जयपुर (अग्रगामी) करौली में वसुन्धरा राजे द्वारा जिस तरह की तीखी भाषा का प्रयोग किया उससे पूरे उत्तर भारत में बवाल खड़ा हो गया है। उधर भाजपा से प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी के करीबी अमित शाह द्वारा उत्तरप्रदेश सरकार को गिराने और बदले की कार्यवाही करने के जो बोल बोले गये उससे भी देश में हंगामा बरपा है।
भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस सहित कुछ दलों के नेता देश के अवाम के हितों से जुडे मुद्दों को दरकिनार कर जिस तरह से एक दूसरे की छीछालेदर करने पर तुले हैं, उससे नहीं लगता है कि देश के सर्वोच्च निकाय के एक अंग लोकसभा के लिये चुनाव हो रहे हैं। अवाम को अहसास होने लगा है कि सत्ता के भूखे भेडियों द्वारा उसे दरकिनार किया जा रहा है।
अपने चुनावी विज्ञापनों में राजनैतिक पार्टियां भ्रष्टाचार, मंहगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों का जिक्र तो करती है। लेकिन एक भी राजनैतिक पार्टी मंहगाई, भ्रष्टाचार बेरोजगारी, जमाखोरी, कालाबाजारी, मुनाफाखोरी, महिलाओं, बच्चों, आदिवासियों पर अत्याचार के मुद्दे पर अपनी कोई ठोस योजना अवाम के सामने पेश ही नहीं कर रही है।
राजस्थान को ही लें! नरेन्द्र मोदी की सरकार बनाने का विज्ञापन तो टीवी चैनलों पर चल रहा है, लेकिन राजस्थान में दो तिहाई बहुमत से चुनी गई भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार अस्तित्व में आने के तीन महिनों बाद भी जमाखोरों, कालाबाजारियों, मुनाफाखोरों पर कार्यवाही करने से कन्नी काट रही है। वसुन्धरा राजे सरकार पर आरोप लगते रहे हैं कि भाजपा को चुनावी चंदे के फेर में मुनाफाखोरों, जमाखोरों, कालाबाजारियों पर कार्यवाही नहीं की जा रही है।
पिछले दिनों जयपुर के नामचीन होटल में एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में राजे ने जो कुछ कहा वह मुख्यमंत्री पद पर आसीन व्यक्ति को नहीं कहना चाहिये था। उत्तर प्रदेश के एक कांग्रेसी उम्मीदवार इमरान मसूद ने नरेन्द्र मोदी के लिये जिस तरह असंसदीय भाषा का प्रयोग किया वह निंदनीय है। नेताजी उसके लिये जेल की हवा भी खा कर आ गये। लेकिन उनकी आड़ लेकर राज्य की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने जो कुछ कहा वह भी तो निंदनीय है। क्या उनकी गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिये? यह प्रश्र अभी तक निरूत्तरित ही है।
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के अग्रिम संगठन भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात के अंबानी ग्रुप, अडानी ग्रुप सहित बड़े उद्योगपतियों के सहयोग से नरेन्द्र मोदी को देश के भावी प्रधानमंत्री की पीएम इन वेटिंग की लिस्ट में डाल रखा है! गुजराती उद्योगपतियों अडानी-अंबानी ग्रुप के साथ-साथ टाटा ग्रुप और अन्य बड़े गुजराती उद्योगपतियों द्वारा नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद पर बैठाने के लिये जिस तरह ऐडी-चोटी का जोर लगाया जा रहा है, उससे पूंजीपतियों के काकस की कलई अवाम के सामने खुल गई है। लेकिन अवाम बेबस है। परन्तु उसका अर्थ यह भी नहीं है कि अवाम चोट नहीं कर सकता है। अवाम अपने हकों के लिये वक्त आने पर अपनी ताकत भी दिखा सकता है, यह पूंजीपतियों, उद्योगपतियों को समझ लेना चहिये।
भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस सहित कुछ दलों के नेता देश के अवाम के हितों से जुडे मुद्दों को दरकिनार कर जिस तरह से एक दूसरे की छीछालेदर करने पर तुले हैं, उससे नहीं लगता है कि देश के सर्वोच्च निकाय के एक अंग लोकसभा के लिये चुनाव हो रहे हैं। अवाम को अहसास होने लगा है कि सत्ता के भूखे भेडियों द्वारा उसे दरकिनार किया जा रहा है।
अपने चुनावी विज्ञापनों में राजनैतिक पार्टियां भ्रष्टाचार, मंहगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों का जिक्र तो करती है। लेकिन एक भी राजनैतिक पार्टी मंहगाई, भ्रष्टाचार बेरोजगारी, जमाखोरी, कालाबाजारी, मुनाफाखोरी, महिलाओं, बच्चों, आदिवासियों पर अत्याचार के मुद्दे पर अपनी कोई ठोस योजना अवाम के सामने पेश ही नहीं कर रही है।
राजस्थान को ही लें! नरेन्द्र मोदी की सरकार बनाने का विज्ञापन तो टीवी चैनलों पर चल रहा है, लेकिन राजस्थान में दो तिहाई बहुमत से चुनी गई भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार अस्तित्व में आने के तीन महिनों बाद भी जमाखोरों, कालाबाजारियों, मुनाफाखोरों पर कार्यवाही करने से कन्नी काट रही है। वसुन्धरा राजे सरकार पर आरोप लगते रहे हैं कि भाजपा को चुनावी चंदे के फेर में मुनाफाखोरों, जमाखोरों, कालाबाजारियों पर कार्यवाही नहीं की जा रही है।
पिछले दिनों जयपुर के नामचीन होटल में एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में राजे ने जो कुछ कहा वह मुख्यमंत्री पद पर आसीन व्यक्ति को नहीं कहना चाहिये था। उत्तर प्रदेश के एक कांग्रेसी उम्मीदवार इमरान मसूद ने नरेन्द्र मोदी के लिये जिस तरह असंसदीय भाषा का प्रयोग किया वह निंदनीय है। नेताजी उसके लिये जेल की हवा भी खा कर आ गये। लेकिन उनकी आड़ लेकर राज्य की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने जो कुछ कहा वह भी तो निंदनीय है। क्या उनकी गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिये? यह प्रश्र अभी तक निरूत्तरित ही है।
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के अग्रिम संगठन भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात के अंबानी ग्रुप, अडानी ग्रुप सहित बड़े उद्योगपतियों के सहयोग से नरेन्द्र मोदी को देश के भावी प्रधानमंत्री की पीएम इन वेटिंग की लिस्ट में डाल रखा है! गुजराती उद्योगपतियों अडानी-अंबानी ग्रुप के साथ-साथ टाटा ग्रुप और अन्य बड़े गुजराती उद्योगपतियों द्वारा नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद पर बैठाने के लिये जिस तरह ऐडी-चोटी का जोर लगाया जा रहा है, उससे पूंजीपतियों के काकस की कलई अवाम के सामने खुल गई है। लेकिन अवाम बेबस है। परन्तु उसका अर्थ यह भी नहीं है कि अवाम चोट नहीं कर सकता है। अवाम अपने हकों के लिये वक्त आने पर अपनी ताकत भी दिखा सकता है, यह पूंजीपतियों, उद्योगपतियों को समझ लेना चहिये।


