जयपुर (अग्रगामी) राजस्थान में भाजपा की अगुआई वाली वसुन्धरा राजे सरकार केंद्र द्वारा जैन समुदाय को अल्पसंख्यक घोषित करने की भारत के राजपत्र दिनांक 27 जनवरी, 2014 को प्रकाशित अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की अधिसूचना (क.आ.267 (अ)) के अनुसरण में जैन समुदाय को संविधान प्रदत्त उसके अधिकारों की प्राप्ति के संदर्भ में अपने अधीनस्थ विभागों को तत्काल कार्यवाही करने के लिये दिशानिर्देश जारी करने में विलम्ब कर रही है। नतीजन वित्तीय वर्ष 2013-14 में जो शासकीय आर्थिक सहयोग अल्पसंख्यक जैन समुदाय को मिलने चाहिये उससे इस समुदाय को वंचित रहना पड़ेगा।
केंद्र सरकार द्वारा जैन समुदाय को अल्पसंख्यक अधिसूचित करने के एक पखवाडा बीत जाने के बाद भी राज्य के अल्पसंख्यक मामलात विभाग ने जिला कलक्टरों को जैन समुदाय को अल्पसंख्यक होने का प्रमाण पत्र जारी करने के लिये किसी भी तरह की गाइड लाइन जारी नहीं की है। अल्पसंख्यक मामलात विभाग के प्रमुख शासन सचिव जी.एस.संधु का कथन है कि विभाग को अधिसूचना की कापी पिछले दिनों ही मिली है और उस पर प्रशासनिक स्तर पर कार्यवाही शुरू की जा रही है।
उधर जैन समुदाय की शिक्षण संस्थाओं को अल्पसंख्यक शिक्षण संस्था का दर्जा देने के लिये राज्य का अल्पसंख्यक मामलात विभाग कार्यवाही करने में ठील बरत रहा है। वहीं राज्य के शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जब तक राज्य के अल्पसंख्यक मामलात विभाग से जैन समुदाय की शिक्षण संस्थाओं को अल्पसंख्यक स्टेटस का प्रमाण पत्र जारी नहीं होता है तब तक शिक्षा विभाग के स्तर पर जैन समुदाय की शिक्षण संस्थाओं को अल्पसंख्यक श्रेणी में नहीं माना जा सकता है।
परेशानी वाली एक स्थिति यह भी है कि जैन समुदाय को अल्पसंख्यक होने का प्रमाण पत्र जारी नहीं किये जाने के कारण सैंकड़ों युवा अपने व्यवसाय प्रारम्भ करने के लिये राजकीय वित्त संस्थाओं और बैंकों से रियायती ब्याज पर ऋण लेने से वंचित हो रहे हैं।
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन ने जैन समुदाय के वरिष्ठ नेताओं से आग्रह किया है कि वे इन मुद्दों को राज्य की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के समक्ष पुरजोर तरीके से उठायें ताकि जैन समुदाय के युवा उद्यमियों और बेरोजगारों को अपने रोजगार लगाने के लिये जरूरत के मुताबिक कम ब्याज पर धन राशि उपलब्ध हो सके। ज्ञातव्य रहे कि राज्य का अल्पसंख्यक मामलात विभाग सीधे मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के आधीन है।
केंद्र सरकार द्वारा जैन समुदाय को अल्पसंख्यक अधिसूचित करने के एक पखवाडा बीत जाने के बाद भी राज्य के अल्पसंख्यक मामलात विभाग ने जिला कलक्टरों को जैन समुदाय को अल्पसंख्यक होने का प्रमाण पत्र जारी करने के लिये किसी भी तरह की गाइड लाइन जारी नहीं की है। अल्पसंख्यक मामलात विभाग के प्रमुख शासन सचिव जी.एस.संधु का कथन है कि विभाग को अधिसूचना की कापी पिछले दिनों ही मिली है और उस पर प्रशासनिक स्तर पर कार्यवाही शुरू की जा रही है।
उधर जैन समुदाय की शिक्षण संस्थाओं को अल्पसंख्यक शिक्षण संस्था का दर्जा देने के लिये राज्य का अल्पसंख्यक मामलात विभाग कार्यवाही करने में ठील बरत रहा है। वहीं राज्य के शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जब तक राज्य के अल्पसंख्यक मामलात विभाग से जैन समुदाय की शिक्षण संस्थाओं को अल्पसंख्यक स्टेटस का प्रमाण पत्र जारी नहीं होता है तब तक शिक्षा विभाग के स्तर पर जैन समुदाय की शिक्षण संस्थाओं को अल्पसंख्यक श्रेणी में नहीं माना जा सकता है।
परेशानी वाली एक स्थिति यह भी है कि जैन समुदाय को अल्पसंख्यक होने का प्रमाण पत्र जारी नहीं किये जाने के कारण सैंकड़ों युवा अपने व्यवसाय प्रारम्भ करने के लिये राजकीय वित्त संस्थाओं और बैंकों से रियायती ब्याज पर ऋण लेने से वंचित हो रहे हैं।
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन ने जैन समुदाय के वरिष्ठ नेताओं से आग्रह किया है कि वे इन मुद्दों को राज्य की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के समक्ष पुरजोर तरीके से उठायें ताकि जैन समुदाय के युवा उद्यमियों और बेरोजगारों को अपने रोजगार लगाने के लिये जरूरत के मुताबिक कम ब्याज पर धन राशि उपलब्ध हो सके। ज्ञातव्य रहे कि राज्य का अल्पसंख्यक मामलात विभाग सीधे मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के आधीन है।


