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क्या चुनावी चंदा बटोरने के लिये जमाखोरों-कालाबाजारियों भूमाफियों पर कार्यवाही नहीं हो रही!

भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार को सत्ता सम्भाले एक महिने से ज्यादा गुजर गया है, लेकिन अवाम के दु:खदर्दों से जुड़े मुद्दों पर सरकार क्या सोच रही है और क्या कर रही है? कुछ भी सीएमओ के बाहर नहीं आ रहा है। अगले सप्ताह राज्य मंत्रिमण्डल की बैठक भरतपुर में आयोजित की जा रही है। वसुन्धरा राजे सरकार दस दिन तक भरतपुर में डेरा डालेगी। बताया जा रहा है कि वसुन्धरा राजे सरकार के मंत्री दस दिनों तक भरतपुर सम्भाग में सक्रिय रहेंगे। याने कि 10 दिनों तक प्रदेश की राजधानी जयपुर में सरकारी कामकाज भगवान भरोसे रहेगा। वैसे भी वसुन्धरा राजे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अवाम को राहत पहुंचाने वाला एक भी ऐसा काम नहीं किया जो सराहनीय हो।
पिछले एक महिने से कागजी घोषणाऐं और कार्यवाहियां करने में जुटी वसुन्धरा राजे सरकार का एक भी फैसला या आदेश धरातल पर कार्यरूप में परिणीत नहीं हुआ है। मंहगाई, जमाखोरी, कालाबाजारी, मुनाफाखोरी से अवाम को धेलेभर भी राहत नहीं मिली है। जमाखोरों, कालाबाजरियों पर कार्यवाही नहीं होने के कारण इनके हौंसले बुलंद हैं। कहा जा रहा है कि जमाखोरी, कालाबाजारी रोकने के लिये एक कानून विधानसभा में रखा गया है। लेकिन उस पर विधानसभा में बहस, निर्णय के बाद उसके कानून बनने में काफी वक्त लगेगा। ऐसी स्थिति में मौजूदा कानूनों के तहत कार्यवाही नहीं करने का कोई औचित्य ही नहीं है। नया कानून जब प्रभावी हो, तब उसके तहत कार्यवाही सरकार करे, लेकिन जब तक नया कानून बन कर प्रभावी नहीं हो जाता तब तक स्थापित कानूनों के तहत कार्यवाही कर जनता को राहत पहुंचाने के लिये वसुन्धरा राजे सरकार क्यों हील हवाला कर रही है? क्यों कार्यवाही करने से कतरा रही है?
इस ही तरह प्रदेश में गैर कानूनी और अवैध निर्माणों का बोलबाला है। अकेले राजधानी जयपुर में हजारों की तादाद में अवैध और बिना इजाजत कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों का निर्माण हो रहा है। राजधानी जयपुर के चारदिवारी क्षेत्र में कॉमर्शियल काम्प्लेक्स निर्माण पर पाबंदी है, लेकिन कम से कम एक हजार अवैध गैरकानूनी काम्प्लेक्सों का निर्माण निरन्तर चालू है! नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग का प्रभार खुद मुख्मंत्री वसुन्धरा राजे के पास है और ऐसे में अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के निर्माण पर अंकुश नहीं लगना अत्यन्त आश्चर्य एवं चिंता की बात है!
भूमाफियाओं और बिल्डरों का दबे स्वर में कहना है कि भाजपा को राजनैतिक एवं चुनावी चंदा देना हमारी मजबूरी के साथ-साथ प्राथमिकता भी है। क्योंकि यही एक जरिया है, जिसके द्वारा चंदा देकर हम अपने कानून के विपरीत बनाये जा रहे अवैध निर्माणों पर कार्यवाही को रूकवा सकते हैं।
जानकार बताते हैं कि राजस्थान में भाजपा की वसुन्धरा राजे सरकार के पास दो तिहाई से ज्यादा बहुमत होने के बाद भी पिछले एक महिने में जमाखोरों, कालाबाजारियों के खिलाफ कार्यवाही कर अवाम को मंहगाई से राहत नहीं दिलवा पाना और नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग खुद मुख्यमंत्री के पा होने के बावजूद भ्रष्ट भूमाफिया और बिल्डर माफिया के खिलाफ कार्यवाही नहीं होना साफ-साफ दर्शाता है कि भाजपा के लिये आगामी लोकसभा चुनावों हेतु राजनैतिक चंदा बटोरने के लिये ही कार्यवाही नहीं की जा रही है। नतीजन एक ओर जनता मंहगाई से त्रस्त है वहीं भूमाफियाओं के हौंसले बुलंद होने के कारण कानून और व्यवस्था की स्थिति बिगडऩे का अंदेशा बढ़ गया है तथा भ्रष्टाचारी सरकारी हुक्कामों और कारिंदों की पो-बारह-पच्चीस हो रही है।

 
AGRAGAMI SANDESH

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