बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती ने स्पष्ट कर दिया है कि लोकसभा चुनाव-2014 के लिये उनकी पार्टी कोई घोषणा पत्र जारी नहीं करेगी! वहीं लगभग सभी राजनैतिक दलों ने जोकि लोकसभा चुनाव में शिरकत कर रहे हैं, ने अपने चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिये हें लेकिन भारतीय जनता पार्टी रविवार को इस कालम के लिखे जाने तक अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी नही कर पाई। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का कहना है कि पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र आज 07 अप्रेल को जारी किया जा सकता है।
महिनों पहिले भारतीय जनता पार्टी ने नरेन्द्र मोदी को अपनी पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था। ऐसे में होना यह चाहिये था कि पार्टी के घोषणा पत्र को जारी करने में भी पार्टी अन्य राजनैतिक दलों से पहल कर अपना घोषणा पत्र जारी करती!
भारतीय जनता पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की अगर मानी जाये तो पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र जारी होने में हो रही देरी का कारण पार्टी शीर्ष नेतृत्व की आपसी खच-खच है। चुनाव घोषणा पत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरलीमोहर जोशी की अगुआई में एक कमेटी को तैयार करना था। कमेटी ने ड्राफ्ट तैयार कर शीर्ष नेतृत्व के समक्ष पेश भी कर दिया बताया। लेकिन भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी और उनके मुसाहिबों को उसमें कमियां नजर आई। इन कमियों में राममंदिर सहित कुछ खास मुद्दे शामिल हैं। नतीजन चुनाव घोषणा पत्र दुबारा बनाया जा रहा है। यह चुनाव घोषणा पत्र अब आज 07 अप्रेल से पहिले जारी होना शायद नामुमकीन है।
यहां यह मुद्दा गम्भीरता से उठता है कि एक राष्ट्रीय पार्टी चुनावों में अपने दृष्टिकोण को जनता के सामने रखने के लिये चुनाव घोषणा पत्र का सहारा भी नहीं ले पा रही है। पार्टी में आपसी सिर फुटव्वल के चलते घोषणा पत्र ही जारी नहीं होने के पीछे कारण जो भी हों, जनता में यह संदेश गया है कि भारतीय जनता पार्टी के पास ऐसे कोई मुद्दे ही नहीं हैं जो जनकल्याण से जुड़े हों! वैसे भी आम चुनावों के पहिले चरण का मतदान 7 अप्रेल को होना है। ऐसे में घोषणा पत्र जारी करना या ना करना अब बेमानी हो गया है।
महिनों पहिले भारतीय जनता पार्टी ने नरेन्द्र मोदी को अपनी पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था। ऐसे में होना यह चाहिये था कि पार्टी के घोषणा पत्र को जारी करने में भी पार्टी अन्य राजनैतिक दलों से पहल कर अपना घोषणा पत्र जारी करती!
भारतीय जनता पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की अगर मानी जाये तो पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र जारी होने में हो रही देरी का कारण पार्टी शीर्ष नेतृत्व की आपसी खच-खच है। चुनाव घोषणा पत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरलीमोहर जोशी की अगुआई में एक कमेटी को तैयार करना था। कमेटी ने ड्राफ्ट तैयार कर शीर्ष नेतृत्व के समक्ष पेश भी कर दिया बताया। लेकिन भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी और उनके मुसाहिबों को उसमें कमियां नजर आई। इन कमियों में राममंदिर सहित कुछ खास मुद्दे शामिल हैं। नतीजन चुनाव घोषणा पत्र दुबारा बनाया जा रहा है। यह चुनाव घोषणा पत्र अब आज 07 अप्रेल से पहिले जारी होना शायद नामुमकीन है।
यहां यह मुद्दा गम्भीरता से उठता है कि एक राष्ट्रीय पार्टी चुनावों में अपने दृष्टिकोण को जनता के सामने रखने के लिये चुनाव घोषणा पत्र का सहारा भी नहीं ले पा रही है। पार्टी में आपसी सिर फुटव्वल के चलते घोषणा पत्र ही जारी नहीं होने के पीछे कारण जो भी हों, जनता में यह संदेश गया है कि भारतीय जनता पार्टी के पास ऐसे कोई मुद्दे ही नहीं हैं जो जनकल्याण से जुड़े हों! वैसे भी आम चुनावों के पहिले चरण का मतदान 7 अप्रेल को होना है। ऐसे में घोषणा पत्र जारी करना या ना करना अब बेमानी हो गया है।


