अग्रगामी संदेश हिन्‍दी साप्ताहिक ***** प्रत्येक सोमवार को प्रकाशित एवं प्रसारित ***** सटीक राजनैतिक विश्लेषण, लोकहित के समाचार, जनसंघर्ष का प्रहरी

क्या राजस्थान सरकार सन्नीपात में जकड़ी-अकड़ी पड़ी है!

प्रदेश में लोकसभा चुनाव-2014 के लिये दूसरे चरण में वोट 24 अप्रेल, 2014 को ईवीएम मशीनों में बंद हो कर मतगणना केंद्रों पर सील बंद हो कर कडी सुरक्षा में कैद हो गये हैं।
मिशन-25 में जुटे राज्य मंत्रिमण्डल के सदस्य और उसके आधीन सरकारी अमला पिछले चार दिनों में चुनावी थकान और खुमारी उतारने में जुटा रहा। यह कॉलम लिखने तक भी सरकार और उसका अमला लगता है शायद आराम फरमाने में ही जुटा हुआ है!
पिछले चार महिनों में प्रदेश में कानून और व्यवस्था की हालत बद् से बद्तर हो गई है और अब ऐसा लगने लगा है कि कानून और व्यवस्था से जुड़े हालात सरकारी नियन्त्रण से बाहर होते जा रहे हैं। प्रदेश में पिछले चार महिनों में महिलाओं पर अत्याचार और सामुहिक बलात्कारों की घटनाओं में भी इजाफा हो रहा है।
उधर सरकारी नियन्त्रण नहीं होने के कारण जमाखोरों, कालाबाजारियों, मुनाफाखोरों की पो-बारह-पच्चीस हो गई है। मुनाफाखोर माफिया बारी-बारी से उपभोक्ता जिंसों की जमाखोरी कर मंहगे-ऊंचे दामों में बेच रहे हैं। पिछले चार महिनों के भाजपा  के राज में राजधानी जयपुर में चीनी तीस रूपये से चालीस रूपये पहुंच गई। दालों में प्रतिकिलो पांच रूपये तक बढोतरी हो चुकी है। नई फसल आने के बावजूद गेहूं सस्ता होने की जगह मंहगा होता जा रहा है। चांवल भी अपनी गर्दन ऊंचाई की तरफ ले जा रहा है। आलू-प्याज की प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर किसी भी तरह की कोई कमी नहीं है, फिर भी दाम आसमान की तरफ जाते नजर आ रहे हैं! मंहगाई से त्रस्त अवाम राजस्थान की भाजपा सरकार से अब पूछने लगा है कि मंहगाई, जमाखोरी, कालाबाजारी, मुनाफाखोरी क्या नरेन्द्र मोदी के गुजरात मॉडल का हिस्सा हैं?
हम आप को याद दिला दें कि देश में आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू है। श्रीमती वसुन्धरा राजे ने चुनावों के बाद आवश्यक वस्तु अधिनियम को दरकिनार कर मंहगाई को नियन्त्रित करने के लिये विधानसभा के पहिले सत्र में ही ताबड़तोड़ एक कानून पास करवाया! देखने में तो यह कानून जनउपयोगी है, लेकिन इस कानून और पूर्व में स्थापित अवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों के तहत पिछले चार महिनों में भाजपा की वसुन्धरा राजे सरकार और उनके सरकारी अमले ने एक भी जमाखोर, कालाबाजारिये, मुनाफाखोर के खिलाफ कार्यवाही नहीं की। बल्कि इन कानूनों का डर दिखा कर चुनावी चंदा इकठ्ठा करने की जोरदार चर्चा अवाम में है।
जयपुर नगर निगम क्षेत्र चार दिवारी इलाके में गैरकानूनी अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के निर्माण की जोरदार मुहिम चल रही है। कॉमर्शियल काम्प्लेक्स बनाये जाकर ऊंचे दामों में बेचे भी जा रहे हैं। करोड़ों का कालाधन अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के निर्माण और बेचान में उपयोग लिया जा रहा है। लेकिन राज्य के नगरीय विकास विभाग, स्वायत्त शासन विभाग और जयपुर नगर निगम में बैठे भ्रष्ट, रिश्वतखोर और बेईमान अफसर भू-माफियाओं और बिल्डर माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही ही नहीं करना चाहते हैं। राज्य के लोकायुक्त महोदय ने अवैध निर्माणों की विस्तृत जानकारी मांगी तो जयपुर नगर निगम के अफसर लोकायुक्त महोदय को भी जानकारी देने से कतरा रहे हैं। तीन महिनों से नगर निगम की टालमटोल की नौटंकी से नाराज लोकायुक्त महोदय ने अब उन्हें साप्ताहिक रिपोर्ट प्रति सप्ताह सोमवार को लोकायुक्त कार्यालय में पेश करने के आदेश दिये हैं। लेकिन नगर निगम के अफसर मामले को दबाने की कोशिश में लगे हैं। भू-माफियाओं और बिल्डर माफियाओं के दबाव के चलते जयपुर नगर निगम के जोन आयुक्तों से लेकर सीईओ तक अवैध निर्माणों की जानकारी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित एम्पावर्ड कमेटी को भी नहीं दे रहे हैं और मोटी चांदी कूट रहे हैं।
बिल्डर माफिया, भू-माफिया हो या फिर जमाखोर, कालाबाजारिये हों या फिर मुनाफाखोर हों, भारतीय जनता पार्टी की वसुन्धरा राजे सरकार के नाकारापन के चलते इन सभी के हौंसले बुलंद हैं और अपने रौब के आगे आम अवाम को मक्खी-मच्छर से ज्यादा कुछ भी नहीं समझते हैं।
दु:खद स्थिति यह भी है कि अपने आप को किसानों-मजदूरों और अवाम की पार्टी कहलाने वाले वाम जनवादी दल भी अपनी अवामपरस्त नीतियों और कार्यक्रमों को पीछे छोड़ कर बाबुओं की भूमिका में आ गये हैं और दफ्तर में बैठकर फैक्स, ई-मेल के जरिये प्रेसनोट जारी कर अपने काम को इतिश्री अर्थात विराम दे देते हैं।
अवाम को ऐहसास होने लगा है कि शायद राज्य में दो तिहाई से ज्यादा बहुमत से भाजपा की सरकार बन जाने से अन्य राजनैतिक पार्टियों के नेताओं का मनोबल टूट गया है और अब अगर ये दल सही ढंग से अवाम को नेतृत्व देने में असफल रहते हैं तो स्वंय अवाम को अपने हितों की हिफाजत के लिये संघर्ष के पथ पर आगे बढऩा ही होगा।

 
AGRAGAMI SANDESH

AGRAGAMI SANDESH
AGEAGAMI SANDESH

मुख्‍य पृष्‍ठ | जयपुर संस्‍करण | राज्‍य समाचार | देश समाचार | विज्ञापन दर | सम्‍पर्क