जयपुर (अग्रगामी) जयपुर नगर निगम के पॉश इलाके में शहर की चार दिवारी से सटे करोड़ों रूपये की जमीन पर अतिक्रमण कर उस पर नगर निगम की इजाजत लिये बगैर गैर कानूनी तरीके से अवैध निर्माण कर बेचने के प्रकरण सामने आने के बाद भी जयपुर नगर निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की सरपरस्ती में हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त और उनके अधीनस्थ अफसर और कारिंदे अपनी जेबें भरने के चक्कर में कार्यवाही करने की जुर्रत भी नहीं कर रहे हैं।
मामला आगरा रोड़ पर मिश्रा मार्केट से जुडा हुआ है। मिश्रा मार्केट क्षेत्र में लगभग 40 साल पहिले ट्रांसपोर्ट काम से जुडे तकनीकी लोगों, मेकेनिकों को अस्थाई तौर पर बसाया गया था। बाद में मिश्रा मार्केट में अस्थाई तौर पर बसाये गये इन लोगों का पुर्नवास ट्रांसपोर्ट नगर में कर दिया गया। ऐसी स्थिति में यह क्षेत्र पुन: राजसात हो गया और यह सम्पत्ति स्वत: सरकार के पास आ गई। राजस्थान नगर पालिका अधिनियम के प्रावधानों के तहत जयपुर नगर निगम की जुम्मेदारी बनती है कि वह इस शासकीय सम्पत्ति की रक्षा करे और इस पर गैर कानूनी अतिक्रमण होने से रोके।
लेकिन जयपुर नगर निगम हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त और उनके अधीनस्थ कारिंदे इस सरकारी सम्पत्ति पर अपनी निगरानी में अवैध निर्माण करवा कर मोटा माल बटोर रहे हैं। शर्मनाक स्थिति यह है कि शिकायत करने पर वे शिकायतों को गायब कर देते हैं। हवामहल जोन पूर्व के इन मलाई खाऊ अफसरों और कारिंदों की बेशर्मी का आलम देखिये कि सूचना का अधिकार कानून 2005 में मांगी गई सूचना पर भी उनका साफ-साफ जवाब होता है कि हवामहल जोन पूर्व कार्यालय द्वारा निर्माण की स्वीकृति नहीं दी गई है। जिसके कारण कोई कार्यवाही नहीं की गई।
अब इन बेगैरत रिश्वतखोर और मलाई खाऊ अफसरों और कारिंदों से हमारा सीधा सवाल है कि जब आपके द्वारा इजाजत तामीर नहीं दी गई तो बिना इजाजत तामीर निर्माण मिश्रा मार्केट में कैसे हो रहा है? बिना इजाजत कॉमर्शियल निर्माण को रोकने और ध्वस्त करने की जुम्मेदारी कानूनन आयुक्त, राजस्व अधिकारी, जेईएन, गजधर और सहायक सर्वेयर की है। क्यों हवामहल जोन पूर्व का यह अमला कार्यवाही नहीं कर रहा है? कार्यवाही नहीं करने के लिये कितने लाख में भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों से ..... हुआ है,बतायेंगे जयपुर नगर निगम के भ्रष्ट और बेईमान हुक्काम!
प्रकरण में जिन दस्तावेजों की फोटो प्रतियां अग्रगामी संदेश के हाथ लगी है, वे उजागर करती है कि अगर सरकारी स्तर से तत्काल कार्यवाही होती है तो बाजार मूल्य से लगभग दस हजार करोड़ रूपये की सरकारी सम्पत्ति को भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों से बचाया जा सकता है। लेकिन हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त और इन के अधीनस्थ हुक्कामों और कारिंदों को मोटी काली कमाई करने से फुर्सत मिले तब ही तो वे कार्यवाही करें।
मामला आगरा रोड़ पर मिश्रा मार्केट से जुडा हुआ है। मिश्रा मार्केट क्षेत्र में लगभग 40 साल पहिले ट्रांसपोर्ट काम से जुडे तकनीकी लोगों, मेकेनिकों को अस्थाई तौर पर बसाया गया था। बाद में मिश्रा मार्केट में अस्थाई तौर पर बसाये गये इन लोगों का पुर्नवास ट्रांसपोर्ट नगर में कर दिया गया। ऐसी स्थिति में यह क्षेत्र पुन: राजसात हो गया और यह सम्पत्ति स्वत: सरकार के पास आ गई। राजस्थान नगर पालिका अधिनियम के प्रावधानों के तहत जयपुर नगर निगम की जुम्मेदारी बनती है कि वह इस शासकीय सम्पत्ति की रक्षा करे और इस पर गैर कानूनी अतिक्रमण होने से रोके।
लेकिन जयपुर नगर निगम हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त और उनके अधीनस्थ कारिंदे इस सरकारी सम्पत्ति पर अपनी निगरानी में अवैध निर्माण करवा कर मोटा माल बटोर रहे हैं। शर्मनाक स्थिति यह है कि शिकायत करने पर वे शिकायतों को गायब कर देते हैं। हवामहल जोन पूर्व के इन मलाई खाऊ अफसरों और कारिंदों की बेशर्मी का आलम देखिये कि सूचना का अधिकार कानून 2005 में मांगी गई सूचना पर भी उनका साफ-साफ जवाब होता है कि हवामहल जोन पूर्व कार्यालय द्वारा निर्माण की स्वीकृति नहीं दी गई है। जिसके कारण कोई कार्यवाही नहीं की गई।
अब इन बेगैरत रिश्वतखोर और मलाई खाऊ अफसरों और कारिंदों से हमारा सीधा सवाल है कि जब आपके द्वारा इजाजत तामीर नहीं दी गई तो बिना इजाजत तामीर निर्माण मिश्रा मार्केट में कैसे हो रहा है? बिना इजाजत कॉमर्शियल निर्माण को रोकने और ध्वस्त करने की जुम्मेदारी कानूनन आयुक्त, राजस्व अधिकारी, जेईएन, गजधर और सहायक सर्वेयर की है। क्यों हवामहल जोन पूर्व का यह अमला कार्यवाही नहीं कर रहा है? कार्यवाही नहीं करने के लिये कितने लाख में भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों से ..... हुआ है,बतायेंगे जयपुर नगर निगम के भ्रष्ट और बेईमान हुक्काम!
प्रकरण में जिन दस्तावेजों की फोटो प्रतियां अग्रगामी संदेश के हाथ लगी है, वे उजागर करती है कि अगर सरकारी स्तर से तत्काल कार्यवाही होती है तो बाजार मूल्य से लगभग दस हजार करोड़ रूपये की सरकारी सम्पत्ति को भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों से बचाया जा सकता है। लेकिन हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त और इन के अधीनस्थ हुक्कामों और कारिंदों को मोटी काली कमाई करने से फुर्सत मिले तब ही तो वे कार्यवाही करें।


