जयपुर के श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ की नई कार्यकारिणी में काफी तादाद में वे लोग भी सदस्य निर्वाचित हुए हैं जो परम आरदणीय उपाध्याय मुनि सुखसागर के विद्वान शिष्य और भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानीत मुनि कांति सागर के चरण स्मारक के पुर्नस्थापित किये जाने के संघ साधारण सभा के फैसले की सुराना परिवार के दबाव में आकर अनदेखी करते रहे! तत्कालीन संघ मंत्री नवरत्नमल श्रीश्रीमाल, कोषाध्यक्ष प्रकाश कोठारी और कार्यकारिणी सदस्य विनय धांधिया ने इस प्रकरण में जो नौटंकी की और साधारण सभा के फैसले को नकारने की जो गैरजुम्मेदारान करतूत की उसका खमियाजा अध्यक्ष कुशलचंद सुराना एवं उनकी पूरी टीम 'बीÓ (वर्तमान चुनावों में संचेती ग्रुप) को इस्तीफा देकर चुकाना पड़ा था। इस बार सेठों की टीम 'एÓ (माणकचंद गोलेछा, राजेन्द्र कुमार छाजेड़ और ज्योति कोठारी के नेतृत्व में वर्तमान चुनावों में कार्यकर्ता ग्रुप) को भी गुलांची खानी पड़ी। अब संचेती ग्रुप को फैसला लेना है कि एक क्रान्तिकारी विद्धान संत के समाधि स्थल को खण्डित कर रईसजादों की मौजमस्ती का आरामगाह बनाना चाहिये या फिर उनकी समाधि जिसे खण्डित कर विलोपित कर दिया गया है, उसको पुर्नस्थापित किया जाना चाहिये!
जयपुर के खरतरगच्छ संघ पर कभी टीम 'एÓ और टीम 'बीÓ के जरिये काबिज पूंजीपतियों को भी साफ-साफ समझ लेना चाहिये कि उनकी टीम 'एÓ और टीम 'बीÓ की करतूतों से नाराज समाजबंधु एकजुट होने लगे हैं। संघ के खजाने पर सांप की तरह कुण्डली मार कर बैठने के सपने संजोने वालों को समाज के 20.55 प्रतिशत समाज बंधुओं ने आगाह कर दिया है कि या तो वे खुद सुधरें या वक्त आने पर समाज खुद ही उन्हें सुधार देगा?
उधर समग्र जैन समुदाय को राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर अल्पसंख्यक समुदाय घोषित करवाने की सशक्त असरदार मुहिम श्वेताम्बर एवं दिगम्बर दोनों ही समाजों द्वारा चलाई जा रही है। अगर जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलता है, तो सरकारी स्तर पर जैन सांस्कृतिक अकादमी की स्थापना, जैन समाज की शिक्षण संस्थाओं को विशेष दर्जा, जैन समुदाय के बेरोजगार युवकों को विशेष आर्थिक सहायता पैकेज, बच्चों को शैक्षणिक छात्रवृतियां जैसे कई विशेष लाभ मिलने शुरू हो जायेंगे। साफ है कि इन सुविधाओं के मिलने से जैन समुदाय का आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग प्रगति कर सकेगा।
अब फैसला जयपुर खरतरगच्छ संघ में नवनिर्वाचित पदासीन हुए लोगों को करना है कि उन्हें समाज के साथ समाजहित के संकल्प के साथ चलना है या फिर पूंजीपतियों का दुमछल्ला बन कर समाज के खजाने पर कुंडली मार कर बैठना है!
जयपुर के खरतरगच्छ संघ पर कभी टीम 'एÓ और टीम 'बीÓ के जरिये काबिज पूंजीपतियों को भी साफ-साफ समझ लेना चाहिये कि उनकी टीम 'एÓ और टीम 'बीÓ की करतूतों से नाराज समाजबंधु एकजुट होने लगे हैं। संघ के खजाने पर सांप की तरह कुण्डली मार कर बैठने के सपने संजोने वालों को समाज के 20.55 प्रतिशत समाज बंधुओं ने आगाह कर दिया है कि या तो वे खुद सुधरें या वक्त आने पर समाज खुद ही उन्हें सुधार देगा?
उधर समग्र जैन समुदाय को राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर अल्पसंख्यक समुदाय घोषित करवाने की सशक्त असरदार मुहिम श्वेताम्बर एवं दिगम्बर दोनों ही समाजों द्वारा चलाई जा रही है। अगर जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलता है, तो सरकारी स्तर पर जैन सांस्कृतिक अकादमी की स्थापना, जैन समाज की शिक्षण संस्थाओं को विशेष दर्जा, जैन समुदाय के बेरोजगार युवकों को विशेष आर्थिक सहायता पैकेज, बच्चों को शैक्षणिक छात्रवृतियां जैसे कई विशेष लाभ मिलने शुरू हो जायेंगे। साफ है कि इन सुविधाओं के मिलने से जैन समुदाय का आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग प्रगति कर सकेगा।
अब फैसला जयपुर खरतरगच्छ संघ में नवनिर्वाचित पदासीन हुए लोगों को करना है कि उन्हें समाज के साथ समाजहित के संकल्प के साथ चलना है या फिर पूंजीपतियों का दुमछल्ला बन कर समाज के खजाने पर कुंडली मार कर बैठना है!


