मालपुरा/टौंक/जयपुर (अग्रगामी) ऑल इण्डिया फारवर्ड ब्लाक ने टौंक जिला कलक्टर को पत्र प्रेषित कर आगाह किया है कि जिले के मालपुरा उपखण्ड में कुछ भू-माफिया अनुसूचित जाति के गरीब काश्तकारों की जमीन औनेपौने दामों में हथिया कर ऊंची कीमतों में कुछ धन्ना सेठों को बेच रहे हैं और उनसे फिर धर्मिक स्थलों में दान करवा कर मोटी कमाई कर रहे हैं। यही नहीं कुछ प्रकरणों में तो भू-माफियाओं द्वारा आवासीय कॉलोनी काटने के लिये अनुसूचित जाति के परिवारों से एग्रीमेंट के जरिये कृषि भूमि पर कब्जा कर लिया गया है और भूमि का नामान्तरण और रूपान्तरण करवाने और आवासीय कॉलोनी काटने में अड़चने आने के कारण धार्मिक स्थलों को बेच कर मोटी कमाई कर रहे हैं।
फारवर्ड ब्लाक ने साफ किया है कि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जयपुर की एक ज्वेलरी कम्पनी से जुड़े समुदाय विशेष के लोगों और कोठारी परिवार के एक सदस्य ने मालपुरा उपखण्ड मुख्यालय पर स्थित श्री जैन श्वेताम्बर कुशलसूरी दादाबाडी के पास स्थित एक अनुसूचित जाति के परिवार की खातेदारी और कब्जे काश्त की जमीन को वहां कॉलोनी काटने के लिये एग्रीमेंट के आधार पर अपने कब्जे में ले लिया। लेकिन वैधानिक, प्रशासनिक और स्थानीय समस्याओं के चलते वे उस जमीन पर कॉलोनी काटने में सफल नहीं हो पाये और अब जयपुर के अपने रिश्तेदार और परिचितों के माध्यम से मालपुरा की श्री जैन श्वेताम्बर दादाबाडी का प्रबंधन देख रहे श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ को बेचने की जुगत बैठा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि भू-माफियाओं की बेनामी फर्म के चार पार्टनर बताये जाते हैं और जमीन के झमेले सामने आने के बाद एक पार्टनर ने इस साझा फर्म से तौबा कर ली और अपना हिस्सा वापस लेकर सारे झमेले से पिण्डा छुड़ा लिया।
सवाल यहां यह उठता है कि इन भू-माफियाओं ने किन कानूनों के तहत एक अनुसूचित जाति के काश्तकार से जमीन खरीदने का एग्रीमेंट किया? ये भू-माफिया वैधानिक रूप से आवासीय कॉलोनी काटने के लिये अधिकृत भी नहीं हैं और इन पर वैधानिक कार्यवाही भी सम्भव है! हकीकत से रूबरू होने के बाद इन भू-माफियाओं में से एक ने श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ जयपुर के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना जोकि उनके रिश्तेदार हैं, से सम्पर्क कर उन पर संस्था के नाम से इस जमीन को खरीदने का दबाव बनाया। नतीजन गति रविवार 20 अप्रेल, 2014 को सारे वैधानिक प्रावधानों की धज्जियां उडा कर जयपुर स्थित शिवजीराम भवन में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ की असाधारण सभा की बैठक एक सूत्रीय मालपुरा में वर्तमान परिसर के पास वाली जमीन खरीद के बाबत ऐजेण्डे पर बुलाई गई।
संघ विधान की धारा 10(ख) के तहत बुलाये गये इस साधारण सभा के असाधारण अधिवेशन को आहूत करने के मुद्दे पर खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता और संघ के आजीवन सदस्य हीराचंद जैन द्वारा गम्भीर वैधानिक आपत्ति उठाई गई जिसका संघ अध्यक्ष कुशलचंद सुराना के पास कोई जवाब नहीं था। साथी हीराचंद जैन ने जब संघ अध्यक्ष कुशलचंद सुराना और उनके सहयोगी वरिष्ठ उपाध्यक्ष विजय संचेती और उपाध्यक्ष नवरत्नमल श्रीश्रीमाल सहित अन्य सम्बन्धितों से सवाल किया कि जिस जमीन को खरीदने के लिये संघ साधारण सभा का असाधारण अधिवेशन बुलाया गया है वह जमीन आखीर मालपुरा दादाबाडी के पास है कहां? उसकी पासबुक, जमाबंदी (खेवट/खतौनी) की प्रतिलिपियां, नक्क्षे कहां है? जो जमीन खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारी कमलचंद कोठारी के माध्यम से खरीदना चाहते हैं उसका मालिक कौन है? जमीन का खसरा नम्बर क्या है? मालिक जमीन की कितनी कीमत मांग रहा है? जमीन मालिक बेच रहा है या फिर बिचौलिये! क्या अनुसूचित जाति के व्यक्ति द्वारा सवर्ण को जमीन बेची जा सकती है और क्या जमीन की रजिस्ट्री होने के तत्काल बाद सरकारी रेकार्ड में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के नाम भूमि नामान्तरण खुल जायेगा? इन सवालों का कोई भी जवाब संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विजय संचेती और उपाध्यक्ष नवरत्नमल श्रीश्रीमाल के पास नहीं था। संघ के अध्यक्ष, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित कार्यकारिणी के पदाधिकारियों और अधिकतर सदस्यों को अनुसूचित जाति के व्यक्ति की खरीदी जाने वाली जमीन के बारे में कोई जानकारी भी नहीं है और साधारण सभा के असाधारण अधिवेशन में भी जानकारी नहीं दी गई! जबकि जमीन से सम्बन्धित जानकारी रखने वाले बिचौलिये कमल कोठारी ने जरूर यह कहा कि मैं हीराचंद जी जैन भाई साहब से मिल कर बात करूंगा!
ज्ञातव्य रहे कि लगभग साढे चार साल पहिले श्रीमती जतनकंवर जी से इस्तीफा लेकर उन के स्थान पर अध्यक्ष बने कुशलचंद सुराना को संघ की साधारण सभा की नाराजगी के चलते अपनी कार्यकारिणी के साथ इस्तीफा देना पड़ा था और इस्तीफे के बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा और इस बार सहवरण के रास्ते ऊपर से टपक कर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष बन बैठे। इनके अध्यक्ष बनते ही श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ में घोटालों की बारात निकलना शुरू हो गया है। हम इस मामले में विस्तृत तथ्यों के साथ अगले अंकों में प्रस्तुत होंगे।
फारवर्ड ब्लाक ने साफ किया है कि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जयपुर की एक ज्वेलरी कम्पनी से जुड़े समुदाय विशेष के लोगों और कोठारी परिवार के एक सदस्य ने मालपुरा उपखण्ड मुख्यालय पर स्थित श्री जैन श्वेताम्बर कुशलसूरी दादाबाडी के पास स्थित एक अनुसूचित जाति के परिवार की खातेदारी और कब्जे काश्त की जमीन को वहां कॉलोनी काटने के लिये एग्रीमेंट के आधार पर अपने कब्जे में ले लिया। लेकिन वैधानिक, प्रशासनिक और स्थानीय समस्याओं के चलते वे उस जमीन पर कॉलोनी काटने में सफल नहीं हो पाये और अब जयपुर के अपने रिश्तेदार और परिचितों के माध्यम से मालपुरा की श्री जैन श्वेताम्बर दादाबाडी का प्रबंधन देख रहे श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ को बेचने की जुगत बैठा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि भू-माफियाओं की बेनामी फर्म के चार पार्टनर बताये जाते हैं और जमीन के झमेले सामने आने के बाद एक पार्टनर ने इस साझा फर्म से तौबा कर ली और अपना हिस्सा वापस लेकर सारे झमेले से पिण्डा छुड़ा लिया।
सवाल यहां यह उठता है कि इन भू-माफियाओं ने किन कानूनों के तहत एक अनुसूचित जाति के काश्तकार से जमीन खरीदने का एग्रीमेंट किया? ये भू-माफिया वैधानिक रूप से आवासीय कॉलोनी काटने के लिये अधिकृत भी नहीं हैं और इन पर वैधानिक कार्यवाही भी सम्भव है! हकीकत से रूबरू होने के बाद इन भू-माफियाओं में से एक ने श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ जयपुर के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना जोकि उनके रिश्तेदार हैं, से सम्पर्क कर उन पर संस्था के नाम से इस जमीन को खरीदने का दबाव बनाया। नतीजन गति रविवार 20 अप्रेल, 2014 को सारे वैधानिक प्रावधानों की धज्जियां उडा कर जयपुर स्थित शिवजीराम भवन में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ की असाधारण सभा की बैठक एक सूत्रीय मालपुरा में वर्तमान परिसर के पास वाली जमीन खरीद के बाबत ऐजेण्डे पर बुलाई गई।
संघ विधान की धारा 10(ख) के तहत बुलाये गये इस साधारण सभा के असाधारण अधिवेशन को आहूत करने के मुद्दे पर खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता और संघ के आजीवन सदस्य हीराचंद जैन द्वारा गम्भीर वैधानिक आपत्ति उठाई गई जिसका संघ अध्यक्ष कुशलचंद सुराना के पास कोई जवाब नहीं था। साथी हीराचंद जैन ने जब संघ अध्यक्ष कुशलचंद सुराना और उनके सहयोगी वरिष्ठ उपाध्यक्ष विजय संचेती और उपाध्यक्ष नवरत्नमल श्रीश्रीमाल सहित अन्य सम्बन्धितों से सवाल किया कि जिस जमीन को खरीदने के लिये संघ साधारण सभा का असाधारण अधिवेशन बुलाया गया है वह जमीन आखीर मालपुरा दादाबाडी के पास है कहां? उसकी पासबुक, जमाबंदी (खेवट/खतौनी) की प्रतिलिपियां, नक्क्षे कहां है? जो जमीन खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारी कमलचंद कोठारी के माध्यम से खरीदना चाहते हैं उसका मालिक कौन है? जमीन का खसरा नम्बर क्या है? मालिक जमीन की कितनी कीमत मांग रहा है? जमीन मालिक बेच रहा है या फिर बिचौलिये! क्या अनुसूचित जाति के व्यक्ति द्वारा सवर्ण को जमीन बेची जा सकती है और क्या जमीन की रजिस्ट्री होने के तत्काल बाद सरकारी रेकार्ड में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के नाम भूमि नामान्तरण खुल जायेगा? इन सवालों का कोई भी जवाब संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विजय संचेती और उपाध्यक्ष नवरत्नमल श्रीश्रीमाल के पास नहीं था। संघ के अध्यक्ष, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित कार्यकारिणी के पदाधिकारियों और अधिकतर सदस्यों को अनुसूचित जाति के व्यक्ति की खरीदी जाने वाली जमीन के बारे में कोई जानकारी भी नहीं है और साधारण सभा के असाधारण अधिवेशन में भी जानकारी नहीं दी गई! जबकि जमीन से सम्बन्धित जानकारी रखने वाले बिचौलिये कमल कोठारी ने जरूर यह कहा कि मैं हीराचंद जी जैन भाई साहब से मिल कर बात करूंगा!
ज्ञातव्य रहे कि लगभग साढे चार साल पहिले श्रीमती जतनकंवर जी से इस्तीफा लेकर उन के स्थान पर अध्यक्ष बने कुशलचंद सुराना को संघ की साधारण सभा की नाराजगी के चलते अपनी कार्यकारिणी के साथ इस्तीफा देना पड़ा था और इस्तीफे के बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा और इस बार सहवरण के रास्ते ऊपर से टपक कर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष बन बैठे। इनके अध्यक्ष बनते ही श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ में घोटालों की बारात निकलना शुरू हो गया है। हम इस मामले में विस्तृत तथ्यों के साथ अगले अंकों में प्रस्तुत होंगे।


