अजमेर/जयपुर (अग्रगामी) जयपुर के मोहबाडी (मौनबाडी) क्षेत्र में मंदिर निर्माण हेतु मारबल खरीद की आड़ में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ को करोड़ों रूपये का चूना लगाने की बैठाई जा रही जुगत का लगभग झांडा फूट गया है। शर्मनाक स्थिति यह है कि मारबल की एक चौकी भी श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के गोदम में नहीं पहुंची है और मोटी रकम मारबल सप्लायर/खान के मालिक/बिचौलिये को भुगतान कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार इस सारे प्रकरण में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना, किशनचंद डागा, सुनील महमवाल और इकबाल का नाम उजागर होता जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि इकबाल ने सुनील महमवाल, किशनचंद डागा के साथ कुशलचंद सुराना ने जयपुर की मोहबाडी में बिना सरकारी इजाजत के खरतरगच्छ संघ की आड़ में अवैध रूप से बनाये जा रहे मंदिर निर्माण हेतु मारबल सप्लाई का कांट्रेक्ट किया। इस कांट्रेक्ट के पेटे एक फर्म के नाम से श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ से मंदिर खाते से मोटी रकम का चैक दिया गया है। खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता और संघ के आजीवन सदस्य हीराचंद जैन को सूत्रों से मिली विश्वस्त जानकारी से पता चलता है कि जिस माइन्स के मार्बल का उपयोग मौनबाडी मंदिर निर्माण में काम में लिया जाना है उस मार्बल माइन्स के बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं है। मार्बल माइन्स का मालिक कौन है, माइन्स का वास्तविक लोकेशन क्या है? और उसके लोकेशन का पूरा पता क्या है? खरतरगच्छ संघ के किसी भी पदाधिकारी को इसकी जानकारी नहीं है!
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन से बातचीत में किशनचंद डागा ने बताया कि उन्होंने एक बार माइन्स को देखा है। अब खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारियों की एक टीम माइन्स को जाकर देखेगी और हकीकत से रूबरू होगी! जब उनसे सवाल किया गया कि जब मारबल माइन्स को संघ की ओर से किसी विशेषज्ञ ने नहीं देखा और सारी ग्राउण्ड रियलिटीज को नहीं समझा गया तब क्यों मोटी रकम का तथाकथित खान मालिक/बिचौलिये को भुगतान किया गया? जब की आज तक एक चौका भी उन्होंने सप्लाई नहीं किया है! इस पर किशनचंद डागा ने कहा कि माल के लिये एडवांस तो देना ही होगा! वे इस सवाल का जवाब नहीं दे पाये कि मारबल की क्वालिटी और मंदिर में उसकी उपयोगिता को क्या परख लिया गया है? इस पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और सवाल को दबा गये। हमारी इस मामले में सुनील महमवाल से भी बात हुई। लेकिन वे पल्ला झाड़ते नजर आये!
मारबल व्यवसाय से जुड़े मकराना के कुछ बड़े व्यवसाइयों से जब साथी हीराचंद जैन ने इस डील के बारे में बातचीत की तो वे भौचक्के रह गये और क्षेत्र में बीलएफ के पूर्व संयोजक हीराचंद जैन की पुन: सक्रियता से उनमें बेचैनी नजर आने लगी। ज्ञातव्य रहे कि खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन फारवर्ड ब्लाक के राजस्थान स्टेट जनरल सेक्रेटरी होने के साथ-साथ बंधुआ मुक्ति मोर्चा (बांडेड लिब्रेशन फ्रंट) के राज्य संयोजक रहे हैं और प्रदेश की माइन्स और ईंट भट्टों से लगभग छह हजार बंधुआ मजदूरों को मुक्त करा कर बाड़मेर जिले के मेवा नगर, बालोतरा, जसौल, जानियाना और बाड़मेर मुख्यालय पर बाड़मेर आगोर सहित प्रदेश के 16 जिलों में बसाने के एक मेघा अभियान को अंजाम दे चुके हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें भारी तादाद में राज्य की पत्थर खदानों के बारे में गहरी जानकारी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र की पत्थर खदानों, मारबल खदानों का पुन: ग्राउण्ड सर्वे कर वहां बंधुआ मुक्ति अभियान को तेज किया जायेगा। वहीं खरतरगच्छ जन चेतना मंच के कार्यकर्ता इस पूरे प्रकरण पर सतर्क नजर रख रहे हैं और उचित समय पर सक्षम कार्यवाही करने की तैयारी में जुटे हैं।
सूत्र बताते हैं कि इकबाल ने सुनील महमवाल, किशनचंद डागा के साथ कुशलचंद सुराना ने जयपुर की मोहबाडी में बिना सरकारी इजाजत के खरतरगच्छ संघ की आड़ में अवैध रूप से बनाये जा रहे मंदिर निर्माण हेतु मारबल सप्लाई का कांट्रेक्ट किया। इस कांट्रेक्ट के पेटे एक फर्म के नाम से श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ से मंदिर खाते से मोटी रकम का चैक दिया गया है। खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता और संघ के आजीवन सदस्य हीराचंद जैन को सूत्रों से मिली विश्वस्त जानकारी से पता चलता है कि जिस माइन्स के मार्बल का उपयोग मौनबाडी मंदिर निर्माण में काम में लिया जाना है उस मार्बल माइन्स के बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं है। मार्बल माइन्स का मालिक कौन है, माइन्स का वास्तविक लोकेशन क्या है? और उसके लोकेशन का पूरा पता क्या है? खरतरगच्छ संघ के किसी भी पदाधिकारी को इसकी जानकारी नहीं है!
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन से बातचीत में किशनचंद डागा ने बताया कि उन्होंने एक बार माइन्स को देखा है। अब खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारियों की एक टीम माइन्स को जाकर देखेगी और हकीकत से रूबरू होगी! जब उनसे सवाल किया गया कि जब मारबल माइन्स को संघ की ओर से किसी विशेषज्ञ ने नहीं देखा और सारी ग्राउण्ड रियलिटीज को नहीं समझा गया तब क्यों मोटी रकम का तथाकथित खान मालिक/बिचौलिये को भुगतान किया गया? जब की आज तक एक चौका भी उन्होंने सप्लाई नहीं किया है! इस पर किशनचंद डागा ने कहा कि माल के लिये एडवांस तो देना ही होगा! वे इस सवाल का जवाब नहीं दे पाये कि मारबल की क्वालिटी और मंदिर में उसकी उपयोगिता को क्या परख लिया गया है? इस पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और सवाल को दबा गये। हमारी इस मामले में सुनील महमवाल से भी बात हुई। लेकिन वे पल्ला झाड़ते नजर आये!
मारबल व्यवसाय से जुड़े मकराना के कुछ बड़े व्यवसाइयों से जब साथी हीराचंद जैन ने इस डील के बारे में बातचीत की तो वे भौचक्के रह गये और क्षेत्र में बीलएफ के पूर्व संयोजक हीराचंद जैन की पुन: सक्रियता से उनमें बेचैनी नजर आने लगी। ज्ञातव्य रहे कि खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन फारवर्ड ब्लाक के राजस्थान स्टेट जनरल सेक्रेटरी होने के साथ-साथ बंधुआ मुक्ति मोर्चा (बांडेड लिब्रेशन फ्रंट) के राज्य संयोजक रहे हैं और प्रदेश की माइन्स और ईंट भट्टों से लगभग छह हजार बंधुआ मजदूरों को मुक्त करा कर बाड़मेर जिले के मेवा नगर, बालोतरा, जसौल, जानियाना और बाड़मेर मुख्यालय पर बाड़मेर आगोर सहित प्रदेश के 16 जिलों में बसाने के एक मेघा अभियान को अंजाम दे चुके हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें भारी तादाद में राज्य की पत्थर खदानों के बारे में गहरी जानकारी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र की पत्थर खदानों, मारबल खदानों का पुन: ग्राउण्ड सर्वे कर वहां बंधुआ मुक्ति अभियान को तेज किया जायेगा। वहीं खरतरगच्छ जन चेतना मंच के कार्यकर्ता इस पूरे प्रकरण पर सतर्क नजर रख रहे हैं और उचित समय पर सक्षम कार्यवाही करने की तैयारी में जुटे हैं।


