अग्रगामी संदेश हिन्‍दी साप्ताहिक ***** प्रत्येक सोमवार को प्रकाशित एवं प्रसारित ***** सटीक राजनैतिक विश्लेषण, लोकहित के समाचार, जनसंघर्ष का प्रहरी

नेताओं की ज्यादा होंशियारी ले डूबी कांग्रेस को!

नेताओं की जरूरत से ज्यादा होंशियारी और आपसी सिरफुटव्वल ही राजस्थान विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के मुख्य कारण रहे हैं। यही वजह रही कि अशोक गहलोत सरकार के जनहित के कामकाज को दरकिनार कर अवाम ने भाजपा का दाम थामा! वैसे राजस्थान के लिये यह स्पष्ट कहावत है कि प्रदेश में एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा की बनती है। पिछली बार राज्य में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार थी, उससे पहिले भाजपा की वसुन्धरा राजे सरकार थी और उससे पहिले कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार थी।
प्रदेश में कांग्रेस सी.पी.जोशी और अशोक गहलोत दो खेमों में बटीं हुई है। सी.पी.जोशी नाथद्वारा विधानसभा क्षेत्र से सिर्फ एक वोट से चुनाव हार कर राजस्थान के मुख्यमंत्री की दौड़ से बाहर हो गये थे। नतीजन अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने। इससे पनपी गुटबाजी के अलावा अशोक गहलोत की हटधर्मिता और जोड़तोड़ की राजनीति के चलते कांग्रेसियों में अंदर ही अंदर गहरी नाराजगी पनपती रही, लेकिन अशोक गहलोत ने इस नाराजगी को दूर करने के मुद्दे को कोई तवज्जो नहीं दी, नतीजन संगठन के स्तर पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ती चली गई। गहलोत साहब ने अपने रूतबे को कांग्रेस के आलाकमान के सामने साबित करने के लिये राहुल गांधी, सोनिया गांधी व अन्य केंद्रीय नेताओं की सभायें उन क्षेत्रों में करवाई, जहां कांग्रेसी खेमा मजबूत था। जबकि भाजपा ने नरेन्द्र मोदी की सभायें उन इलाकों में करवाई गई जहां पर भाजपा पार्टी कमजोर थी लेकिन कांग्रेस के प्रति नाराजगी थी। निश्चित रूपसे इसका फायदा भाजपा को मिलना ही था।
जो अहम मुद्दा इन चुनावों में उभर कर आया, वह है कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने इस विधानसभा चुनाव में अपनी पूरी ताकत झौंक दी थी। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने इन चुनावों में भाजपा की जीत को अपनी नाक का सवाल बना लिया था। अच्छी खासी तादाद में विधानसभा क्षेत्रों में आरएसएस के कार्यकर्ता मतदाताओं को मतदान के लिये प्रोत्साहित कर मतदान केंद्र पर भिजवाते हुए नजर आये, जबकि कांग्रेस के स्तर से मतदाताओं को मतदान के लिये प्रेरित कर मतदान केंद्र तक पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं थी।
सांसद किरोड़लाल मीणा के नेतृत्व में एनपीपी के भाजपा विरोधी प्रचार ने भी आग में घी का काम किया। अवाम के दिमाग में डॉ.किरोड़ीलाल मीणा और अशोक गहलोत की सांठगांठ का उलटा असर हुआ और मतदाता का झुकाव भाजपा की ओर होता चला गया और इस ट्रेण्ड को कांग्रेस के चुनाव मैनेजर नहीं समझ पाये।
कांग्रेस और अशोक गहलोत की उम्मीद के खिलाफ एनपीपी, जमींदारा पार्टी और कुछ पार्टियां जिन्हें कांग्रेस के चुनावी मैनेजरों ने अप्रत्यक्ष रूप से प्रश्रय दिया था, वो पार्टियां ही अन्तत: कांग्रेस के वोट बैंक को ले डूबे।
अब देखना यह है कि विधानसभा चुनावों में अपनी हार से सबक लेकर प्रदेश कांग्रेस के आला नेता और केंद्रीय नेतृत्व क्या रणनीति अपनाते हैं। फिलहाल जो अहम चिंता का विषय है वह यह है कि विधानसभा चुनावों में हुई करारी हार से निराश हुए पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा कैसे लाई जाये?

 
AGRAGAMI SANDESH

AGRAGAMI SANDESH
AGEAGAMI SANDESH

मुख्‍य पृष्‍ठ | जयपुर संस्‍करण | राज्‍य समाचार | देश समाचार | विज्ञापन दर | सम्‍पर्क