राजनाथ सिंह ने खुले मंच से कहा है कि वे गलतियों के लिये सिर झुका कर माफी मांगेंगे। हम न तो राजनाथ सिंह से सिर झुकाने के लिये कहेंगे और न ही माफी मांगने के लिये कहेंगे। हम राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत से भी ऐसा करने के लिये कहना नहीं चाहते हैं!
लेकिन भाजपा एवं आरएसएस प्रमुखों से हम एक सवाल पूछना चाहते हैं! हमारा सवाल है कि जैन समुदाय एक प्राचीन संस्कृति है। जैन संस्कृति का इतिहास हिन्दू धर्म (इण्डस रिलीजन) की उत्पत्ति से हजारों साल पुराना है, फिर भी उनकी जमात के लोग क्यों बार-बार जैन समुदाय को अपने कुनबे का सदस्य बताते हैं?
हमने अग्रगामी संदेश के पिछले अंकों में जैन समुदाय के सांस्कृतिक इतिहास तथा हिन्दू धर्म (इण्डस रिलीजन) की उत्पत्ती के बारे में लिखा था और स्पष्ट किया था कि जैन संस्कृति का हिन्दू धर्म (हिब्रु संस्कृति से टूट कर अलग हुए इण्डस रिलीजन) से दूर तक का कोई सम्बन्ध नहीं है! ऐसी स्थिति में बार-बार गोयेबल्स की तरह यह झूठ बोलना कि जैन संस्कृति हिन्दुओं के कुनबे का हिस्सा है, कहां तक उचित है?
जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का संवैधानिक दर्जा मिल जाने से क्यों बौखलाया हुआ है राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का कुनबा, बतायेंगे उनके प्रमुख मोहन भागवत और सहकार्यवाह भैय्या जी जोशी! अगर जैन समुदाय को उसका वाजिब हक केंद्र सरकार ने उसे दे दिया है, तो फिर उस पर बेतुका शोर शराबा क्यों?
बजाय इसके राजनाथ सिंह ओर मोहन भागवत को चाहिये कि वे जैन समुदाय के पावन तीर्थ गिरिनार पर से हिन्दुओं के कब्जे हटवाने के लिये गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार को कहें! निर्देश दें गुजराज के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को कि उनकी सरकार के आधीन गुजरात पर्यटन विभाग जैन समुदाय के पावन तीर्थ स्थल शत्रुंजय तीर्थ पर गुजरात के ब्रांड एम्बेसेडर अमिताभ बच्चन को एंकर बना कर खुशबू गुजरात की के अंतर्गत कुछ दिन गुजारो गुजरात में के तहत बनाई जाने वाली विज्ञापन फिल्म पर तत्काल रोक लगाये, क्योंकि यह साफ-साफ जैन समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है।
राजनाथ सिंह और मोहन भागवत अगर चाहें तो राजस्थान में जैन समुदाय के ऋषभदेव जिला उदयपुर में स्थित केसरियानाथ मंदिर में नियुक्त हिन्दू प्रशासनिक अधिकारी को हटा कर वहां जैन समुदाय के वरिष्ठ शासकीय प्रशासनिक अधिकारी को प्रशासक नियुक्त करवाने में पहल कर सकते हैं।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे पर यह दबाव तो डाल ही सकते हैं कि 27 जनवरी, 2014 को केंद्र सरकार द्वारा भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसरण में राजस्थान में जैन समाज को अल्पसंख्यक के रूप में मिलने वाले परिलाभ दिलवाने हेतु आवश्यक दिशानिर्देश एवं आदेश जारी करें। क्यों आरएसएस और भाजपा की लीडरशिप के दबाव के चलते जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का संवैधानिक दर्जा मिलने के बाद भी उन्हें संविधान प्रदत्त अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है? जवाब दें भाजप और आरएसएस प्रमुख!
सर झुका कर माफी मांगने से कुछ भी हांसिल नहीं होने वाल है राजनाथ सिंह जी और भागवत साहब! जैन समुदाय को अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में उसके संविधान प्रदत्त हक चाहियें। साथ ही संघ प्रमुख के रूप में भागवत साहब से भी जैन समुदाय की ओर से हमारा अनुरोध है कि जैन समुदाय के विघटन की जो पर्दे के पीछे साजिशें चल रही हैं उन पर भी सख्ती से विराम लगाने के निर्देश देंगे। क्योंकि अब जैन युवा अपने वाजिब संविधान प्रदत्त हकों को पाने के लिये जागरूक हो रहा है।
लेकिन भाजपा एवं आरएसएस प्रमुखों से हम एक सवाल पूछना चाहते हैं! हमारा सवाल है कि जैन समुदाय एक प्राचीन संस्कृति है। जैन संस्कृति का इतिहास हिन्दू धर्म (इण्डस रिलीजन) की उत्पत्ति से हजारों साल पुराना है, फिर भी उनकी जमात के लोग क्यों बार-बार जैन समुदाय को अपने कुनबे का सदस्य बताते हैं?
हमने अग्रगामी संदेश के पिछले अंकों में जैन समुदाय के सांस्कृतिक इतिहास तथा हिन्दू धर्म (इण्डस रिलीजन) की उत्पत्ती के बारे में लिखा था और स्पष्ट किया था कि जैन संस्कृति का हिन्दू धर्म (हिब्रु संस्कृति से टूट कर अलग हुए इण्डस रिलीजन) से दूर तक का कोई सम्बन्ध नहीं है! ऐसी स्थिति में बार-बार गोयेबल्स की तरह यह झूठ बोलना कि जैन संस्कृति हिन्दुओं के कुनबे का हिस्सा है, कहां तक उचित है?
जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का संवैधानिक दर्जा मिल जाने से क्यों बौखलाया हुआ है राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का कुनबा, बतायेंगे उनके प्रमुख मोहन भागवत और सहकार्यवाह भैय्या जी जोशी! अगर जैन समुदाय को उसका वाजिब हक केंद्र सरकार ने उसे दे दिया है, तो फिर उस पर बेतुका शोर शराबा क्यों?
बजाय इसके राजनाथ सिंह ओर मोहन भागवत को चाहिये कि वे जैन समुदाय के पावन तीर्थ गिरिनार पर से हिन्दुओं के कब्जे हटवाने के लिये गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार को कहें! निर्देश दें गुजराज के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को कि उनकी सरकार के आधीन गुजरात पर्यटन विभाग जैन समुदाय के पावन तीर्थ स्थल शत्रुंजय तीर्थ पर गुजरात के ब्रांड एम्बेसेडर अमिताभ बच्चन को एंकर बना कर खुशबू गुजरात की के अंतर्गत कुछ दिन गुजारो गुजरात में के तहत बनाई जाने वाली विज्ञापन फिल्म पर तत्काल रोक लगाये, क्योंकि यह साफ-साफ जैन समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है।
राजनाथ सिंह और मोहन भागवत अगर चाहें तो राजस्थान में जैन समुदाय के ऋषभदेव जिला उदयपुर में स्थित केसरियानाथ मंदिर में नियुक्त हिन्दू प्रशासनिक अधिकारी को हटा कर वहां जैन समुदाय के वरिष्ठ शासकीय प्रशासनिक अधिकारी को प्रशासक नियुक्त करवाने में पहल कर सकते हैं।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे पर यह दबाव तो डाल ही सकते हैं कि 27 जनवरी, 2014 को केंद्र सरकार द्वारा भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसरण में राजस्थान में जैन समाज को अल्पसंख्यक के रूप में मिलने वाले परिलाभ दिलवाने हेतु आवश्यक दिशानिर्देश एवं आदेश जारी करें। क्यों आरएसएस और भाजपा की लीडरशिप के दबाव के चलते जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का संवैधानिक दर्जा मिलने के बाद भी उन्हें संविधान प्रदत्त अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है? जवाब दें भाजप और आरएसएस प्रमुख!
सर झुका कर माफी मांगने से कुछ भी हांसिल नहीं होने वाल है राजनाथ सिंह जी और भागवत साहब! जैन समुदाय को अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में उसके संविधान प्रदत्त हक चाहियें। साथ ही संघ प्रमुख के रूप में भागवत साहब से भी जैन समुदाय की ओर से हमारा अनुरोध है कि जैन समुदाय के विघटन की जो पर्दे के पीछे साजिशें चल रही हैं उन पर भी सख्ती से विराम लगाने के निर्देश देंगे। क्योंकि अब जैन युवा अपने वाजिब संविधान प्रदत्त हकों को पाने के लिये जागरूक हो रहा है।


