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पश्चिम बंगाल सरकार को कौनसे पुरस्कार से नवाजा जाये? बतायें ममता बनर्जी!

पश्चिम बंगाल में एक महिला मुख्यमंत्री के राज में एक लड़की से सामुहिक दुश्कर्म किया जाता है और जब वह इस की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाती है तो उसके साथ दोबारा सामुहिक दुश्कर्म किया जाता है तथा फिर उस पर केरोसीन डाल कर जिन्दा जलाने की कोशिश की जाती है और इन दर्दनाक घटना पर पुलिस यह जानते हुए भी दोषियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करती कि दुश्कर्म के चलते लड़की गर्भवती भी हो गई थी। इस घटना ने आखीर कोलकाता पुलिस का कौनसा चरित्र उजागर किया है, यह तो राज्य की महिला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ही ज्यादा अच्छी तरह बता सकती है।
दिल्ली में दामिनी के साथ सामुहिक बलात्कार के मामले में पूरा देश आन्दोलित हो गया था। विशेष अदालत बनी, मुकदमा चला और दोषियों को सजा भी हुई। लेकिन कोलकाता की इस दामिनी के अपराधियों को तो पुलिस आज तक पकड़ ही नहीं पाई है और मामले को रफादफा करने के लिये पहिले तो यह प्रचारित किया जाता रहा कि लड़की ने आत्महत्या का प्रयास किया, लेकिन जब परिजनों और उनके सहयोगियों ने इस का जम कर विरोध किया तो पुलिस को मानना पड़ा कि लड़की दुश्कर्म के चलते गर्भवती हो गई थी और दुश्कर्मियों ने ही केरोसीन डाल कर उसे जिंदा जला डालने की साजिश रची थी। पुलिस ने लड़की का गुपचुप दाहसंस्कार करने की साजिश भी रचि। लेकिन लड़की का मृत्यु प्रमाण पत्र पिता कि पास होने के कारण वह उसमें भी सफल नहीं हो पाई।
बेशर्मी की हद्द देखिये, दोषी दरिन्दों के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय कोलकाता की इस दामिनी के पिता और सभी परिजनों पर वापस बिहार लौट जाने का दबाव बनाया जा रहा है। वहशी दरिन्दों के साथ-साथ कोलकाता पुलिस प्रशासन ने शायद मामला दर्ज कर अपने कर्तव्यों को विराम देकर अपनी हैवानियत की सारी हदें पार कर ली नजर आता है।
आज गैरजुम्मेदारान और शर्मनाक चुप्पी ओढे पश्चिम बंगाल में तृणमूल की ममता बनर्जी की सरकार को इस ही आम अवाम ने लाल झण्डे वालों से सत्ता छीन कर इस भरोसे से सत्ता सौंपी थी कि अब पश्चिम बंगाल में आम आदमी का राज होगा। लेकिन ममता बनर्जी ओर उनके सिपहसालारों की छत्रछाया में महिलाओं की इज्जत लूटने वालों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होना साफ-साफ दर्शाता है कि पश्चिम बंगाल में धीरे-धीरे गुण्डाराज कायम होता जा रहा है।
पिछले साल 08 दिसम्बर को तृणमूल कांग्रेस से जुड़े गुण्डों ने हुगली जिले के धनियाखली स्थित नेताजी भवन में चल रही ऑल इण्डिया फारवर्ड ब्लाक की स्थानीय ब्लाक कमेटी की मीटिंग के दौरान धारदार हथियारों से लैस होकर हमला किया। नतीजन फारवर्ड ब्लाक के वयोवृद्ध नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री नरेन्द्र डे सहित कई कार्यकर्ता घायल हो गये थे। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के इन गुण्डों के खिलाफ भी पुलिस कार्यवाही करने में हिचकिचा रही है और हाथ पर हाथ धरे बैठी है!
उधर पुलिस ने नये सचिवालय के सामने राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मौजूदगी में ही पत्रकारों की पिटाई कर दी लेकिन दोषी पुलिस अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही सरकार ने नहीं की!
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव मुकुल राय कोलकाता की दामिनी के साथ दोबार बलात्कार और फिर जिन्दा जलाने की दरिन्दों की कोशिश पर दी गई सफाई भी आम अवाम को शर्मसार करने वाली है। मुकुल राय का कहना है कि मामले में विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस की छवि खराब करने जैसी हरकत कर रहे हैं। अब ये नेताजी ही बतायें कि एक लड़की से दरिन्दे दो बार सामुहिक बलात्कार करते हैं और गर्भवती लड़की को जिन्दा जलाने की कोशिश करते हैं, जिसमें लड़की की मौत हो जाती है और पुलिस प्रशासन और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती है, तो फिर ऐसी निकम्मी सरकार को कौन से पुरस्कार से नवाजा जाये?

 
AGRAGAMI SANDESH

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