जयपुर (अग्रगामी) राजस्थान में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के राजनैतिक संगठन भारतीय जनता पार्टी की वसुन्धरा राजे सरकार का अल्पसंख्यक मामलात विभाग जैन समुदाय के स्कूलों को अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में संविधान प्रदत्त अधिकारों से वंचित करने का प्रयास कर रहा बताया जाता है।
ज्ञातव्य रहे कि कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1992 (1992 का 19) की धारा-2 खण्ड-ग द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार द्वारा जैन समुदाय को अल्पसंख्यक अधिसूचित कर दिया गया है। इस अधिसूचना का प्रकाशन दी गजट ऑफ इण्डिया के असाधारण प्रकाशन दिनांक 27 जनवरी, 2014 में किया जा चुका है। लेकिन राजस्थान सरकार का अल्पसंख्यक मामलात विभाग केंद्र सरकार की राजपत्र में दिनांक 27 जनवरी, 2014 को प्रकाशित विज्ञप्ति के अनुसारण में जैन समुदाय की शिक्षण संस्थाओं के अल्पसंख्यक दर्जे से सम्बन्धित प्रमाण पत्र जारी नहीं कर रहा है। जबकि राजस्थान में अल्पसंख्यक मामलात विभाग सीधे मुख्यमंत्री के ही आधीन है।
उधर शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि राज्य के अल्पसंख्यक मामलात विभाग से जैन समुदाय की शिक्षण संस्थाओं के अल्पसंख्यक स्टेटस का प्रमाण पत्र जारी नहीं होगा तब तक शिक्षा विभाग के स्तर पर उन्हें अल्पसंख्यक श्रेणी में नहीं माना जा सकता है।
वहीं प्रदेश में जैन समुदाय के परिवारों, छात्र-छात्राओं के लिये अल्पसंख्यक का प्रमाण पत्र जारी करने के लिये भी राज्य सरकार के स्तर से आदेश जारी करने में विलम्ब किया जा रहा है, नतीजन प्रदेश के लगभग 7 लाख जैन समुदाय के लोगों को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी नहीं किये जा रहे हैं और इस ही कारण से उन्हें केंद्र और राज्य सरकार स्तर से अल्पसंख्यक के रूप में मिलने वाली सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।
ऑल इण्डिया फारवर्ड ब्लाक के राजस्थान स्टेट जनरल सेक्रेटरी हीराचंद जैन ने राज्य की वसुन्धरा राजे सरकार से आग्रह किया है कि जैन समुदाय को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने के लिये तत्काल जिला कलक्टरों को आदेश जारी किये जायें। साथ ही जैन समुदाय की शिक्षण संस्थाओं को आरटीई से मुक्ति हेतु अल्पसंख्यक मामलात विभाग तत्काल इन शिक्षण संस्थाओं को अल्पसंख्यक शिक्षण संस्था का प्रमाण पत्र जारी करे।
ज्ञातव्य रहे कि कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1992 (1992 का 19) की धारा-2 खण्ड-ग द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार द्वारा जैन समुदाय को अल्पसंख्यक अधिसूचित कर दिया गया है। इस अधिसूचना का प्रकाशन दी गजट ऑफ इण्डिया के असाधारण प्रकाशन दिनांक 27 जनवरी, 2014 में किया जा चुका है। लेकिन राजस्थान सरकार का अल्पसंख्यक मामलात विभाग केंद्र सरकार की राजपत्र में दिनांक 27 जनवरी, 2014 को प्रकाशित विज्ञप्ति के अनुसारण में जैन समुदाय की शिक्षण संस्थाओं के अल्पसंख्यक दर्जे से सम्बन्धित प्रमाण पत्र जारी नहीं कर रहा है। जबकि राजस्थान में अल्पसंख्यक मामलात विभाग सीधे मुख्यमंत्री के ही आधीन है।
उधर शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि राज्य के अल्पसंख्यक मामलात विभाग से जैन समुदाय की शिक्षण संस्थाओं के अल्पसंख्यक स्टेटस का प्रमाण पत्र जारी नहीं होगा तब तक शिक्षा विभाग के स्तर पर उन्हें अल्पसंख्यक श्रेणी में नहीं माना जा सकता है।
वहीं प्रदेश में जैन समुदाय के परिवारों, छात्र-छात्राओं के लिये अल्पसंख्यक का प्रमाण पत्र जारी करने के लिये भी राज्य सरकार के स्तर से आदेश जारी करने में विलम्ब किया जा रहा है, नतीजन प्रदेश के लगभग 7 लाख जैन समुदाय के लोगों को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी नहीं किये जा रहे हैं और इस ही कारण से उन्हें केंद्र और राज्य सरकार स्तर से अल्पसंख्यक के रूप में मिलने वाली सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।
ऑल इण्डिया फारवर्ड ब्लाक के राजस्थान स्टेट जनरल सेक्रेटरी हीराचंद जैन ने राज्य की वसुन्धरा राजे सरकार से आग्रह किया है कि जैन समुदाय को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने के लिये तत्काल जिला कलक्टरों को आदेश जारी किये जायें। साथ ही जैन समुदाय की शिक्षण संस्थाओं को आरटीई से मुक्ति हेतु अल्पसंख्यक मामलात विभाग तत्काल इन शिक्षण संस्थाओं को अल्पसंख्यक शिक्षण संस्था का प्रमाण पत्र जारी करे।


