दिल्ली में सत्ता पर कब्जा जमाने में असफल रहे भाजपाई नेताओं ने अब आम आदमी पार्टी में तोडफ़ोड़ करने का रास्ता अख्तियार कर लिया है। अगर सूत्रों की माने तो आम आदमी पार्टी के एक विधायक विनोद कुमान बिन्नी की पार्टी विरोधी हरकत से साफ हो जाता है कि बिन्नी भाजपाई नेताओं के इशारे पर अपनी आम आदमी पार्टी में बगावत का झण्डा खड़ा करने की कोशिश में हैं!
बिन्नी आप सरकार में मंत्री पद की महत्वकांक्षा पाले हुए थे। लेकिन उन्हें मंत्री पद नहीं मिला। फिर उन्होंने एक खास संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लडऩे के लिये अपनी दावेदारी जताई। लेकिन वहां भी उनकी दाल नहीं गली। ज्ञातव्य रहे कि विनोद कुमार बिन्नी, कांग्रेस से बगावत कर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे और आप से दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ कर विधायक बने हैं। जिससे साफ हो जाता है कि बिन्नी पदलोलुपता के संक्रमण से ग्रसित हैं और सत्ता हाथ से जाने के गम से गमगीन दिल्ली के भाजपाई नेताओं का उन्हें वरदहस्त है!
बिन्नी जिन मुद्दों को लेकर आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर निशाना साध रहे हैं, उन मु्द्दों में से कुछ मुद्दों पर फैसलों में वे खुद भी आप के शीर्षस्थ नेताओं के साथ शामिल थे। उस समय बिन्नी ने क्यों उन फैसलों का विरोध नहीं किया? क्यों उनकी जबान तालू से चिपक गई थी? आज जब उन्हें मंत्री पद नहीं मिला और लोकसभा सीट की उनकी दावेदारी को भी नजरन्दाज किया जा रहा है, तो वे भाजपाईयों के साथ मिल कर पार्टी में बगावत करने पर उतारू हो गये।
बिन्नी को पता होना चाहिये कि आप की तरह ही वाम जनवादी पार्टियों में भी पोलित ब्यूरो होते हैं और रोजमर्रा के फैसले पोलित ब्यूरो ही लेते हैं और उन फैसलों पर पार्टी की कार्यकारिणी अपनी स्वीकृति की मुहर लगाती हैं। वामपंथी जनवादी दलों में पोलित ब्यूरो की संवैधानिक व्यवस्था होती है। ठीक उस ही तरह आप में भी राजनैतिक समिति है जो पोलित ब्यूरो की तरह ही फैसले लेने के लिये अधिकृत है।
दरअसल, आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनावों में भाजपा के लिये एक सीधी चुनौती के रूप में उभर कर सामने आ रही है और भाजपा के मनोनीत प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी सहित भाजपा का शीर्ष नेतृत्व आप की बढ़ती ताकत से भन्नाये हुए हैं। वे येन-केन-प्रकेरण आप में फूट डाल कर उसे कमजोर करने की जोड़तोड़ बैठा रहे हैं और बिन्नी प्रकरण इस जोड़तोड़ की एक कड़ी मात्र हैं। भाजपाई आकाओं को यह साफ-साफ समझ लेना चाहिये की आम आदमी पार्टी संघर्षों से निकला एक राजनैतिक संगठन है और एक नये तौर तरीके की राजनीति को अंजाम देने में जुटी है। भाजपाई आकाओं को यह भी समझ लेना चाहिये कि उनकी गैरजुम्मेदारान हरकतों से आप को कोई नुकसान होने वाला नहीं है। बल्कि आप साफ-सुथरी होकर सशक्त रूप से उभरेगी जैसे अग्रि में तप कर सोना कुंदन बन कर निकलता है।
बिन्नी आप सरकार में मंत्री पद की महत्वकांक्षा पाले हुए थे। लेकिन उन्हें मंत्री पद नहीं मिला। फिर उन्होंने एक खास संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लडऩे के लिये अपनी दावेदारी जताई। लेकिन वहां भी उनकी दाल नहीं गली। ज्ञातव्य रहे कि विनोद कुमार बिन्नी, कांग्रेस से बगावत कर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे और आप से दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ कर विधायक बने हैं। जिससे साफ हो जाता है कि बिन्नी पदलोलुपता के संक्रमण से ग्रसित हैं और सत्ता हाथ से जाने के गम से गमगीन दिल्ली के भाजपाई नेताओं का उन्हें वरदहस्त है!
बिन्नी जिन मुद्दों को लेकर आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर निशाना साध रहे हैं, उन मु्द्दों में से कुछ मुद्दों पर फैसलों में वे खुद भी आप के शीर्षस्थ नेताओं के साथ शामिल थे। उस समय बिन्नी ने क्यों उन फैसलों का विरोध नहीं किया? क्यों उनकी जबान तालू से चिपक गई थी? आज जब उन्हें मंत्री पद नहीं मिला और लोकसभा सीट की उनकी दावेदारी को भी नजरन्दाज किया जा रहा है, तो वे भाजपाईयों के साथ मिल कर पार्टी में बगावत करने पर उतारू हो गये।
बिन्नी को पता होना चाहिये कि आप की तरह ही वाम जनवादी पार्टियों में भी पोलित ब्यूरो होते हैं और रोजमर्रा के फैसले पोलित ब्यूरो ही लेते हैं और उन फैसलों पर पार्टी की कार्यकारिणी अपनी स्वीकृति की मुहर लगाती हैं। वामपंथी जनवादी दलों में पोलित ब्यूरो की संवैधानिक व्यवस्था होती है। ठीक उस ही तरह आप में भी राजनैतिक समिति है जो पोलित ब्यूरो की तरह ही फैसले लेने के लिये अधिकृत है।
दरअसल, आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनावों में भाजपा के लिये एक सीधी चुनौती के रूप में उभर कर सामने आ रही है और भाजपा के मनोनीत प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी सहित भाजपा का शीर्ष नेतृत्व आप की बढ़ती ताकत से भन्नाये हुए हैं। वे येन-केन-प्रकेरण आप में फूट डाल कर उसे कमजोर करने की जोड़तोड़ बैठा रहे हैं और बिन्नी प्रकरण इस जोड़तोड़ की एक कड़ी मात्र हैं। भाजपाई आकाओं को यह साफ-साफ समझ लेना चाहिये की आम आदमी पार्टी संघर्षों से निकला एक राजनैतिक संगठन है और एक नये तौर तरीके की राजनीति को अंजाम देने में जुटी है। भाजपाई आकाओं को यह भी समझ लेना चाहिये कि उनकी गैरजुम्मेदारान हरकतों से आप को कोई नुकसान होने वाला नहीं है। बल्कि आप साफ-सुथरी होकर सशक्त रूप से उभरेगी जैसे अग्रि में तप कर सोना कुंदन बन कर निकलता है।


