सभा में जमीन खरीद के मामले को गोपनीय रखने हेतु दबाव भी बनाया था, अत: साफ हो गया है कि इस कमल कोठारी को खरतरगच्छ संघ अध्यक्ष कुशलचंद सुराना का वरदहस्त है।
श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना का एक ओर गम्भीर कारनामा हम उजागर चुके हैं। कुशलचंद सुराना और इनके सहयोगियों द्वारा एक निर्माण कमेटी बना कर गलता रोड़ स्थित पंच ओसवाल समाज की जमीन पर गैर कानूनी तरीके से बिना सरकारी इजाजत लिये अवैध रूप से राजमल सुराना अतिथि भवन के नाम से होटल का निर्माण किया गया है। बिना इजाजत गैर कानूनी अवैध निर्माण के लिये नगर निगम ने इन्हें कई बार नोटिस भी जारी किये हैं।
इस पंच ओसवालान की संयुक्त मिलकियत की खसरा नम्बर 535, 536 और 537 की जमीन के व्यवसायिक प्रयोग हेतु श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के आवेदन को प्रशासनिक एवं राज्य सरकार के स्तर पर रद्द कर दिया गया था। इसके बाद श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारियों ने यह तथ्य छुपाते हुए कि यह जमीन हकीकत में पंच ओसवालान की शामीलात की मिल्कियत है, खरतरगच्छ संघ के नाम से भूरूपान्तरण रियायत दर पर करवाना चाहा, उस आवेदन को भी प्रशासनिक एवं सरकारी स्तर पर खारिज कर दिया गया। इसके बाद श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ ने आवेदन किया कि यह जमीन केवल आवासीय प्रयोजनार्थ काम में ली जावेगी। मोनबाडी और इसकी मिल्कियत की खसरा नम्बर 535, 536 और 537 की जमीन से जुड़े अहम दस्तावेजों की फोटो प्रतियां खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन के पास उपलब्ध है जो यह दर्शाता है कि (1) यह जमीन श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के स्वामित्व की नहीं है। (2) इस जमीन पर इन्हें किसी भी तरह की निर्माण की इजाजत नहीं है। (3) यह भी स्पष्ट है कि खरतरगच्छ संघ इसका व्यवसायिक उपयोग भी नहीं कर सकता है।
लेकिन कुशलचंद सुराना और उनके सहयोगियों ने इस जमीन पर राजमल सुराना अतिथि भवन के नाम से अवैध रूप से एक होटल शुरू कर रखा है और आसपास की सारी जमीन पर तीन मैरेज गार्डन बना कर उनका कॉमर्शियल उपयोग करवा रहे हैं। जो कि गैर कानूनी और अवैध है। इससे साफ हो जाता है कि कुशलचंद सुराना और खरतरगच्छ संघ में बैठे उनके सहयोगियों ने खरतरगच्छ संघ के संविधान और सारे कानून कायदों की धज्जियां उडा कर मोहनबाडी (मौनबाडी) को अपनी जागीर बना रखा है।
ज्ञातव्य रहे कि कुशलचंद सुराना ने पहिले भी एक संस्था पंजीकृत करवा कर जवाहरलाल नेहरू मार्ग स्थित खरतरगच्छ संघ की मिल्कियत यात्री निवास और उसकी जमीन पर कब्जा कर लिया था और बाद में खरतरगच्छ जन चेतना मंच के मुख्य कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन द्वारा इसका भांडाफोड़ किये जाने के बाद जबर्दस्त हंगामा होने पर यात्री निवास और उक्त जमीन पर सुराना बंधुओं द्वारा पंजीकृत सोसायटी की आड़ में किये गये कब्जे को हटाने के लिये उन्हें मजबूर होना पड़ा था।
इधर श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ में मालपुरा जमीन घोटाले के साथ-साथ मारबल घोटाला भी उजागर हो गया है। मोहम्मद इकबाल उर्फ नेपाली को कुशलचंद सुराना, किशनचंद डागा और सुनील मेहमवाल के दबाव में मंदिर खाते से खरतरगच्छ संघ ने मोटी रकम का भुगतान किया है। सूत्रों के अनुसार मोहम्मद इकबाल उर्फ नेपाली की फर्म का नाम एकमे मारबल सप्लायर्स मकराना है! खरतरगच्छ संघ ने इकबाल की इस फर्म के नाम से भुगतान नहीं किया है। जो भुगतान किया गया है वह ......इण्डस्ट्रीज के नाम से चैक और नकद भुगतान हुआ बताया जाता है। जिसने मारबल का एक चौका भी आज तक संघ को सप्लाई नहीं किया है। चैक का रेकार्ड संघ के कार्यालय में उपलब्ध है। इसके साथ ही फर्म का नाम, बैंक खाता संख्या, बैक का आईएफएमसी कोड़, बैंक का नाम और शाखा का विवरण भी खरतरगच्छ संघ कार्यालय में उपलब्ध है। जो साफ जाहिर करता है कि दाल में कुछ काला ही नहीं पूरी दाल ही काली है। अब सवाल उठता है कि क्या जो रकम मारबल के लिये एडवांस दी गई है, उस पर टीडीएस काटा गया है या नहीं! अगर नहीं तो क्यों?
खरतरगच्छ संघ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन ने श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना से सवाल किया है कि क्या खरतरगच्छ संघ अध्यक्ष और उनकी कार्यकारिणी के क्रियाकलापों की जानकारी संघ के सदस्यों को होनी चाहिये या नहीं! अगर नहीं तो क्यों? उन्होंने सवाल किया कि मारबल सप्लायर को जितनी राशि का चैक दिया गया है वह बिना संघ की साधारण सभा की स्वीकृति के नहीं दिया जा सकता है। ऐसे में यह मोटा भुगतान कैसे हो गया? उन्होंने खरतरगच्छ संघ अध्यक्ष कुशलचंद सुराना को चेताया है कि या तो वे संघ में अपनी और अपने सहयोगियों की गतिविधियों को संघ विधान के अनुसार नियमित करें अन्यथा खरतरगच्छ संघ से तत्काल इस्तीफा दे दें!
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन ने स्पष्ट किया कि इस मामले में गहराई तक जाने के लिये वे इस मामले से जुडे सभी ठेकेदारों-व्यापारियों की जांच हेतु आयकर विभाग सहित सम्बन्धित जांच एजेंसियों से भी आग्रह करेंगे! ताकि समाज की आड़ लेकर किये जा रहे घोटालों में बेनामी लेनदेन का खुलासा भी हो सके जिसे पूंजीपति अबतक समाज से छुपाते रहे हैं? हम इन मामालों में विस्तार से आगे भी लिखेंगे।


