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अवाम को तैय करना है कि उसे मजबूत ताकतवर भारत चाहिये या फिर गुलाम भारत!

आगामी लोकसभा चुनावों के लिये नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। देश की दो प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों में लोकसभा चुनावों के मद्देनजर घमासान मचा है। भाजपा में आयाराम का बोलबाला है वहीं कांग्रेस में गयाराम का! आयाराम और गयाराम के पीछे बताया जा रहा है कि नरेन्द्र मोदी फैक्टर काम कर रहा है। भाजपा में आने वाला हर आयाराम यह विश्वास पाल कर बैठा है कि वह नरेन्द्र मोदी की लहर में तैर कर सीधा लोकसभा में पहुंच जायेगा। ऐसे आयारामों की नींद हराम कर दी है पिछले दिनों हुए एक खुलासे ने!
दरअसल नरेन्द्र मोदी की लहर के पीछे देश में एक बड़े उद्योगघराने का हाथ होने की खबरें पूरे देश में जिस तरह से सामने आई है, उसके चलते भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेताओं के हाथों के तोते उड़ गये हैं! अवाम में भी भूचाल आ गया है!
पिछले दो महिनों से 450 करोड़ रूपये से ज्यादा खर्च कर मोदी के लिये देशभर में सभायें और रैलियां आयोजित कर अवाम के बीच ये संदेश दिया जा रहा था कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में भाजपा की सरकार बनेगी। लालकृष्ण आडवानी, मुरलीमनोहर जोशी, जसवन्त सिंह, यशवन्त सिन्ह, सुषमा स्वराज्य सहित भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर सिर्फ नरेन्द्र मोदी को भाजपा प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित करने के पीछे आम धारणा यह थी कि यह सब राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का किया धरा है और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर संघ मोदी को प्रधानमंत्री बनाना चाहता है।
लेकिन चौंकाने वाली जो जानकारियां सामने आ रही है, वे उजागर कर रही है कि मुकेश अंबानी, अंबानी और अडानी ग्रुप और कुछ अन्य औद्योगिक घरानों के साथ मिल कर नरेन्द्र मोदी को देश का अगला प्रधानमंत्री बनाने की जी तोड़ कोशिश में जुटे हैं। यह भी खुलासा होता जा रहा है कि अंबानी इस मुहिम में अब तक 500 करोड़ रूपये खपा चुके हैं और अगले दो महिनों में ओर 1250 करोड़ रूपये नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री निर्वाचित करवाने के लिये खर्च कर सकते हैं। मुकेश अंबानी यह मोटी धनराशि कोई खैरात में नहीं लुटा रहे हैं। उनको कांग्रेस सरकार ने जिन दरों पर गैस का ठेका दिया था, वे उन दरों को आठ गुना बढ़ा कर वसूल करना चाहते हैं। इस अमरीकी परस्त उद्योगपति को देश की जनता के हितों से कोई लेनादेना नहीं है। मुकेश अंबानी को सिर्फ अपने फायदे से मतलब है, देश की खुशहाली से उनका दूर का नाता भी नहीं है।
गैस मामले में उन्होंने कांग्रेस की डॉ.मनमोहन सिंह सरकार से भी अपनी बात मनवा ली थी। यह तो भला हो अरविंद केजरीवाल और उनकी आप पार्टी का! जिन्होंने कांग्रेस और अंबानी का भांडाफोड़ कर रख दिया। पैट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली बहुत भन्नाये! नरेन्द्र मोदी और उनकी भाजपा की भी गैस कीमतों में बढोतरी पर जबान नहीं खुली और सभी भाजपाई नेताओं की जबान पर ताले लटके रहे।
अब साफ-साफ उजागर हो रहा है कि मुकेश अंबानी एण्ड कंपनी नरेन्द्र मोदी को क्यों प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं। गुजरात में अंबानी और अडानी ग्रुप को किसानों की कीमती जमीनें मोदी ने अधिग्रहण कर अडानी-अंबानी ग्रुप को दी। नतीजन अब तक छह सौ पीडि़त किसानों ने गुजरात में आत्महत्या कर ली।
आज स्थिति यह है कि मुकेश अंबानी के नेतृत्व में कुछ औद्योगिक घराने देश की सत्ता पर अपना परोक्ष प्रभुत्व जमाना चाहते हैं और नरेन्द्र मोदी उनके मोहरे हैं। वहीं राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ देश में नात्सीवादी, सामन्तवादी और कट्टर हिन्दुत्ववादी शासन व्यवस्था कायम करना चाहता है। स्थिति विकट बनती जा रही है और क्या भारत का भी वही हश्र होगा जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान, लीबिया और ईराक का हुआ है!
अब देश की जनता ही तैय करेगी कि वह स्थिर सशक्त भारत चाहती है या अमरीकी परस्त गुलाम कमजोर भारत!

 
AGRAGAMI SANDESH

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