जयपुर (अग्रगामी) राजस्थान में जैन समुदाय के धार्मिक स्थलों में सरकार द्वारा नियुक्त गैर जैन प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल हटाया जा कर जैन समुदाय के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को उनके स्थान पर नियुक्त किया जाये।
खरतरगच्छ चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन ने राज्य सरकार से मांग की है कि उदयपुर जिले के ऋषभदेव में स्थित जैन समुदाय के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) के केसरियानाथ तीर्थ स्थलों व मंदिरों में नियुक्त गैर जैन अधिकारियों को तत्काल हटा कर उनके स्थान पर वरिष्ठ जैन प्रशसनिक अधिकारियों की नियुक्ति की जाये ताकि जैन संस्कृति के प्राचीन एवं अद्वितीय गौरव की पुर्नस्थापना की पहल की जा सके।
खरतरगच्छ जन चेतना मंच ने राज्य सरकार से यह भी मांग की है कि राज्य के पुरातत्व विभाग के आधीन लिये गये जैन मंदिरों एवं अन्य पुरासम्पत्तियों को जैन समुदाय को सौंपा जाये ताकि उनके संरक्षण की सक्षम समुचित व्यवस्था की जा सके।
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन ने जैन समुदाय के सभी चैरीटेबिल ट्रस्टों के प्रमुखों, समाजसेवियों और जैन सामाजिक संगठनों के प्रमुखों से अपील की है कि वे जैन पुरातत्व महत्व की पुरासम्पत्तियों को सरकार से हस्तगत कर उनके संरक्षण के कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि नये मंदिर और अन्य निर्माण कराने के बजाये इन पुरासम्पत्तियों के संरक्षण से जहां जैन संस्कृति को अक्षुण्ण रखने में मदद मिलेगी, वहीं जैन संस्कृति के इतिहास की खोज और संधारण में भी खासा योगदान मिलेगा!
खरतरगच्छ चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन ने राज्य सरकार से मांग की है कि उदयपुर जिले के ऋषभदेव में स्थित जैन समुदाय के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) के केसरियानाथ तीर्थ स्थलों व मंदिरों में नियुक्त गैर जैन अधिकारियों को तत्काल हटा कर उनके स्थान पर वरिष्ठ जैन प्रशसनिक अधिकारियों की नियुक्ति की जाये ताकि जैन संस्कृति के प्राचीन एवं अद्वितीय गौरव की पुर्नस्थापना की पहल की जा सके।
खरतरगच्छ जन चेतना मंच ने राज्य सरकार से यह भी मांग की है कि राज्य के पुरातत्व विभाग के आधीन लिये गये जैन मंदिरों एवं अन्य पुरासम्पत्तियों को जैन समुदाय को सौंपा जाये ताकि उनके संरक्षण की सक्षम समुचित व्यवस्था की जा सके।
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रमुख कार्यकारी कार्यकर्ता हीराचंद जैन ने जैन समुदाय के सभी चैरीटेबिल ट्रस्टों के प्रमुखों, समाजसेवियों और जैन सामाजिक संगठनों के प्रमुखों से अपील की है कि वे जैन पुरातत्व महत्व की पुरासम्पत्तियों को सरकार से हस्तगत कर उनके संरक्षण के कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि नये मंदिर और अन्य निर्माण कराने के बजाये इन पुरासम्पत्तियों के संरक्षण से जहां जैन संस्कृति को अक्षुण्ण रखने में मदद मिलेगी, वहीं जैन संस्कृति के इतिहास की खोज और संधारण में भी खासा योगदान मिलेगा!


