जी हां! भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार में आगामी लोकसभा चुनावों तक कांग्रेसी कल्चर का राज ही चलेगा। शिक्षामंत्री कालीचरण सर्राफ ने राजस्थान विधानसभा परिसर में स्थित अपने कार्यालय में अपनी ही पार्टी के विधायकों को यह कहा बताया कि शिक्षा विभाग में तबादले लोकसभा चुनावों के बाद ही होंगे। सर्राफ के इस कथन से भाजपाई विधायक बुरी तरह बौखला गये और एक विधायक ...भिण्डा तो शिक्षामंत्री से सीधे-सीधे उलझ पड़े और सर्राफ को साफ-साफ कहा कि कानून मत सिखाओ! तबादला नहीं हो सकता है तो एपीओ करो या भेजो डेपूटेशन पर! विधायक को मलाल इस बात का है कि जिस लेक्चरार का वे तबादला कराना चाहते हैं, उसने कांग्रेसीराज में इन विधायक जी को कॉलेज में नहीं घुसने दिया था। अब विधायक जी को मलाल इस बात का भी है कि भाजपाईराज में भाजपा विधायक होते हुए लेक्चरार का तबादला तक नहीं करा सके!
उधर चूरू जिले की सरदारशहर पंचायत समिति के ब्लाक शिक्षा अधिकारी अभयशील सोनी, जोकि एक कांग्रेसी विधायक के खासमखास हैं, का तबादला करने की भी हैसियत शिक्षामंत्री की नहीं है जबकि राज्य की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के खास सिपहसालार चिकित्सा मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ चूरू से भाजपा विधायक हैं।
एक बात साफ है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दक्षिणपंथी राजनैतिक दल हैं। इन पार्टियों के आकाओं की जुगलबंदी से अब आम अवाम के साथ-साथ इन पार्टियों के चुनिंदा जनप्रतिनिधी भी दु:खी होने शुरू हो गये हैं।
उधर चूरू जिले की सरदारशहर पंचायत समिति के ब्लाक शिक्षा अधिकारी अभयशील सोनी, जोकि एक कांग्रेसी विधायक के खासमखास हैं, का तबादला करने की भी हैसियत शिक्षामंत्री की नहीं है जबकि राज्य की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के खास सिपहसालार चिकित्सा मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ चूरू से भाजपा विधायक हैं।
एक बात साफ है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दक्षिणपंथी राजनैतिक दल हैं। इन पार्टियों के आकाओं की जुगलबंदी से अब आम अवाम के साथ-साथ इन पार्टियों के चुनिंदा जनप्रतिनिधी भी दु:खी होने शुरू हो गये हैं।


