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मोदी सरकार अल्पसंख्यकों के हितों के लिये नुकसानदेह होगी!

अमरीका और भारत के वरिष्ठ राजनयिकों, विशेषज्ञों , अमरीकी सांसदों और उनके प्रमुख अधिकारियों का मानना है कि भारत में भाजपानीत नरेन्द्र मोदी सरकार सभी अल्पसंख्याकों के बुनियादी हितों के लिये नुकसानदेह होगी।
'भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की खराब हालतÓ पर अमेरिकी संसद के टॉम लैंटोस ह्युमन राइट्स कमीशन के समक्ष अपनी बातें रखते हुए अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) की उपाध्यक्ष कैटरीना लैंटोस ने कहा है कि उनका आयोग भारत के हालात पर नजदीक से निगाह रख रहा है।
कैटरीना ने कहा कि भारी तादाद में अल्पसंख्यक समुदायों ने यूएससीआईआरएफ को बताया है कि उन्हें डर है कि भाजपा की जीत और देश के प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी का चुनाव उनके लिए और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता के लिए नुकसानदेह होगा।
उन्होंने कहा कि ''2002 और 2004 के बीच यूएससीआईआरएफ ने सिफारिश की थी कि सरकार की ओर से धार्मिक स्वतंत्रता के व्यवस्थित, जारी और स्तब्धकारी उल्लंघन के लिए अमेरिकी विदेश मंत्रालय भारत को 'किसी खास चिंता वाला देशÓ (कंट्री ऑफ पर्टिक्यूलर कंसर्न) नामित करे।ÓÓ
अगर इस रिपोर्ट को सही माना जाये तो भारत गणतंत्र के लिये यह गम्भीर मामला है और भारत को पाकिस्तान-अफगानिस्तान पैटर्न पर धकेलने की एक सोची समझी साजिश का एक हिस्सा हो सकता है।
हम याद दिलादें कि आज नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के अग्रिम संगठन भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनवाने के लिये अंबानी-अडानी ग्रुपों की अगुआई में गुजरात के बड़े-बड़े उद्योगपतियों ने अपने खजाने की थैलियों के मुंह खोल रखे हैं। ज्ञातव्य रहे कि यह वहीं अंबानी ग्रुप है जिस पर आरोप लगा था कि उसने ईरान की सद्दाम हुसैन सरकार को अपदस्त करने में अमरीका का साथ दिया था और नतीजन आज भी ईराक अस्थिर राजनैतिक माहौल में अमरीका का गुलाम बना हुआ है। मुकेश अंबानी से मिल रहे आर्थिक सहयोग के चलते मोदी ने अंबानी ग्रुप के दामादा सौरभ पटेल को मोदी ने ऊर्जा, पैट्रो रसायन और योजना विभाग का स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया है। सौरभ पटेल ने चुनाव आयोग को लिखे अपने पत्र में मुकेश अंबानी से उनकी रिश्तेदारी को स्वीकार किया है।
आज मुकेश अंबानी, अंबानी ग्रुप-अडानी ग्रुप सहित गुजरात के बड़े उद्योगपतियों के सहयोग से नरेन्द्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री बना कर देश की सत्ता परोक्ष रूप में अपने हाथ में लेने के प्रयास में जी जान से जुटे हैं। उधर नरेन्द्र मोदी के जरिये अंबानी-अडानी ग्रुप और अन्य पूंजीपतियों से प्राप्त आर्थिक सहयोग के बूते पर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ देश को नास्तीवादी-सामन्तवादी हिन्दू राष्ट्र बनाने पर तुला है। विश्व हिन्दू परिषद् के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल ने पिछले दिनों साफ-साफ कहा था कि अगर नरेन्द्र मोदी सत्ता में आते हैं तो अल्पसंख्यक मुद्दे पर गम्भीरता से निर्णय लिया जायेगा।
ऐसी स्थिति में साफ नजर आने लगा है कि देश के अल्पसंख्यक समुदाय जैन, बौद्ध, सिक्ख, पारसी, ईसाई और मुसलमानों के अस्तित्व पर संकट के बादल मण्डरा रहे हैं और अल्पसंख्यकों को अपने अस्तित्व की लड़ाई के लिये अभी से एकजुट होना पड़ेगा। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के पदाधिकारी भय्याजी जोशी, भाजपा के मुरलीमनोहर जोशी  सहित आरएसएस का टापब्रास जैन समुदाय के कथित हिन्दुत्वता के पक्षधर साधु-सान्यासियों पर दबाव बना रहा है कि वे हिन्दुत्व की छाया में आ जायें। अपने आप को हिन्दुत्ववादी आरोपित करने वाले पिछले कुछ अर्से से जैन समुदाय के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। कारण साफ है कि समग्र जैन समाज के आराधना स्थलों खास कर गुजरात के गिरीनार, पालीताना सहित 250 से ज्यादा स्मृद्ध पूजा स्थलों पर विभिन्न सरकारी विभागों और मशीनरियों के जरिये कब्जा कर उन्हें हिन्दू पर्यटन स्थलों में परिवर्तित कर दिया जाये!
ऐसे वक्त में अमरीकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) द्वारा अमरीकी विदेश विभाग को यह सलाह देना कि भारत को पर्टिक्यूलर कंसर्न देश घोषित किया जाये, साफ-साफ उजागर करता ह कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ, भाजपा और नरेन्द्र मोदी को मोहरा बना कर देश को नास्तीवादी, सामन्तवादी, हिन्दुत्ववादी हिन्दू राष्ट्र बनाने की जुगत बैठा रहा है।
अडानी ग्रुप सहित गुजरात के बड़े उद्योगपतियों को यह उम्मीद भी है कि ईराक युद्ध में कथित रूप से सहयोग के बदले अंबानी ग्रुप पर अमरीका मेहरबान है, ऐसी स्थिति में बड़े उद्योगपतियों को अमरीका से काफी उम्मीदे हैं। यही हाल राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का है। वह भी नरेन्द्र मोदी, भाजपा की आड में अमरीका की अंबानी ग्रुप के जरिये मदद लेकर भारत को हिन्दू राष्ट्र में तब्दील करने की जुगत बैठा रहा है। जो हालात बन रहे हैं वह देश को विघटन की ओर ले जा रहे हैं और अमरीका भी अंदरूनी तौर पर भारत का विघटन चाहता है!

 
AGRAGAMI SANDESH

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