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खरतरगच्छ संघ के संदर्भ में नैतिकता-अनैतिकता की नई परिभाषा लिखनी होगी!

स्थानीय श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ की कमान संघ में सहवरण के रास्ते टपके सदस्यों के हाथ में देने की पूरी तैयारी हो गई है। इस हेतु संघ की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी की बैठक आगामी आज 6 जनवरी को आहूत की गई बताई जाती है।
संघ से जुड़े विश्वस्त सूत्रों की माने तो अगले तीन साल के लिये सहवरण के रास्ते कार्यकारिणी का सदस्य बना कर कुशलचंद सुराना को अध्यक्ष बनाया जा रहा है। वहीं सहवरण के जरिये कार्यकारिणी में ला कर श्रीमती आशा गोलेछा को उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है। विजय संचेती, विश्वास गोठी और पदम सिंह चौधरी अगले तीन सहवरित सदस्य कार्यकारिणी में हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार संघ के अगले कोषाध्यक्ष की जगह शिवराज सिंह भण्डारी और सहमंत्री राजेन्द्र कुमार बोहरा ले सकते हैं।
संघ बंधुओं ने सवाल उठाया कि क्या चुनावों में जीते हुए संचेती ग्रुप के 15 कार्यकारिणी सदस्यों में से एक भी व्यक्ति संघ का अध्यक्ष या उपाध्यक्ष बनने लायक नहीं है, जिसके कारण सेठों या उनके परिजनों को सहवरित कर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाया जा रहा है? संघ की निर्वाचित कार्यकारिणी में राजेन्द्र कुमार संचेती भी हैं, अब सवाल उठता है कि उनके भाई विजय संचेती को सहवरित कर कार्यकारिणी का सदस्य क्यों बनाया जा रहा है? क्या संघ कार्यकारिणी में सहवरित करने के लिये इनसे योग्य कोई भी व्यक्ति समाज में नहीं है? होना तो यह चाहिये कि एक ही परिवार से अगर दो सदस्य निर्वाचित होकर आते भी हैं तो नैतिकता के आधार पर दोनों में से एक को इस्तीफा देकर समाज के अन्य प्रबुद्ध व्यक्ति का सहवरण कर कार्यकारिणी को व्यापक स्वरूप दिया जाना चाहये।
श्रीमती आशा गोलेछा का संघ कार्यकारिणी में सहवरण करने का भी कोई औचित्य नजर नहीं आ रहा है। आशा जी लम्बे अर्से से समाज की श्री वीर बालिका सीनियर सैकण्डरी स्कूल, वीर बालिका पी.जी.कॉलेज और श्री जैन श्वेताम्बर शिक्षा समिति के आधीन चल रही दो स्कूलों में पदाधिकारी हैं। हम यहां चारों शिक्षा संस्थाओं में उनके क्रियाकलापों पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करेंगे क्योंकि यह उनके स्वंय के आत्मविश्लेषण का मुद्दा है! लेकिन यह जानने का तो संघ के समाज बंधुओं का हक है कि जब वे पहिले से ही चार संस्थाओं में व्यस्त हैं तो फिर संघ की कार्यकारिणी में सहवरित होकर आने की क्यों इच्छुक रहीं? अगर वे खुद नहीं आकर कोई अन्य प्रबुद्ध समाज बन्धु के लिये रास्ता साफ करती तो संघहित में ज्यादा सही होता!
कायदे से सामाजिक समरसता, समाज में एकजुटता रखने के लिये समाज की 26 व्यक्तियों की चुनिंदा कार्यकारिणी के सभी सदस्यों को आपसी विद्वेष की भावना को त्याग कर एकमत से पांच सहयोगियों का सहवरण करना चाहये था, लेकिन बहुमत के आधार पर अपनी ताकत दिखा कर एक पक्ष ने सहवरण कर समाज में दरार डालने जैसा कृत्य किया है!
ऐसी स्थिति में संघ कार्यकारिणी में सहवरण के जरिये सदस्य बन कर पदग्रहण करने वालों तथा एक ही परिवार के चुनिंदा या सहवरित होकर संघ कार्यकारिणी में आ रहे सदस्यों से हमारा यही आग्रह रहेगा कि वे सामाजिक समरसता, नैतिकता और ईमानदारी की रूह में पदग्रहण न करें और यदि पदग्राहण कर भी लिया है तो तत्काल इस्तीफा देकर अन्य प्रबुद्ध समाजसेवियों को समाज की सेवा करने का मौका दें। लेकिन जैसा माहौल है उससे श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ में कुर्सी चिपकुओं के चलते ऐसा लगता नहीं है! ऐसी स्थिति में तो हमें संघ के लिये नैतिकता-अनैतिकता की परिभाषा नये सिरे से लिखनी होगी!
संघ के इन चुनावों में नोटों ने जो रास रचाया उससे नोट देने वालों और नोट लेने वालों के चेहरे भी बेनकाब हुए हैं। हम इस मुद्दे पर अलग से विस्तार से लिखेंगे और कुर्सी की होड़ में नैतिकता और ईमानदारी को तिलांजली देने वालों को बेनकाब करेंगे।


 
AGRAGAMI SANDESH

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