आखीरकार भारतीय जनता पार्टी ने यह साबित कर दिया है कि वह नात्सीवादी, सामन्तवादी और कट्टर हिन्दुत्ववादी सोच के संगठन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का मात्र एक अग्रिम राजनैतिक संगठन है।
लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी द्वारा उतारे गये उम्मीदवारों पर अगर गौर किया जाये तो भाजपा ने जानबूझ कर जैन समुदाय की गैर जुम्मेदारान तरीके से अवहेलना की है। पाली लोकसभा सीट के जैन समुदाय की बहुलता और पुष्पा जैन की मजबूत दावेदारी के बावजूद इस सीट पर जैन उम्मीदवार को न लड़वा कर आखीर भाजपा ने जैन समुदाय को क्या संदेश दिया है, बतायेंगे भाजपा के कर्णधार!
गत 27 जनवरी, 2014 को जब डॉ.मनमोहन सिंह केंद्रीय सरकार ने जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का संवैधानिक दर्जा दिया था, तब से ही राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ और भाजपा के कट्टर हिन्दुत्ववादी नेता विषवमन कर रहे थे। राजस्थान की भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का संवैधानिक दर्जा दिये जाने के बावजूद राजस्थान में उसके अनुसरण में अधिसूचना जानबूझ कर जारी नहीं की। नतीजन केंद्र की अल्पसंख्यकों के लिये बनी योजनाओं से मिलने वाला आर्थिक सहयोग अल्पसंख्यक जैन समुदाय को नहीं मिला और उक्त राशि 31 मार्च, 2014 को लैप्स जो जायेगी।
भारत एक निरपेक्ष गणतंत्र है। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने अपने पद की शपथ लेते समय शपथ ली थी कि वह बिना किसी राग-द्वेष के निरपेक्ष भाव से अपने दायीत्वों का निर्वहन करेंगी। लेकिन जो शपथ राजे ने ली, क्या उसकी वे पालना कर रही हैं? यह एक विचारणीय मुद्दा है। अगर वे अपने पद की ली गई शपथ की पालना करती, तो जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का संवैधानिक दर्जा दिये जाने वाले नोटिफिकेशन के अनुसरण में आगे कार्यवाही करती और जैन समुदाय के मध्यम एवं निम्न वर्ग को अल्पसंख्यक के रूप में सारी सुविधायें दिलवाती।
हम आपको याद दिला दें कि 06 दिसम्बर, 1992 को जब हिन्दुओं द्वारा फैजाबाद में बाबरी मस्जिद को ढहाया गया था, उसके ठीक दो दिन बाद 08 दिसम्बर, 1992 को लाहौर (पाकिस्तान) में मुस्लिम समुदाय ने एक जैन मंदिर को ढहाया था। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी और इनके किसी भी अग्रिम संगठन ने पाकिस्तान के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला! क्या हुआ जैन मंदिर को शहीद करने वालों के खिलाफ? समस्या है हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच और इन दो पाटों के बीच पिस रहा है जैन समुदाय!
एक बात साफ है कि मेसोपोटामिया में स्मृद्ध हुई हिब्रु संस्कृति के विघटन के बाद हिन्दू धर्म (इण्डिस रिलीजन), ईसाई धर्म, यहुदी धर्म और इस्लाम धर्म का प्रादुर्भाव हुआ है। जैन संस्कृति का अपन अलग अस्तित्व पिछले पांच हजार सालों से ज्यादा समय से है और इसका मेसोपोटामिया में स्मृद्ध हुई हिब्रु संस्कृति के विघटन से अस्तित्व में आये हिन्दू (इण्डस), ईसाई, यहुदी और इस्लाम धर्मों से दूर तक का कोई वास्ता नहीं है।
अब राजस्थान की भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार से पुन: जैन समुदाय यही अपेक्षा करेगा कि उसे उसके संवैधानिक अधिकार प्राप्त हों!
लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी द्वारा उतारे गये उम्मीदवारों पर अगर गौर किया जाये तो भाजपा ने जानबूझ कर जैन समुदाय की गैर जुम्मेदारान तरीके से अवहेलना की है। पाली लोकसभा सीट के जैन समुदाय की बहुलता और पुष्पा जैन की मजबूत दावेदारी के बावजूद इस सीट पर जैन उम्मीदवार को न लड़वा कर आखीर भाजपा ने जैन समुदाय को क्या संदेश दिया है, बतायेंगे भाजपा के कर्णधार!
गत 27 जनवरी, 2014 को जब डॉ.मनमोहन सिंह केंद्रीय सरकार ने जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का संवैधानिक दर्जा दिया था, तब से ही राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ और भाजपा के कट्टर हिन्दुत्ववादी नेता विषवमन कर रहे थे। राजस्थान की भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का संवैधानिक दर्जा दिये जाने के बावजूद राजस्थान में उसके अनुसरण में अधिसूचना जानबूझ कर जारी नहीं की। नतीजन केंद्र की अल्पसंख्यकों के लिये बनी योजनाओं से मिलने वाला आर्थिक सहयोग अल्पसंख्यक जैन समुदाय को नहीं मिला और उक्त राशि 31 मार्च, 2014 को लैप्स जो जायेगी।
भारत एक निरपेक्ष गणतंत्र है। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने अपने पद की शपथ लेते समय शपथ ली थी कि वह बिना किसी राग-द्वेष के निरपेक्ष भाव से अपने दायीत्वों का निर्वहन करेंगी। लेकिन जो शपथ राजे ने ली, क्या उसकी वे पालना कर रही हैं? यह एक विचारणीय मुद्दा है। अगर वे अपने पद की ली गई शपथ की पालना करती, तो जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का संवैधानिक दर्जा दिये जाने वाले नोटिफिकेशन के अनुसरण में आगे कार्यवाही करती और जैन समुदाय के मध्यम एवं निम्न वर्ग को अल्पसंख्यक के रूप में सारी सुविधायें दिलवाती।
हम आपको याद दिला दें कि 06 दिसम्बर, 1992 को जब हिन्दुओं द्वारा फैजाबाद में बाबरी मस्जिद को ढहाया गया था, उसके ठीक दो दिन बाद 08 दिसम्बर, 1992 को लाहौर (पाकिस्तान) में मुस्लिम समुदाय ने एक जैन मंदिर को ढहाया था। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी और इनके किसी भी अग्रिम संगठन ने पाकिस्तान के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला! क्या हुआ जैन मंदिर को शहीद करने वालों के खिलाफ? समस्या है हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच और इन दो पाटों के बीच पिस रहा है जैन समुदाय!
एक बात साफ है कि मेसोपोटामिया में स्मृद्ध हुई हिब्रु संस्कृति के विघटन के बाद हिन्दू धर्म (इण्डिस रिलीजन), ईसाई धर्म, यहुदी धर्म और इस्लाम धर्म का प्रादुर्भाव हुआ है। जैन संस्कृति का अपन अलग अस्तित्व पिछले पांच हजार सालों से ज्यादा समय से है और इसका मेसोपोटामिया में स्मृद्ध हुई हिब्रु संस्कृति के विघटन से अस्तित्व में आये हिन्दू (इण्डस), ईसाई, यहुदी और इस्लाम धर्मों से दूर तक का कोई वास्ता नहीं है।
अब राजस्थान की भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार से पुन: जैन समुदाय यही अपेक्षा करेगा कि उसे उसके संवैधानिक अधिकार प्राप्त हों!


