नई दिल्ली/अहमदाबाद/जयपुर (अग्रगामी) अगर ले देकर देश में भाजपानीत नरेन्द्र मोदी की सरकार बनती है तो केंद्रीय मंत्रीमण्डल में सौरभ पटेल दलाल केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री बन सकते हैं। सौरभ पटेल वर्तमान में गुजरात में नरेन्द्र मोदी मंत्रीमण्डल में पेट्रोलियम, पेट्रोरसायन, ऊर्जा तथा उद्योग विभाग के स्वतंत्र प्रभार मंत्री हैं। सौरभ पटेल का गुजरात की मोदी सरकार में राज्यमंत्री के रूप में भारी प्रभाव है। ज्ञातव्य रहे कि पटेल को खान, खनिज, लद्यु उद्योग व नमक उद्योग का भी स्वतंत्र प्रभार दिया गया है।
आखीर नरेन्द्र मोदी सौरभ पटेल पर इतने मेहरबान क्यों हैं? इसका भी एक गहरा राज है! सौरभ पटेल दरअसल धीरूभाई अंबानी के बड़े भाई रमणीक अंबानी के दामाद हैं। खुद सौरभ पटेल ने चुनाव आयोग को लिखे अपने पत्र में यह खुलासा किया था। बकौल सौरभ पटेल धीरूभाई अंबानी के बडे भाई रमणीक भाई अंबानी की पुत्री से उनकी शादी लगभग 25 साल पहिले हुई थी। खैर! शादी पच्चीस साल पहिले हुई है, ये फैक्टर मायने नहीं रखता है। क्योंकि कुल मिला कर वे अंबानी परिवार के दामाद तो हैं ही।
जो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है, वह यह है कि अगर केंद्र में नरेन्द्र मोदी सत्ता पर काबिज होते हैं तो सौरभ पटेल को वे केंद्रीय मंत्री बना कर पेट्रोलियम मंत्रालय या फिर वित्त मंत्रालय में महत्वपूर्ण जुम्मेदारी सौंप सकते हैं। नरेन्द्र मोदी को उम्मीद है कि वे वाराणसी और बडोदरा दोनों ही लोकसभा सीटों से जीतेंगे। ऐसी स्थिति में वे बडोदरा सीट को छोड़ेगें और सौरभ पटेल को बडोदरा से चुनाव लड़वाकर केंद्र में लायेंगे।
लेकिन अरविंद केजरीवाल के खुलासे के बाद मुकेश अंबानी और उनके अंबानी ग्रुप और अडानी ग्रुप में खलबली मच गई है। हर स्तर पर दामाद सौरभ पटेल फैक्टर को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद पर बैठाने के लिये अंबानी-अडानी ग्रुपों द्वारा किये जा रहे ऐडी-चोटी के प्रयासों की कलई खुल जाने से देश के राजनैतिक वातावरण में भी तूफान आ गया है। अमित शाह और वसुन्धरा राजे के बड़बोलेपन ने भी आग में घी डालने जैसा काम किया है। अब ऊंठ किसा करवट बैठेगा, यह तो वक्त ही बतलायेगा।
आखीर नरेन्द्र मोदी सौरभ पटेल पर इतने मेहरबान क्यों हैं? इसका भी एक गहरा राज है! सौरभ पटेल दरअसल धीरूभाई अंबानी के बड़े भाई रमणीक अंबानी के दामाद हैं। खुद सौरभ पटेल ने चुनाव आयोग को लिखे अपने पत्र में यह खुलासा किया था। बकौल सौरभ पटेल धीरूभाई अंबानी के बडे भाई रमणीक भाई अंबानी की पुत्री से उनकी शादी लगभग 25 साल पहिले हुई थी। खैर! शादी पच्चीस साल पहिले हुई है, ये फैक्टर मायने नहीं रखता है। क्योंकि कुल मिला कर वे अंबानी परिवार के दामाद तो हैं ही।
जो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है, वह यह है कि अगर केंद्र में नरेन्द्र मोदी सत्ता पर काबिज होते हैं तो सौरभ पटेल को वे केंद्रीय मंत्री बना कर पेट्रोलियम मंत्रालय या फिर वित्त मंत्रालय में महत्वपूर्ण जुम्मेदारी सौंप सकते हैं। नरेन्द्र मोदी को उम्मीद है कि वे वाराणसी और बडोदरा दोनों ही लोकसभा सीटों से जीतेंगे। ऐसी स्थिति में वे बडोदरा सीट को छोड़ेगें और सौरभ पटेल को बडोदरा से चुनाव लड़वाकर केंद्र में लायेंगे।
लेकिन अरविंद केजरीवाल के खुलासे के बाद मुकेश अंबानी और उनके अंबानी ग्रुप और अडानी ग्रुप में खलबली मच गई है। हर स्तर पर दामाद सौरभ पटेल फैक्टर को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद पर बैठाने के लिये अंबानी-अडानी ग्रुपों द्वारा किये जा रहे ऐडी-चोटी के प्रयासों की कलई खुल जाने से देश के राजनैतिक वातावरण में भी तूफान आ गया है। अमित शाह और वसुन्धरा राजे के बड़बोलेपन ने भी आग में घी डालने जैसा काम किया है। अब ऊंठ किसा करवट बैठेगा, यह तो वक्त ही बतलायेगा।


