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गरीबों के गाढ़े पसीने की कमाई सम्पन्न तबके को लुटाना बंद करे भाजपा सरकार!

जयपुर (अग्रगामी) आखीरकार आपातकाल के वर्ष 1975-77 के दौरान मीसा और डीआईआर के अंर्तगत गिरफ्तार लोगों को 12 हजार रूपये मासिक पेंशन और 12 सौ रूपये मेडीकल भत्ते के रूप में देने के आदेश राजस्थान की वसुन्धरा राजे सरकार ने जारी कर ही दिये!
मंहगाई, बेरोजगारी, जमाखोरी-कालाबाजारी, मुनाफाखोरी और भ्रष्टाचार से जूझ रही राज्य की जनता के दु:खदर्दों को दूर करने में विफल और नाकारा साबित हो रही भाजपा की वसुन्धरा राजे सरकार ने अपनी नात्सीवादी सामन्तवादी इस सोच को राज्य की पीडि़त और शोषित जनता पर क्यों थोपी? ये तो वे ही बता सकती हैं।
मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के ही शब्दों में लगभग दो लाख करोड़ रूपये के कर्जे में डूबे इस बीमारू प्रदेश पर मीसा व डीआईआर बंदियों को पेंशन के रूप में खैरात बांटने का बोझ आखीर क्यों डाला गया? जनता अपने इस सवाल का जवाब सत्तारूढ़ दल और सरकार से चाहती है।
अवाम का यह भी सवाल है कि आपातकाल को समाप्त हुए 35 साल से अधिक हो गये हैं। इतने साल बीत जाने के बाद प्रदेश में ऐसे कितने मीसा और डीआईआर में निरूद्ध हुए लोग हैं जिन्हें गरीबी के कारण जीवनयापन में दिक्कत आ रही है और उन्हें आर्थिक सहायता की आवश्यकता है? बताये सरकार!
ऑल इण्डिया फारवर्ड ब्लाक के राजस्थान स्टेट जनरल सेक्रेटरी कामरेड़ हीराचंद जैन ने यहां कहा कि गरीबों के खून पसीने की कमाई को सम्पन्न लोगों में बांटना किसी भी जनतांत्रिक सरकार के लिये उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि आपातकाल का संघर्ष जेल में बंद कुछ लोगों ने ही नहीं लड़ा था। यह संघर्ष आम अवाम का था और आम अवाम ने ही इंदिरा गांधी सरकार को उखाड़ कर फैंका था और आज भाजपा की वसुन्धरा राजे सरकार इस ही संघर्षसील अवाम के खून पसीने की कमाई चंद सम्पन्न भाजपाईयों को खैरात के रूप में पेंशन के नाम पर बांटने पर आमादा है। पिछले दिनों ही इसही मुद्दे पर नाराजगी जाहिर करते हुए राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने भी वसुन्धरा राजे सरकार के इस कदम का विरोध किया था। लेकिन लोकसभा चुनावों में फायदा उठाने के लिये ताबड़तोड़ तरीके से पेंशन देने का यह आदेश जारी कर भाजपा सरकार ने साबित कर दिया है कि उसके पास जनकल्याणकारी सोच है ही नहीं।
फारवर्ड ब्लाक का स्पष्ट आरोप है कि एक तरफ सरकार गरीब पीडि़त शोषित वर्ग के कल्याण से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं को बहानेबाजी लगा कर खत्म करने की साजिश में जुटी है वहीं दूसरी ओर सम्पन्न लोगों पर पेंशन की आड़ लेकर गरीबों के खून पसीने की कमाई को लुटाने की नौटंकी भी की जा रही है।
उधर कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता डॉ.अर्चना शर्मा ने भी वसुन्धरा राजे सरकार द्वारा आपातकाल के दौरान निरूद्ध लोगों को पेंशन देने की स्कीम का विरोध करते हुए कहा है कि इस योजना को सरकार सिर्फ भाजपा और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के कार्यकर्ताओं को फायदा पहुंचाने के लिये लागू कर रही है।
ज्ञातव्य रहे कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ इस योजना को ऊपरी तौर पर पहिले ही नकार चुका है। संघ प्रवक्ताओं का कहना था कि संघ का स्वंयसेवक देश के लिये संघर्ष करने की कीमत नहीं वसूलता है!

 
AGRAGAMI SANDESH

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